BNT Desk: बिहार में सरकारी कामकाज को डिजिटल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठकों को तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंत्रियों को कैबिनेट बैठक के एजेंडे, प्रस्तावों और जरूरी दस्तावेजों के लिए कागजी फाइलों पर निर्भरता कम करनी होगी। वे अपने टैबलेट या लैपटॉप पर बैठक से संबंधित सामग्री देख सकेंगे। इससे कैबिनेट की बैठक की तैयारी और दस्तावेजों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था के लिए राज्य सरकार ई-कैबिनेट पोर्टल विकसित कर रही है। समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य मंत्रिमंडल इस संबंध में प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे चुका है और पोर्टल के निर्माण की तकनीकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को सौंपी गई है। हालांकि, पोर्टल कब से पूरी तरह काम करना शुरू करेगा और इसकी सभी सुविधाएं किस तरह लागू होंगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
क्या है ई-कैबिनेट व्यवस्था?
ई-कैबिनेट ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसके जरिए मंत्रिमंडल की बैठक से पहले, बैठक के दौरान और बैठक के बाद होने वाले कई काम ऑनलाइन माध्यम से किए जा सकते हैं। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस तरह के पोर्टल का उद्देश्य कैबिनेट बैठकों में कागजों के इस्तेमाल को कम करना और बैठक से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना है। इसमें एजेंडा और प्रस्तावों से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की सुविधा हो सकती है।
बिहार में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भी मंत्रियों को बैठक से संबंधित जानकारी एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने की योजना है। अभी तक बैठक की तैयारी में कागजी दस्तावेजों और फाइलों का इस्तेमाल होने से बड़ी मात्रा में सामग्री तैयार करनी पड़ सकती है। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से इस प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।
हालांकि, बिहार में तैयार हो रहे पोर्टल की अंतिम सुविधाएं और उसके इस्तेमाल से संबंधित नियम लागू होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। इसलिए फिलहाल इसे कैबिनेट की कार्यप्रणाली को डिजिटल बनाने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
एक ही पोर्टल पर मिलेंगे एजेंडे और जरूरी दस्तावेज
ई-कैबिनेट व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य बैठक में रखे जाने वाले प्रस्तावों और एजेंडे से संबंधित दस्तावेजों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। इससे मंत्रियों को अलग-अलग कागजी फाइलों में जानकारी तलाशने की जरूरत कम हो सकती है। बैठक से पहले वे डिजिटल माध्यम से प्रस्तावों को पढ़ सकेंगे और संबंधित विषयों की जानकारी हासिल कर सकेंगे।
कैबिनेट की बैठकों में विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्ताव रखे जाते हैं। इन प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय के लिए संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता जरूरी होती है। डिजिटल पोर्टल के जरिए इन दस्तावेजों तक पहुंच आसान बनाने की योजना है। इससे बैठक में शामिल मंत्रियों को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, डिजिटल मंच पर दस्तावेज उपलब्ध होने से कागजी प्रतियों को तैयार करने, उन्हें व्यवस्थित रखने और अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने की जरूरत घट सकती है। हालांकि, दस्तावेज अपलोड करने, संशोधन करने, अंतिम एजेंडा जारी करने और निर्णयों का रिकॉर्ड रखने की पूरी प्रक्रिया बिहार के पोर्टल के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगी।
लैपटॉप और टैबलेट पर देख सकेंगे प्रस्ताव
नई व्यवस्था में लैपटॉप और टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मंत्रियों को कैबिनेट बैठक से संबंधित एजेंडा और जरूरी दस्तावेज डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बैठक में किसी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संबंधित सामग्री देखना और जरूरत के अनुसार जानकारी तक पहुंचना आसान हो सकता है।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के ई-कैबिनेट मॉडल में टैबलेट के अनुकूल व्यवस्था, सुरक्षित दस्तावेजों तक सीमित पहुंच और बैठक से पहले तथा बाद की प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। बिहार में विकसित होने वाले पोर्टल में कौन-कौन से फीचर शामिल किए जाएंगे, इसकी अंतिम जानकारी उपलब्ध होने पर ही स्पष्ट होगी।
डिजिटल व्यवस्था का मतलब सिर्फ कागजों को स्क्रीन पर दिखाना नहीं है। इसका उद्देश्य दस्तावेजों के प्रबंधन और सूचना साझा करने की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करना है। यदि संबंधित प्रक्रियाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं, तो मंत्रियों और अधिकारियों के लिए बैठक की तैयारी करना आसान हो सकता है।
कागज, प्रिंटिंग और फाइलों पर खर्च घटने की उम्मीद
कैबिनेट बैठकों में प्रस्तावों और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां तैयार करने में कागज, प्रिंटिंग और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल होता है। ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू होने पर इनकी जरूरत कम हो सकती है। इससे सरकारी कामकाज में कागज की खपत घटाने और दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कागजी फाइलों की संख्या कम होने से दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें खोजने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी को निर्धारित अनुमति के तहत जल्दी तलाशा जा सकता है। इससे बैठक से जुड़े दस्तावेजों के प्रबंधन में सुविधा मिल सकती है।
हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि नई व्यवस्था के तहत कितनी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल होती हैं और किन कामों में कागजी दस्तावेजों का इस्तेमाल जारी रहता है। इसलिए इसे लागू करने के बाद ही खर्च और समय में होने वाले वास्तविक बदलाव का आकलन किया जा सकेगा।
गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा भी होगी अहम
कैबिनेट की बैठकों में सरकारी नीतियों, विभागीय प्रस्तावों और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों से संबंधित दस्तावेज रखे जाते हैं। ऐसे दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी होता है। इस वजह से ई-कैबिनेट पोर्टल में सुरक्षा और अधिकृत लोगों को ही दस्तावेजों तक पहुंच देने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
NIC के ई-कैबिनेट मॉडल में सुरक्षित पहुंच और गोपनीय सामग्री को नियंत्रित तरीके से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। बिहार में भी पोर्टल की कार्यप्रणाली तय करते समय दस्तावेजों की सुरक्षा, उपयोगकर्ताओं की अनुमति और रिकॉर्ड के प्रबंधन से जुड़े प्रावधान अहम होंगे।
हालांकि, बिहार के प्रस्तावित पोर्टल में सुरक्षा से संबंधित सभी तकनीकी प्रावधानों का विस्तृत ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि मंत्रियों और अधिकारियों के लिए लॉगिन, दस्तावेजों की अनुमति, रिकॉर्डिंग और अन्य सुरक्षा संबंधी सुविधाएं किस स्वरूप में लागू की जाएंगी।
क्या ऑनलाइन होगी कैबिनेट की पूरी बैठक?
ई-कैबिनेट व्यवस्था को लेकर यह समझना जरूरी है कि बैठक से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल बनाना और पूरी बैठक को ऑनलाइन आयोजित करना अलग-अलग बातें हैं। प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कैबिनेट बैठक से संबंधित एजेंडे और दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि बिहार में सभी कैबिनेट बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होंगी।
NIC के ई-कैबिनेट मॉडल में वर्चुअल बैठक की सुविधा भी उपलब्ध है, लेकिन बिहार में इसका कितना इस्तेमाल होगा, यह राज्य सरकार की ओर से तय की जाने वाली व्यवस्था पर निर्भर करेगा। बैठक का आयोजन किस स्थान पर होगा, मंत्रियों की उपस्थिति से संबंधित नियम क्या होंगे और कौन-सी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इसलिए फिलहाल सबसे स्पष्ट बदलाव यह है कि कैबिनेट बैठक की सामग्री को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। बैठक के संचालन से जुड़े अन्य बदलावों की पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही हो सकेगी।
बिहार में डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा
बिहार सरकार पहले से ही प्रशासनिक कामकाज में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए विभिन्न डिजिटल पहलों पर काम कर रही है। राज्य में ई-ऑफिस और ऑनलाइन निगरानी जैसे माध्यमों से सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप देने की कोशिश की गई है। ऐसे में ई-कैबिनेट पोर्टल को भी इसी दिशा में एक और कदम माना जा सकता है।
कैबिनेट राज्य सरकार के महत्वपूर्ण नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों का केंद्र होता है। यदि बैठक से संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो इससे कामकाज को व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है। मंत्रियों को प्रस्तावों तक समय पर पहुंच मिलने और दस्तावेजों के प्रबंधन में सुविधा होने से बैठक की तैयारी भी अधिक सुचारु हो सकती है।
फिलहाल राज्य सरकार पोर्टल विकसित करने की प्रक्रिया में जुटी है और इसके तकनीकी स्वरूप को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही इसके इस्तेमाल की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी। कुल मिलाकर, बिहार में ई-कैबिनेट व्यवस्था का लक्ष्य कैबिनेट बैठकों को कागजी फाइलों पर कम निर्भर बनाना और सरकारी कामकाज में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है।