ISRO का NVS-03 लॉन्च सफल, भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC को मिलेगी मजबूती

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BNT Desk: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। ISRO ने शुक्रवार देर रात श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। करीब 2,250 किलोग्राम वजन वाले इस सैटेलाइट को निर्धारित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया गया।

यह मिशन भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC यानी Navigation with Indian Constellation को मजबूती देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NavIC को भारत का अपना GPS भी कहा जाता है। इसका उद्देश्य देश को पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करना है।

 

स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक से लैस है NVS-03

NVS-03 की सबसे खास बात इसमें लगाया गया स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक है। सैटेलाइट में भारत में विकसित रूबिडियम एटॉमिक क्लॉक के साथ अन्य एटॉमिक क्लॉक भी मौजूद हैं। एटॉमिक क्लॉक बेहद सटीक समय मापने का काम करती है और सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम के लिए इसका महत्व काफी अधिक है। नेविगेशन सैटेलाइट पृथ्वी पर मौजूद रिसीवर तक रेडियो सिग्नल भेजते हैं। रिसीवर इन सिग्नलों के पहुंचने में लगे समय के आधार पर अपनी स्थिति का अनुमान लगाता है। ऐसे में समय की गणना में थोड़ी-सी भी गलती लोकेशन की सटीकता को प्रभावित कर सकती है। सैटेलाइट में मौजूद एटॉमिक क्लॉक समय को बेहद सटीक बनाए रखने में मदद करती है। स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक का इस्तेमाल भारत की महत्वपूर्ण तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की कोशिशों का हिस्सा है। इससे देश को नेविगेशन और समय निर्धारण से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए अपनी तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी।

NavIC को फिर से मजबूत करने की दिशा में अहम कदम

NavIC भारत का क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। इसे भारत के साथ देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में पोजिशनिंग और टाइमिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इस सिस्टम का इस्तेमाल सड़क और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, सटीक कृषि और रणनीतिक गतिविधियों सहित कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। NVS-03 नई पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइटों की श्रृंखला का तीसरा सैटेलाइट है। इसका उद्देश्य NavIC की सेवाओं को जारी रखने और उनकी उपलब्धता बेहतर बनाने में योगदान देना है।  NVS-03 का सफल प्रक्षेपण ऐसे समय में हुआ है, जब भारत अपने स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। सैटेलाइट आधारित नेविगेशन आज नागरिक, व्यावसायिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हो चुका है।

 

विदेशी GPS पर निर्भरता कम करने की कोशिश

भारत के लिए अपना नेविगेशन सिस्टम मजबूत करना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। विदेशी संचालित नेविगेशन सिस्टम पर निर्भर रहने की स्थिति में किसी संघर्ष या युद्ध के दौरान सेवाओं की उपलब्धता सीमित होने का जोखिम रहता है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारत को GPS से संबंधित सीमाओं का अनुभव हुआ था। इसके बाद स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली विकसित करने की जरूरत पर जोर बढ़ा। NavIC का उद्देश्य भारत को अपनी पोजिशनिंग और टाइमिंग सेवाओं के लिए स्वतंत्र व्यवस्था उपलब्ध कराना है।  सैन्य क्षेत्र में सटीक पोजिशनिंग और टाइमिंग का इस्तेमाल मिसाइल नेविगेशन, युद्धपोतों के समन्वय, सैनिकों की आवाजाही और विमान संचालन जैसी गतिविधियों में किया जाता है। एक मजबूत स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम इन क्षेत्रों में विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है।

 

NVS-03 में L1, L5 और S-बैंड सिग्नल

NVS-03 में L1 सिग्नल की सुविधा भी शामिल है, जबकि NavIC पहले से L5 और S-बैंड सिग्नल का इस्तेमाल करता है। L1 सिग्नल आधुनिक नागरिक नेविगेशन रिसीवर और कई स्मार्टफोन चिपसेट के साथ अनुकूलता बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे NavIC की उपयोगिता आम नागरिकों और व्यावसायिक उपकरणों के लिए भी बढ़ने की संभावना है। नेविगेशन सेवाओं का इस्तेमाल मोबाइल फोन, वाहन, समुद्री परिवहन और अन्य स्थान-आधारित सेवाओं में किया जा सकता है।

 

GSLV-F18 की 20वीं उड़ान

NVS-03 को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला GSLV-F18 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 20वीं उड़ान थी। रॉकेट ने शुक्रवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी। लॉन्च के लगभग 18 मिनट बाद सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी कक्षा में लगभग 37,023 किलोमीटर का अपोजी और 170 किलोमीटर का पेरिजी था।

 

NVS-02 की विफलता के बाद अगला महत्वपूर्ण मिशन

NVS-03 का प्रक्षेपण पिछले नेविगेशन सैटेलाइट मिशन NVS-02 के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NVS-02 को जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था, लेकिन इंजन के ऑर्बिट बढ़ाने वाले चरण में पाइरो वाल्व तक ड्राइव सिग्नल नहीं पहुंचने के कारण वह निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं हो सका। NVS-03 मिशन को NVS-02 की विफलता के विश्लेषण के बाद सुझाए गए सुधारात्मक उपायों के साथ आगे बढ़ाया गया। इसका सफल प्रक्षेपण NavIC की अगली पीढ़ी की सैटेलाइट श्रृंखला को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि है।

 

नागरिक और रणनीतिक सेवाओं को मिलेगा लाभ

NVS-03 की मदद से NavIC की सेवाओं को मजबूत करने की उम्मीद है। बेहतर नेविगेशन और सटीक समय निर्धारण का लाभ सड़क परिवहन, समुद्री गतिविधियों, आपदा प्रबंधन, कृषि और अन्य नागरिक सेवाओं को मिल सकता है। इसके साथ ही स्वदेशी नेविगेशन क्षमता भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए भी महत्वपूर्ण है। NVS-03 का सफल प्रक्षेपण देश के अपने सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम को मजबूत करने और महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

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