BNT Desk: नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH), पटना में कथित रैगिंग मामले को लेकर कॉलेज प्रशासन की जांच जारी है। शुक्रवार को एमबीबीएस में वर्ष 2026 में नवनामांकित 100 से अधिक छात्र-छात्राएं एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वायड कमेटी के समक्ष प्रस्तुत हुए। विद्यार्थियों ने कमेटी के सामने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके साथ रैगिंग नहीं हुई है।
कॉलेज में प्राचार्य प्रो. डॉ. उषा कुमारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में विद्यार्थियों के जवाब और उपलब्ध तथ्यों पर चर्चा की गई। कमेटी के सदस्यों ने विद्यार्थियों की ओर से दिए गए जवाबों और तथ्यों के आधार पर वर्ष 2024 बैच के विद्यार्थियों को कथित रैगिंग मामले से आरोपमुक्त कर दिया। हालांकि, पूरे मामले के सूत्रधार की तलाश अभी जारी है। कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न बैच के विद्यार्थियों से उनका पक्ष सुना है। जांच के दौरान विद्यार्थियों की उपस्थिति, बीमारी, यात्रा और अन्य परिस्थितियों से जुड़े तथ्यों को भी सामने रखा गया।
2025 बैच के विद्यार्थियों ने स्वजन के साथ रखा पक्ष
वर्ष 2025 बैच के छात्र-छात्राएं शुक्रवार को अपने स्वजन के साथ बैठक में पहुंचे। उन्होंने कमेटी के सामने अपनी-अपनी परिस्थितियों और दलीलों को रखा। कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वे बीमार थे और हाल ही में कॉलेज पहुंचे हैं। कुछ ने कहा कि वे पटना में मौजूद नहीं थे, जबकि एक विद्यार्थी ने उत्तराखंड से आने की बात कही और अपने ट्रेन टिकट जैसे दस्तावेज भी दिखाए।
कमेटी ने सभी विद्यार्थियों की दलीलें सुनीं और उनके पक्ष को रिकॉर्ड में लिया। इसके बाद वर्ष 2025 बैच के छात्र-छात्राओं को प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर का शपथ पत्र कॉलेज में जमा करने का निर्देश दिया गया। शपथ पत्र में विद्यार्थियों को यह लिखकर देना होगा कि कथित रैगिंग मामले से उनका कोई संबंध नहीं है और भविष्य में भी वे ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यह कदम मामले की जांच और विद्यार्थियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
2024 बैच के आठ विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग स्क्वायड में जिम्मेदारी
प्राचार्य प्रो. डॉ. उषा कुमारी ने बताया कि वर्ष 2024 बैच के आठ विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग स्क्वायड टीम में शामिल किया गया है। इनमें रौशन कुमार, प्रिंस गौरव, गौरव कुमार, अरूण कुमार, अरूण राज, शशि कुमार, धर्मवीर यादव और शिवम प्रकाश के नाम शामिल हैं।
ये विद्यार्थी कॉलेज में छात्र स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखेंगे। यदि उन्हें किसी तरह की रैगिंग या अनुचित गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो वे इसकी सूचना कॉलेज प्रशासन को देंगे। कॉलेज प्रशासन ने विद्यार्थियों को निगरानी और सूचना साझा करने की जिम्मेदारी देकर परिसर में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में कदम उठाया है। एंटी रैगिंग स्क्वायड में विद्यार्थियों को शामिल करने का उद्देश्य छात्र-छात्राओं के बीच संवाद बढ़ाना और किसी भी शिकायत को समय रहते प्रशासन तक पहुंचाना है। कॉलेज प्रशासन की ओर से मामले के सूत्रधार की तलाश जारी रहने की बात भी कही गई है।
रूलबुक-2026 और शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
एनएमसीएच से जुड़े रूलबुक-2026 का पीडीएफ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, ऑल इंडिया रैगिंग कमेटी और बिहार ग्रीवांस सेल आदि को भेजे जाने के बाद कथित रैगिंग का मामला सामने आया था। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
जांच के दौरान अलग-अलग बैच के विद्यार्थियों को कमेटी के सामने बुलाकर उनका पक्ष सुना गया। प्रशासन ने विद्यार्थियों के भविष्य और मामले से जुड़े तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। प्राचार्य प्रो. डॉ. उषा कुमारी ने शुक्रवार को बताया कि वर्ष 2025 बैच के छात्र-छात्राओं की कक्षाएं तीन महीने तक निलंबित किए जाने के आदेश से संबंधित अगला फैसला छठ के बाद लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए ही निर्णय किया जाएगा।
2025 बैच के विद्यार्थियों को फिलहाल हॉस्टल खाली नहीं करना होगा
कथित रैगिंग मामले में वर्ष 2025 बैच के विद्यार्थियों को छात्रावास खाली करने के लिए जारी आदेश वापस ले लिया गया है। कॉलेज प्रशासन ने इस आदेश को वापस लेने का फैसला विद्यार्थियों के भविष्य और मामले की जांच को ध्यान में रखते हुए लिया है। इससे पहले वर्ष 2023 और 2024 बैच की छात्राओं को कक्षाओं से निलंबित करने तथा हॉस्टल खाली करने के आदेश भी कॉलेज प्रशासन ने गुरुवार की बैठक के बाद रद्द कर दिए थे। अब वर्ष 2025 बैच के विद्यार्थियों की कक्षाओं के निलंबन से संबंधित निर्णय छठ के बाद लिया जाएगा। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले के सूत्रधार की तलाश अभी जारी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और विद्यार्थियों के पक्ष को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखकर होगा अंतिम निर्णय
एनएमसीएच प्रशासन के सामने इस मामले में एक ओर रैगिंग से जुड़ी शिकायतों की जांच और कॉलेज परिसर में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य को भी ध्यान में रखना है। इसी कारण अलग-अलग बैच के विद्यार्थियों के पक्ष सुनने और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के बाद निर्णय लिए जा रहे हैं। वर्ष 2026 में नवनामांकित विद्यार्थियों ने कमेटी के सामने रैगिंग से इनकार किया है। वर्ष 2024 बैच के विद्यार्थियों को उपलब्ध तथ्यों और जवाबों के आधार पर आरोपमुक्त किया गया है। वहीं, वर्ष 2025 बैच के विद्यार्थियों से शपथ पत्र मांगा गया है और उनकी कक्षाओं के निलंबन पर अगला फैसला छठ के बाद लिया जाएगा। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, कथित रैगिंग मामले के सूत्रधार की पहचान करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जांच जारी रहने के बीच विद्यार्थियों को हॉस्टल खाली करने के आदेश से राहत दी गई है। अब छठ के बाद होने वाले फैसले पर विद्यार्थियों और कॉलेज समुदाय की नजर रहेगी।