बिहार: दरभंगा तारामंडल में बनेगी ISRO की स्पेस गैलरी, 61 करोड़ की परियोजना से मिथिला में अंतरिक्ष विज्ञान को मिलेगा बढ़ावा

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BNT Desk: मिथिला की धरती अब अंतरिक्ष विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में नई उड़ान भरने को तैयार है। दरभंगा के तारामंडल परिसर में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की अत्याधुनिक स्पेस गैलरी और स्पेस इनोवेशन सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। करीब 61 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को मिथिला के शैक्षणिक और वैज्ञानिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस केंद्र के निर्माण से क्षेत्र के छात्र-छात्राओं और युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने और आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने का अवसर मिलने की उम्मीद है। परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना है।

 

ISRO वैज्ञानिकों की टीम ने किया स्थल निरीक्षण

परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में ISRO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम दरभंगा तारामंडल पहुंची। टीम ने प्रस्तावित स्पेस गैलरी और इनोवेशन सेंटर के लिए चिह्नित स्थल का निरीक्षण किया और उपलब्ध जमीन तथा परियोजना से जुड़ी संभावनाओं का जायजा लिया। इस परियोजना को लेकर दरभंगा परिसदन में सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में परियोजना की रूपरेखा, निर्माण कार्य और इसके क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

 

दो एकड़ जमीन पर विकसित होगी आधुनिक स्पेस गैलरी

प्रस्तावित योजना के तहत दरभंगा तारामंडल परिसर में लगभग दो एकड़ जमीन पर स्पेस गैलरी, स्पेस इनोवेशन लैब और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यहां विद्यार्थियों को भारत के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों और वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी आधुनिक तथा आकर्षक माध्यमों से दी जाएगी। स्पेस गैलरी में चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य एल-1 और गगनयान जैसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों के बारे में विस्तार से जानकारी देने की योजना है। इसके लिए थ्री-डी मॉडल, वर्चुअल रियलिटी (VR) और स्पेस वॉक सिमुलेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इन सुविधाओं के जरिए विद्यार्थी केवल किताबों में पढ़कर ही नहीं, बल्कि तकनीकी माध्यमों से अंतरिक्ष विज्ञान को समझने और उसका अनुभव करने का अवसर पा सकेंगे।

 

रॉकेट्री, रोबोटिक्स और मिनी सैटेलाइट का मिलेगा प्रशिक्षण

इस परियोजना की खास बात यह है कि यहां विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी देने के साथ-साथ तकनीकी कौशल विकसित करने का व्यावहारिक अवसर भी उपलब्ध कराने की योजना है। प्रस्तावित इनोवेशन लैब में रॉकेट्री, रोबोटिक्स, मिनी सैटेलाइट निर्माण और कोडिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विज्ञान में रुचि रखने वाले विद्यार्थी नए प्रयोग कर सकेंगे और अपनी प्रतिभा को निखारने का मंच पा सकेंगे। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान बच्चों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी संसाधनों के लिए बड़े शहरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने क्षेत्र में ही सीखने और प्रयोग करने का अवसर मिल सकेगा।

 

61 करोड़ रुपये की परियोजना, 36 करोड़ की स्वीकृति

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कुल 61 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इसमें से 36 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। परियोजना के पूरा होने से दरभंगा को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण कार्य की समयसीमा और केंद्र के शुरू होने की तारीख को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

 

मिथिला के युवाओं के लिए अनुसंधान के नए अवसर

दरभंगा में ISRO की स्पेस गैलरी और इनोवेशन सेंटर की स्थापना केवल एक भवन निर्माण की योजना नहीं है। इसे मिथिला के युवाओं को वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस केंद्र से विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ने और विज्ञान, इंजीनियरिंग तथा अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है। यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुरूप पूरी होती है, तो दरभंगा भविष्य में मिथिला के लिए अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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