BNT Desk: कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले। बाजार में तेजी जारी रही, क्योंकि निवेशक कंपनियों के दूसरी तिमाही के बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच विवाद को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा। निफ्टी 50 इंडेक्स 23,582.25 पर खुला, जिसमें 141.45 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 76,288.65 पर खुला और इसमें 595.87 अंक यानी 0.79 प्रतिशत की तेजी रही।
लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ खुले
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स मंगलवार को सकारात्मक दायरे में खुले। Nifty IT में 1.09 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। इसके बाद निफ्टी FMCG में 0.90 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.85 प्रतिशत की तेजी आई। निफ्टी ऑटो 0.80 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी रियल्टी में 0.66 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी PSU बैंक में 0.59 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 0.55 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.21 प्रतिशत की तेजी रही। बाजार के व्यापक सकारात्मक रुख से निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दिया।
कच्चे तेल की नरमी और बेहतर नतीजों से बाजार को समर्थन
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले दो कारोबारी सत्रों में आई तेजी को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, उम्मीद से बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों और विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयरों में वापसी का समर्थन मिला है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि कई कारक बाजार की तेजी को जारी रखने में मदद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का 104 अमेरिकी डॉलर तक गिरना, AI ट्रेड का कमजोर होना, दूसरी तिमाही के अच्छे नतीजों का लगातार आना और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का खरीदार बनना बाजार को आगे बढ़ाने वाले कारक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि धैर्य के साथ वैल्यू बाइंग यानी अपेक्षाकृत कम कीमत पर अच्छी संपत्तियां खरीदने की रणनीति निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, बाजार के प्रतिभागी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनके संभावित असर पर करीबी नजर रखेंगे।
अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक बाजारों में सतर्कता
भारतीय बाजार में तेजी के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई होने की आशंका वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस क्षेत्र से आ रहे विरोधाभासी संकेतों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। एक तरफ अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों की कूटनीतिक कोशिशों से संभावित शांति समझौते की उम्मीदें बढ़ी हैं। इन घटनाक्रमों के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट आई। दूसरी तरफ, ईरानी ठिकानों पर नए सैन्य हमलों की खबरों और ईरानी अधिकारियों की जवाबी कार्रवाई की धमकियों ने तनाव बढ़ने की आशंका को फिर से मजबूत किया है। इन हमलों की अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बाजार पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के मुताबिक, बाजार इस क्षेत्र से सामने आ रहे परस्पर विरोधी संकेतों का आकलन करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम होने की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन सैन्य कार्रवाई की आशंका निवेशकों को सतर्क रख रही है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशक कंपनियों के तिमाही नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अमेरिका-ईरान के बीच घटनाक्रमों पर नजर रखेंगे। इन कारकों से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।