India-New Zealand FTA: 19 अक्टूबर से लागू हो सकता है समझौता, 100% भारतीय एक्सपोर्ट होगा टैक्स फ्री; 20 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद

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BNT Desk: भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA 19 अक्टूबर 2026 से लागू होने की उम्मीद है। एक अधिकारी ने 15 सितंबर को यह जानकारी दी। दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के कारोबार को बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और कारोबार के लिए नई संभावनाएं तैयार करना है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार और ज्यादा खुल जाएगा। समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत से होने वाले 100% निर्यात को टैक्स फ्री करने की बात कही है। यानी भारत से न्यूजीलैंड पहुंचने वाले सामान पर न्यूजीलैंड की ओर से इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं ली जाएगी। इस FTA को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही निवेश, सर्विस सेक्टर और भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए भी नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

 

15 साल में भारत में आएगा 20 अरब डॉलर का निवेश

भारत और न्यूजीलैंड के बीच समझौते में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। एग्रीमेंट के तहत अगले 15 साल में न्यूजीलैंड से भारत में 20 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹1.9 लाख करोड़ का निवेश आने की उम्मीद जताई गई है। इस निवेश से भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से कंपनियों के लिए नए बाजार और निवेश के रास्ते खुलने की संभावना है। न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा बाजार है, जबकि भारतीय कारोबारियों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपने उत्पाद और सेवाएं पहुंचाने का बेहतर अवसर मिलेगा।

 

भारतीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा फायदा

फिलहाल न्यूजीलैंड भारत के कई प्रमुख उत्पादों पर अधिकतम 10% तक का शुल्क लगाता है। इनमें सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट जैसे उत्पाद शामिल हैं। FTA लागू होने के बाद इन उत्पादों समेत भारत के सभी निर्यात को न्यूजीलैंड में टैक्स फ्री बाजार पहुंच मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड में अपने उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी बनाए रखना आसान हो सकता है। खास तौर पर ऐसे उत्पाद जिन पर अभी आयात शुल्क देना पड़ता है, उनके लिए शुल्क समाप्त होना भारतीय निर्यातकों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

 

5 हजार भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स को मिलेगा मौका

भारत-न्यूजीलैंड FTA का असर केवल सामान के कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। सर्विस सेक्टर में भी भारत को बाजार पहुंच मिली है। IT, शिक्षा, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंस्ट्रक्शन और टूरिज्म जैसे हाई-वैल्यू सेक्टरों में भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। समझौते में AYUSH, योगा इंस्ट्रक्टर्स, इंडियन शेफ और म्यूजिक टीचर्स जैसे प्रोफेशनल्स के लिए भी रास्ते खोले गए हैं। इसके अलावा FTA में टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा की व्यवस्था की गई है। इसके तहत हर साल 5,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम कर सकेंगे। इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में खास अवसर मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय कुशल कामगारों और प्रोफेशनल्स के लिए न्यूजीलैंड में अस्थायी रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

 

भारतीय वाइन और स्पिरिट्स को भी मिलेगा ड्यूटी फ्री एक्सेस

समझौते के तहत भारतीय वाइन और स्पिरिट्स को भी न्यूजीलैंड के बाजार में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलने की बात कही गई है। इससे इस क्षेत्र से जुड़े भारतीय कारोबारियों और उत्पादकों को न्यूजीलैंड में अपने उत्पादों का बाजार बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। इस तरह FTA में वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं और प्रोफेशनल मोबिलिटी को भी महत्व दिया गया है।

 

न्यूजीलैंड को कृषि उत्पादों पर राहत, डेयरी को बाहर रखा गया

समझौते के तहत भारत ने न्यूजीलैंड को अपने बाजार में पहुंच देने के लिए करीब 70% टैरिफ लाइन्स खोली हैं। इसमें सेब, कीवीफ्रूट और मनुका हनी जैसे कृषि उत्पादों पर टैरिफ रियायतें दी गई हैं। हालांकि इन उत्पादों पर रियायतें कुछ शर्तों के साथ होंगी। इनमें कोटा लिमिट और मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस जैसी शर्तें शामिल हैं। यानी इन उत्पादों के आयात पर भारत ने अपने घरेलू बाजार को ध्यान में रखते हुए कुछ सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी है। न्यूजीलैंड को भारत में 54% से अधिक एक्सपोर्ट पर तुरंत शून्य ड्यूटी मिलने की बात कही गई है। इसमें शीप मीट, ऊन, कोयला और फॉरेस्ट्री प्रोडक्ट्स शामिल हैं। वहीं सीफूड, आयरन, स्टील और एल्युमीनियम स्क्रैप पर टैरिफ को अगले 10 साल में धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा।

 

डेयरी और कई संवेदनशील सेक्टरों को नहीं मिली छूट

भारत ने अपने घरेलू हितों की सुरक्षा के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को टैरिफ रियायतों की सूची से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद जैसे दूध, क्रीम और पनीर शामिल हैं। इसके अलावा प्याज, दालें, चीनी, आर्म्स-अम्युनिशन और कुछ मेटल्स को भी रियायतों से बाहर रखा गया है। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादकों और संवेदनशील क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा देना है। इससे साफ है कि समझौते में दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ अपने-अपने घरेलू हितों को भी ध्यान में रखा है।

 

2010 में शुरू हुई थी बातचीत, 2025 में बनी बात

भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत काफी पुरानी है। इसकी शुरुआत 2010 में हुई थी। करीब 9 दौर की बातचीत के बाद 2015 में प्रक्रिया रोक दी गई थी। इसके बाद मार्च 2025 में दोनों देशों ने बातचीत फिर से शुरू की। 22 दिसंबर 2025 को बातचीत के सफल समापन की घोषणा की गई। इसके बाद 27 अप्रैल 2026 को दोनों देशों ने FTA पर हस्ताक्षर किए। अब इसके 19 अक्टूबर 2026 से लागू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

FTA में कुल 20 चैप्टर

भारत-न्यूजीलैंड FTA में कुल 20 चैप्टर हैं। इनमें गुड्स, सर्विसेज, रूल्स ऑफ ओरिजिन, टेक्निकल बैरियर और कस्टम प्रोसेस जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रिया को आसान बनाना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। इससे भारतीय और न्यूजीलैंड की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

क्या होता है FTA?

FTA यानी Free Trade Agreement दो देशों के बीच होने वाला ऐसा व्यापारिक समझौता है, जिसके तहत आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क यानी टैरिफ और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या खत्म किया जाता है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और आर्थिक सहयोग मजबूत करना होता है। भारत और न्यूजीलैंड का यह समझौता लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं न्यूजीलैंड के कुछ उत्पादों को भी भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। हालांकि, संवेदनशील भारतीय क्षेत्रों को रियायतों से बाहर रखकर घरेलू हितों की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

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