BNT Desk: RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव मंगलवार को पटना पहुंचे। दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के एक दिन बाद पटना लौटते ही उन्होंने केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया पर निशाना साधा। लालू यादव ने आरोप लगाया कि देश में वोट चोरी हो रही है। उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से आयोजित आंदोलन को पूरी तरह सफल बताया। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहा है।
सोनिया गांधी से हुई थी लालू और तेजस्वी की मुलाकात
दरअसल, सोमवार को सोनिया गांधी ने दिल्ली में लालू प्रसाद यादव और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। यह बैठक इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान में आयोजित रैली के बाद हुई। बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब विपक्ष SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेर रहा है। हालांकि, बैठक में हुई चर्चा का विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है।
रामलीला मैदान की रैली में तेजस्वी ने भी उठाया था वोट चोरी का मुद्दा
रामलीला मैदान की रैली में तेजस्वी यादव ने भी वोट चोरी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि देश में वोट चोरी की शुरुआत बिहार से हुई। तेजस्वी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को ‘दो नंबरी सरकार’ बताते हुए कहा था कि रामलीला मैदान में वोट चोरों के खिलाफ महाभारत का आयोजन हुआ है। उन्होंने महाभारत के शकुनि और उसके पासों का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
सोनिया-लालू मुलाकात के सियासी मायने
सोनिया गांधी और लालू-तेजस्वी की मुलाकात को बिहार में कांग्रेस और राजद के गठबंधन संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दल इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक हैं। बिहार में राजद का मजबूत संगठन और सामाजिक आधार है, जबकि कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक पहुंच और विपक्षी दलों के बीच समन्वय की भूमिका है। ऐसे में दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात को साझा राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
विपक्षी एकता और आगे की रणनीति पर नजर
पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में राजद और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर तालमेल रहा था। ऐसे में सोनिया गांधी की लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात को विपक्षी एकता मजबूत रखने और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा के तौर पर देखा जा रहा है। SIR और कथित वोट चोरी जैसे मुद्दों पर साझा अभियान के बीच इस बैठक के राजनीतिक संकेत भी अहम माने जा रहे हैं। अब देखना होगा कि विपक्ष इन मुद्दों पर आगे किस तरह की रणनीति अपनाता है और केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को किस दिशा में ले जाता है।