बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के जींस-टीशर्ट पहनने पर रोक, AI के इस्तेमाल को भी मिलेगा बढ़ावा

BNT
By
6 Min Read

BNT Desk: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के पहनावे को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की ओर से जारी नए निर्देश के मुताबिक, राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी अब केवल औपचारिक ड्रेस में ही स्कूल आएंगे। इसका मतलब है कि स्कूलों में जींस और टी-शर्ट पहनकर आने पर रोक रहेगी। शिक्षा विभाग के नए अपर मुख्य सचिव (ACS) आईएएस अधिकारी सीके अनिल ने शुक्रवार को इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को पत्र जारी किया। इसमें निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। विभाग का आदेश सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों पर लागू होगा।

 

औपचारिक ड्रेस में स्कूल आने का निर्देश

शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को ऐसा पहनावा अपनाना होगा, जो औपचारिक और शैक्षणिक संस्थान के अनुरूप हो। जींस और टी-शर्ट को औपचारिक ड्रेस में शामिल नहीं माना गया है। इसलिए शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को स्कूल आने के दौरान इन कपड़ों से परहेज करना होगा। नए अपर मुख्य सचिव के जिम्मेदारी संभालने के बाद जारी इस निर्देश को सरकारी स्कूलों में अनुशासन और कार्यस्थल की मर्यादा बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

 

सरकारी स्कूलों में AI के इस्तेमाल को मिलेगा बढ़ावा

शिक्षकों के ड्रेस कोड के साथ शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को बढ़ावा देने की भी तैयारी की है। विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में AI टूल्स के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले पदाधिकारियों और कर्मचारियों को AI टूल्स के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके जरिए रोजमर्रा के सरकारी कामकाज को आसान बनाया जा सकता है और समय की बचत के साथ कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी बढ़ाई जा सकती है।

 

शिक्षा मंत्री ने भी योजना तैयार करने का दिया था निर्देश

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी सरकारी स्कूलों और विभागीय कामकाज में AI के उपयोग को लेकर योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। अब शिक्षा विभाग इस दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। AI टूल्स के इस्तेमाल से विभागीय कामकाज में तकनीक की भूमिका बढ़ाने, नियमित कार्यों को सरल बनाने और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकी साधनों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इसके उपयोग को लेकर विस्तृत व्यवस्था और दिशा-निर्देशों की जानकारी सामने आने के बाद इसकी प्रक्रिया और स्पष्ट होगी।

 

शिक्षा विभाग में 10 हजार कर्मचारियों के तबादले की तैयारी

बिहार शिक्षा विभाग में एक और बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित है। विभाग के जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात कर्मचारियों के तबादले की तैयारी चल रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे कर्मचारियों को दूसरे स्थान पर भेजा जा सकता है, जो पिछले 10 वर्षों से एक ही जगह पर कार्यरत हैं। इस प्रक्रिया के तहत करीब 10 हजार कर्मचारियों के तबादले की तैयारी बताई जा रही है।

 

राज्यस्तरीय कैडर बनाने पर विचार

कर्मचारियों के तबादले की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए राज्यस्तरीय कैडर बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर मौजूदा नियमावली में बदलाव किया जा सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य लंबे समय से एक ही कार्यालय या स्थान पर तैनात कर्मचारियों की पदस्थापना में बदलाव करना है। हालांकि, तबादले की अंतिम प्रक्रिया, कर्मचारियों की सूची और लागू होने वाले नियमों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

 

CK Anil को सौंपी गई शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी

बिहार सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीके अनिल को शिक्षा विभाग के नए अपर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। सीके अनिल की पहचान सख्त प्रशासनिक कार्यशैली वाले अधिकारी के रूप में रही है।

सीवान के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के प्रभाव को चुनौती दी थी। उस समय उनकी प्रशासनिक कार्यशैली की चर्चा बिहार के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई थी। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनके निर्देशों के तहत शिक्षकों के ड्रेस कोड, सरकारी कामकाज में AI के उपयोग और कर्मचारियों के तबादले जैसे मुद्दे सामने आए हैं।

Share This Article