BNT Desk: बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश भी दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब अनंत सिंह पहले ही जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जा चुके हैं। पार्टी से निष्कासन के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर भी बिहार में चर्चा तेज है। अब दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को जमानत दी थी। इसके बाद वह जेल से बाहर आ गए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में अनंत सिंह को मिली जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास और जमानत दिए जाने के आधार को लेकर सवाल उठाए गए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चुका था। मामले में जवाब दाखिल करने और पक्ष रखने के लिए समय भी दिया गया था। अब सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच की समय-सीमा को लेकर भी निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित जांच एजेंसी को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा है। इस निर्देश को मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और अदालत में होने वाली सुनवाई की दिशा स्पष्ट होगी। हालांकि, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों को साबित होना बाकी है। किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के आधार पर ही तय होगा।
क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोकामा इलाके में हुई थी। उस समय मोकामा में चुनावी प्रचार चल रहा था। दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान अनंत सिंह और दूसरे पक्ष के समर्थकों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और हिंसा की घटना हुई थी।
इस घटना में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। मामले में अनंत सिंह को मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए ही मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी।
इस मामले में पुलिस की जांच के दौरान घटना के कारण और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर कई पहलुओं की पड़ताल की गई। दुलारचंद यादव के परिजनों ने भी घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। अनंत सिंह को मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहाई मिली थी। अब उसी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मामला फिर चर्चा में है।
जदयू से छह साल के लिए निष्कासित हो चुके हैं अनंत सिंह
कानूनी मामले के साथ-साथ अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें भी बढ़ी हैं। हाल ही में जदयू ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। पार्टी की कार्रवाई के बाद अनंत सिंह और जदयू नेतृत्व के बीच राजनीतिक विवाद भी सामने आया।
बताया गया कि बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ रुख अपनाया था। इसके बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। जदयू की ओर से उनकी विधानसभा सदस्यता के संबंध में भी विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपे जाने की खबर सामने आई थी।
1 दिसंबर तक सरेंडर करने के आदेश पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सबकी नजरें 1 दिसंबर पर हैं। अदालत ने अनंत सिंह को इस तारीख तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। वहीं जांच एजेंसी को चार महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई अनंत सिंह के लिए एक अहम कानूनी घटनाक्रम है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई से इस मामले की दिशा तय होगी। फिलहाल शीर्ष अदालत के आदेश के बाद अनंत सिंह को तय समय-सीमा के भीतर सरेंडर करना होगा।