BNT Desk: बिहार विधान परिषद की दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर मतगणना में हुई देरी ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। 27 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई गिनती 29 अक्टूबर तक जारी रही। इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना में जानबूझकर देरी की जा रही है और भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाने की कोशिश हो रही है। दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने मतगणना में लग रहे समय का कारण वरीयता आधारित मतगणना और मतों के हस्तांतरण की जटिल प्रक्रिया बताया। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी सर्वेश कुमार और राजद के अनिल कुमार झा के बीच मुख्य मुकाबला था। बाद की रिपोर्टों में सर्वेश कुमार को विजेता बताया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मतगणना केंद्र पर सुरक्षा बढ़ाई गई और प्रशासन की निगरानी में प्रक्रिया आगे बढ़ी।
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मतगणना की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि लगभग 10 प्रतिशत मतों को अवैध घोषित किए जाने के बावजूद राजद का उम्मीदवार जीत की स्थिति में है, लेकिन चुनाव आयोग भाजपा की जीत का रास्ता खोज रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतगणना 56 घंटे से जारी रहने के बावजूद अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया गया। तेजस्वी ने कहा कि राजद के कार्यकर्ता मतगणना केंद्र पर मौजूद हैं और पार्टी कथित अनियमितता को स्वीकार नहीं करेगी। उनके बयान में चुनाव आयोग से पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल थी। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा जानबूझकर किसी उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए तेजस्वी के बयान को राजद की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भाजपा के सर्वेश कुमार प्रथम वरीयता के मतों में आगे
मतगणना के शुरुआती और मध्यवर्ती चरणों में भाजपा के सर्वेश कुमार लगातार बढ़त बनाए हुए थे। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, प्रथम वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने पर सर्वेश कुमार को 16,115 मत मिले थे, जबकि राजद के अनिल कुमार झा को 14,615 मत प्राप्त हुए थे। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद इम्तियाज तीसरे स्थान पर थे। इस चरण में सर्वेश कुमार और अनिल कुमार झा के बीच अंतर 1,500 मतों का बताया गया। हालांकि, प्रथम वरीयता में सबसे अधिक मत पाने वाले उम्मीदवार को भी जीत के लिए निर्धारित कोटा हासिल करना जरूरी था। किसी प्रत्याशी को आवश्यक मत नहीं मिलने के कारण मतगणना आगे बढ़ी। ऐसे में शुरुआती बढ़त के आधार पर अंतिम जीत की घोषणा नहीं की जा सकती थी। बाद की रिपोर्टों में सर्वेश कुमार को विजेता बताया गया, लेकिन प्रारंभिक बढ़त और अंतिम जीत के बीच दूसरी वरीयता के मतों की गणना महत्वपूर्ण रही।
आखिर क्यों लंबी चली मतगणना?
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य बहुमत के आधार पर नतीजा घोषित नहीं किया जाता, बल्कि वरीयता आधारित मतदान प्रणाली के तहत मतों की गणना की जाती है। इस प्रक्रिया में मतदाता बैलेट पेपर पर अपनी पसंद के उम्मीदवारों को पहली, दूसरी और आगे की वरीयता दे सकते हैं। पहले चरण में प्रथम वरीयता के मत गिने जाते हैं। यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित कोटा हासिल नहीं करता, तो सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशी को क्रमशः बाहर किया जाता है। इसके बाद उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली उपलब्ध वरीयता के अनुसार मत दूसरे उम्मीदवारों को हस्तांतरित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक कोई उम्मीदवार आवश्यक कोटा हासिल नहीं कर लेता। दरभंगा में कई प्रत्याशी मैदान में थे और प्रथम वरीयता की गिनती के बाद कोई उम्मीदवार निर्धारित कोटा तक नहीं पहुंच पाया था। इसी वजह से एलिमिनेशन और दूसरी वरीयता के मतों की गणना करनी पड़ी। इस प्रक्रिया में हर दौर के मतों की छंटाई, सत्यापन और हस्तांतरण के कारण समय लग सकता है।
जीत के लिए 31,911 मतों का कोटा निर्धारित
मतगणना के दौरान जीत के लिए 31,911 मतों का कोटा निर्धारित बताया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कुल 69,141 मतों की गिनती में 5,321 मत अवैध पाए गए और 63,820 मत वैध माने गए। निर्धारित कोटा वैध मतों के आधार पर तय किया गया था। प्रथम वरीयता की गिनती में सर्वेश कुमार को सबसे अधिक मत मिले, लेकिन उनके मत जीत के लिए आवश्यक संख्या से कम थे। इसी तरह दूसरे स्थान पर रहे अनिल कुमार झा भी निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सके। इसके बाद कम मत पाने वाले उम्मीदवारों को एक-एक करके बाहर करने और उनके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता के अनुसार मत हस्तांतरित करने की प्रक्रिया चली। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं था कि प्रथम वरीयता में कौन आगे है; अंतिम परिणाम के लिए यह भी देखना जरूरी था कि हस्तांतरित मतों के बाद कौन निर्धारित कोटा हासिल करता है।
प्रशासन ने क्या कहा?
मतगणना में देरी को लेकर दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि वरीयता आधारित मतों के हस्तांतरण की प्रक्रिया जटिल होने के कारण अंतिम नतीजे में समय लग रहा है। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि मतगणना निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराई जा रही है। दूसरी ओर, विवाद और हंगामे की खबरों के बीच मतगणना केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाने का उद्देश्य मतगणना केंद्र पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। इस दौरान राजद और भाजपा समर्थित प्रत्याशियों के एजेंटों के बीच तनाव की खबरें भी सामने आईं। प्रशासन का पक्ष था कि परिणाम घोषित करने से पहले सभी जरूरी चरणों को पूरा करना आवश्यक है। मतगणना में समय लगना अपने-आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन राजनीतिक दलों की ओर से उठाई गई शिकायतों का जवाब पारदर्शी प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाना जरूरी है।
दरभंगा स्नातक सीट पर अंततः सर्वेश कुमार की जीत
मतगणना के बाद प्रकाशित रिपोर्टों में भाजपा प्रत्याशी सर्वेश कुमार को दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विजेता बताया गया। इस सीट पर राजद के अनिल कुमार झा मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे। चुनाव के दौरान पहली वरीयता में सर्वेश कुमार की बढ़त और बाद में दूसरी वरीयता के मतों के हस्तांतरण ने नतीजे को चर्चा का विषय बना दिया। सर्वेश कुमार इससे पहले भी इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। इस बार भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए उन्होंने सीट बरकरार रखी। हालांकि, इस चुनाव की राजनीतिक अहमियत केवल जीत-हार तक सीमित नहीं रही। लंबी मतगणना, अवैध घोषित मतों की संख्या और तेजस्वी यादव के आरोपों के कारण प्रक्रिया पर बहस तेज हुई। चुनाव परिणाम के बाद भी किसी कथित अनियमितता का आकलन करने के लिए आधिकारिक मतगणना रिकॉर्ड, आपत्तियों और संबंधित अधिकारियों के जवाब को देखना आवश्यक होगा।
मतगणना विवाद ने चुनावी पारदर्शिता पर बहस तेज की
दरभंगा स्नातक MLC चुनाव का घटनाक्रम दिखाता है कि वरीयता आधारित मतगणना में परिणाम घोषित होने में सामान्य चुनावों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। लेकिन जब मतगणना लंबी होती है और राजनीतिक दल सवाल उठाते हैं, तो प्रशासन के लिए प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने देरी की वजह तकनीकी और प्रक्रियागत बताई। दोनों पक्षों के दावों के बीच निष्कर्ष निकालने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच योग्य साक्ष्य जरूरी हैं। फिलहाल बाद की रिपोर्टों में सर्वेश कुमार की जीत की जानकारी सामने आई है। इस मामले में मतगणना की अवधि, मतों के हस्तांतरण और उम्मीदवारों की ओर से दर्ज आपत्तियों से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का अधिक स्पष्ट जवाब दे सकते हैं।