BNT Desk: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। जनसुराज के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 18,953 वोटों के बड़े अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही करीब तीन दशक से भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर पहली बार जनसुराज का कब्जा हो गया। 31 राउंड की मतगणना के दौरान प्रशांत किशोर ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी। हर राउंड के साथ उनकी बढ़त बढ़ती गई और अंत में उन्होंने निर्णायक अंतर से चुनाव अपने नाम कर लिया।
30 साल बाद टूटा भाजपा का किला
बांकीपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 1995 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा था। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और उसके बाद उनके पुत्र व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार इस सीट से विधायक चुने जाते रहे। नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद सीट खाली हुई थी, जिसके कारण उपचुनाव कराया गया।
भाजपा ने इस बार नीरज सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन पार्टी अपने सबसे मजबूत शहरी गढ़ को बचाने में सफल नहीं हो सकी। प्रशांत किशोर ने भाजपा के अभेद्य किले में सेंध लगाते हुए यह सीट अपने नाम कर ली।
मतगणना में शुरू से मिली बढ़त
मतगणना सुबह पोस्टल बैलेट से शुरू हुई, जिसके बाद EVM के वोटों की गिनती हुई। शुरुआती राउंड से ही प्रशांत किशोर भाजपा उम्मीदवार से आगे चल रहे थे। समय के साथ उनकी बढ़त लगातार बढ़ती गई और अंतिम राउंड तक यह अंतर 18,953 वोट पहुंच गया।
यह परिणाम बताता है कि चुनाव के दौरान मिला शुरुआती समर्थन अंत तक बरकरार रहा और मतदाताओं ने जनसुराज के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया।
RJD तीसरे स्थान पर रही
इस उपचुनाव में मुकाबले को त्रिकोणीय माना जा रहा था, लेकिन मतगणना के दौरान राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी लगातार तीसरे स्थान पर रहीं। वह पूरे चुनाव में भाजपा और जनसुराज से काफी पीछे रहीं और मुख्य मुकाबले से बाहर दिखाई दीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी वोटों का एक बड़ा हिस्सा जनसुराज की ओर गया, जिसका सीधा फायदा प्रशांत किशोर को मिला।
रणनीति और जमीनी अभियान का मिला फायदा
प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान विकास, शिक्षा, रोजगार, स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मोहल्ला सभाओं, पदयात्राओं और घर-घर संपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाई। विश्लेषकों के अनुसार, पारंपरिक जातीय राजनीति से अलग मुद्दा आधारित प्रचार और शहरी मतदाताओं से सीधा संवाद उनकी जीत की बड़ी वजह रहा।
बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश
बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं जीत पाने वाली जनसुराज के लिए यह पहली बड़ी चुनावी सफलता है। वहीं भाजपा के लिए अपने सबसे मजबूत गढ़ में मिली हार राजनीतिक तौर पर बड़ा झटका मानी जा रही है। इस जीत से प्रशांत किशोर ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी अब केवल राजनीतिक विकल्प की बात नहीं कर रही, बल्कि चुनावी मैदान में जीत हासिल करने की क्षमता भी रखती है। आने वाले समय में इस परिणाम का असर बिहार की राजनीतिक रणनीतियों और आगामी चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।