बिहार: जमुई-समस्तीपुर-बांका की घटनाओं के बाद सख्त हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, DM-SP को कानून-व्यवस्था पर कड़े निर्देश

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BNT Desk: बिहार में जमुई, समस्तीपुर और बांका में युवतियों से बदसलूकी और छेड़खानी की घटनाओं के बाद महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलों के डीएम और एसपी को कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अपराधियों में कानून का डर दिखना चाहिए और पुलिस की कार्यशैली में किसी तरह की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने 24 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के डीएम और एसपी के साथ उच्चस्तरीय कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने जिलों की सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस की सक्रियता और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन के ‘इकबाल’ से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और कानून-व्यवस्था में बदलाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।

 

DM-SP की तय होगी जवाबदेही

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि प्रत्येक जिले में कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी संबंधित एसपी की होगी। उन्होंने एसपी को पुलिस बल के वास्तविक नेतृत्वकर्ता के रूप में काम करने का निर्देश दिया। साथ ही डीएम और एसपी के कामकाज की लगातार समीक्षा और मूल्यांकन किए जाने की बात कही। अधिकारियों के मूल्यांकन में उनकी त्वरित प्रतिक्रिया, आम लोगों से मिलने वाला फीडबैक और जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाली सुरक्षा व्यवस्था को आधार बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि किसी घटना के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया कितनी तेज रही और इलाके में लोगों को सुरक्षा का कितना भरोसा मिला, इन पहलुओं पर भी अधिकारियों के कामकाज को देखा जाएगा। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में सघन पुलिस गश्त बढ़ाने और अनुमंडल स्तर तक कानून-व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों का प्रदर्शन खराब पाया जाएगा या जो अपनी जिम्मेदारी के प्रति गंभीर नहीं रहेंगे, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।

 

पुलिस की शिथिलता पर कार्रवाई के निर्देश

कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने पुलिस अधिकारियों को सक्रिय और जवाबदेह तरीके से काम करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की ओर से किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिलों में पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर होने वाली घटनाओं की जानकारी समय पर हासिल करने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव के निर्देशों में पुलिस अधिकारियों की नियमित निगरानी और जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्रशासन की प्रतिक्रिया को और तेज करना है।

 

जमुई की कार्रवाई को बताया उदाहरण

मुख्य सचिव ने हाल में जमुई में हुई घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने जमुई में पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दूसरे जिलों के लिए उदाहरण के तौर पर बताया। जमुई में कोचिंग से लौट रहे एक किशोर और किशोरी को कुछ लोगों द्वारा रोककर घेरने का मामला सामने आया था। आरोप था कि उनके साथ मारपीट और छेड़खानी की गई। घटना से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद मामले ने व्यापक ध्यान खींचा था और पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसके अलावा समस्तीपुर और बांका में भी युवतियों से बदसलूकी से जुड़े मामले सामने आए। बांका की घटना का वीडियो सामने आने के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा और तेज हुई। इन घटनाओं के बीच मुख्य सचिव ने जिलों के अधिकारियों को कानून-व्यवस्था के मामले में अधिक सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।

 

त्योहारों को देखते हुए बढ़ेगी निगरानी

आने वाले पर्व-त्योहारों को देखते हुए भी प्रशासन को विशेष तैयारी करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और स्थानीय खुफिया तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए। त्योहारों के दौरान बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ती है। ऐसे में पुलिस को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने को कहा गया है। आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ किसी भी संभावित विवाद या अप्रिय स्थिति पर तत्काल प्रतिक्रिया देने पर जोर दिया गया है। मुख्य सचिव ने पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को भी जिलों से संबद्ध कर नियमित दौरे और रात्रि प्रवास कराने के निर्देश दिए। इससे जिलों की कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की निगरानी करने और स्थानीय स्तर की समस्याओं को समझने पर जोर दिया गया है।

 

फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं पर भी कार्रवाई

कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्य सचिव ने सामाजिक सौहार्द और शांति भंग करने के उद्देश्य से फर्जी खबरें या भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रशासन को ऐसी सूचनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने को कहा, ताकि गलत जानकारी के कारण किसी इलाके में तनाव या भ्रम की स्थिति पैदा न हो। अधिकारियों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आने वाली संवेदनशील सूचनाओं पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, किसी सूचना को फर्जी या भ्रामक मानने से पहले उसकी जांच और सत्यापन की आवश्यकता होगी। प्रशासन को कार्रवाई तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करने को कहा गया है।

 

जमीन पर दिखनी चाहिए कानून-व्यवस्था में मजबूती

मुख्य सचिव के निर्देशों से यह संकेत मिलता है कि अब जिलों में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई को डीएम और एसपी की जवाबदेही से सीधे जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के कामकाज का मूल्यांकन केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी प्रतिक्रिया की गति, जनता की प्रतिक्रिया और जमीन पर दिखाई देने वाली सुरक्षा व्यवस्था के आधार पर किए जाने की बात कही गई है। जमुई, समस्तीपुर और बांका की घटनाओं के बाद महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव है। ऐसे में सभी जिलों में गश्त, निगरानी और पुलिस की त्वरित कार्रवाई बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आगामी पर्व-त्योहारों को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए और पुलिस-प्रशासन की सक्रियता लोगों को जमीनी स्तर पर दिखाई देनी चाहिए।

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