बिहार के सभी जिलों में होगा डॉ. हेडगेवार पर आधारित महानाट्य का मंचन, CM सम्राट चौधरी बोले- युवाओं को जानना चाहिए राष्ट्रसेवा का इतिहास

BNT
By
10 Min Read

BNT Desk: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पटना के बापू सभागार में शुक्रवार को महानाट्य ‘संघ सृजन का आविष्कार : युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का मंचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस महानाट्य का निर्माण नागपुर की नादब्रह्म संस्था ने किया है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में दो करोड़ से अधिक युवा हैं और नई पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और उनके विचारों से परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि महानाट्य का मंचन केवल पटना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार के अन्य जिलों में भी इसका आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक यह कार्यक्रम पहुंच सके।

 

बापू सभागार में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ

पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर महानाट्य के मंचन का उद्घाटन किया। यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवन और संगठन की स्थापना से जुड़े विषयों को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया गया।

महानाट्य का नाम ‘संघ सृजन का आविष्कार : युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ रखा गया है। इसका निर्माण नागपुर की नादब्रह्म संस्था ने किया है। आयोजन में कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों के साथ-साथ राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र की कई हस्तियां भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. हेडगेवार के जीवन, उनके विचारों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की गई।

 

जेन-जी को डॉ. हेडगेवार के जीवन से परिचित कराने पर जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में दो करोड़ से अधिक युवा हैं। ऐसे में नई पीढ़ी को देश के इतिहास, सामाजिक संगठनों और राष्ट्रसेवा से जुड़े व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से जेन-जी यानी नई पीढ़ी के युवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें डॉ. हेडगेवार के जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और उनके विचारों से परिचित कराया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री के अनुसार, महानाट्य जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम युवाओं तक ऐतिहासिक और वैचारिक विषयों को पहुंचाने का एक माध्यम बन सकते हैं। नाटक और मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए किसी व्यक्तित्व के जीवन तथा उसके विचारों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इससे युवा पीढ़ी को संबंधित विषयों के बारे में जानने और समझने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार के जीवन पर आधारित इस प्रस्तुति को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से इसे बिहार के अन्य जिलों में भी आयोजित करने की योजना है। हालांकि, विभिन्न जिलों में मंचन की तारीखों और कार्यक्रमों की विस्तृत सूची की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

 

डॉ. हेडगेवार ने की थी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की और संगठन तथा राष्ट्रसेवा की एक परंपरा विकसित की। उनके अनुसार, समय के साथ संघ का विस्तार देश के विभिन्न हिस्सों में हुआ और इससे जुड़े लोगों ने अलग-अलग क्षेत्रों में गतिविधियां संचालित कीं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में डॉ. हेडगेवार ने की थी। संघ की स्थापना के बाद संगठन की शाखाओं के माध्यम से लोगों को जोड़ने और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के संचालन की व्यवस्था विकसित हुई। संघ से जुड़े लोग राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रसार को अपनी गतिविधियों का हिस्सा बताते रहे हैं।

महानाट्य के जरिए डॉ. हेडगेवार के जीवन और संघ की स्थापना से जुड़े घटनाक्रम को नाटकीय रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इस तरह की प्रस्तुतियों में ऐतिहासिक घटनाओं और व्यक्तित्वों को मंच पर जीवंत करने के लिए संवाद, अभिनय, संगीत और अन्य नाट्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भी दर्शकों को डॉ. हेडगेवार के जीवन और संगठन की शुरुआत से जुड़े विषयों से परिचित कराना है।

 

पटना के बाद बिहार के अन्य जिलों में भी होगा मंचन

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि महानाट्य का आयोजन केवल पटना तक सीमित नहीं रखा जाएगा। बिहार के दूसरे जिलों में भी इसका मंचन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवा और आम नागरिक इस प्रस्तुति को देख सकें। उन्होंने डॉ. हेडगेवार के जीवन और विचारों से लोगों को परिचित कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से हर संभव प्रयास करने की बात कही।

बिहार में इस कार्यक्रम का विस्तार होने से अलग-अलग जिलों के दर्शकों को भी महानाट्य देखने का अवसर मिल सकता है। खासकर कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं के बीच ऐसे कार्यक्रमों को लेकर रुचि पैदा करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, किन जिलों में पहले मंचन होगा, इसके लिए किस तरह की व्यवस्था की जाएगी और दर्शकों के प्रवेश से संबंधित नियम क्या होंगे, इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

महानाट्य को दूसरे जिलों तक ले जाने की घोषणा कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा रही। इससे आयोजन को राज्यव्यापी स्वरूप देने की योजना सामने आई है। कार्यक्रमों की वास्तविक समय-सारिणी और स्थानों की जानकारी संबंधित आयोजकों की ओर से जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसे किन-किन जिलों में और किस क्रम में प्रस्तुत किया जाएगा।

 

कला एवं संस्कृति मंत्री ने भी किया संबोधित

कार्यक्रम में बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने भी संबोधन दिया। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बिहार-झारखंड के क्षेत्रीय कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। महानाट्य के निर्माता पद्माकर धानोरकर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

कार्यक्रम में कला और संस्कृति के माध्यम से ऐतिहासिक तथा वैचारिक विषयों को लोगों तक पहुंचाने की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। महानाट्य के आयोजन के जरिए डॉ. हेडगेवार के जीवन से जुड़े प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया गया। आयोजन में मौजूद लोगों को इस प्रस्तुति के माध्यम से संघ की स्थापना और उसके इतिहास से संबंधित विषयों को जानने का अवसर मिला।

नादब्रह्म संस्था, नागपुर द्वारा निर्मित इस महानाट्य को संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके जरिए डॉ. हेडगेवार के जीवन और संगठन की स्थापना से जुड़े विषयों को सांस्कृतिक प्रस्तुति का रूप दिया गया।

 

स्कूली बच्चों ने प्रस्तुत किया राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान

कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम में सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विषयों को भी स्थान दिया गया। समारोह में बड़ी संख्या में आमजन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव, पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, बिहार भाजपा के संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया और कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार मौजूद थे। इसके अलावा पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम में राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही। स्कूली बच्चों की प्रस्तुति और महानाट्य के मंचन ने आयोजन को सांस्कृतिक स्वरूप दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए डॉ. हेडगेवार के जीवन पर आधारित प्रस्तुति देखने और उससे जुड़े विषयों को समझने का अवसर रहा।

 

शताब्दी वर्ष में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए पहुंच बढ़ाने की पहल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम डॉ. हेडगेवार के जीवन और संघ की स्थापना से जुड़े विषयों को मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की पहल है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में युवाओं को इन विषयों से परिचित कराने पर जोर दिया और महानाट्य को बिहार के अन्य जिलों में आयोजित करने की बात कही।

अब इस घोषणा के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में मंचन की तैयारियों और कार्यक्रमों की समय-सारिणी पर नजर रहेगी। यदि अलग-अलग जिलों में इसका आयोजन होता है, तो वहां के युवाओं और आम लोगों को भी महानाट्य देखने का अवसर मिल सकेगा। फिलहाल, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की घोषणा और आयोजन में शामिल प्रमुख अतिथियों की मौजूदगी मुख्य बातें रहीं।

Share This Article