पटना: फंड के अभाव में कचरा ट्रांसफर स्टेशन अटके, दो जगह तो जमीन ही नहीं मिली

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BNT Desk: पटना शहर में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे कचरा ट्रांसफर स्टेशनों का काम सालभर बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। शहर के सभी छह अंचलों में प्रस्तावित इन स्टेशनों का निर्माण अलग-अलग स्तर पर अटका हुआ है। कहीं फंड की कमी के कारण मशीनरी नहीं पहुंची है, तो कहीं जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है।

छह अंचलों में बनने हैं कचरा ट्रांसफर स्टेशन

पटना शहर में कचरे को व्यवस्थित तरीके से एक जगह इकट्ठा कर आगे भेजने के लिए छह अंचलों में कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाने की योजना तैयार की गई थी। इन स्टेशनों के जरिए शहर में अलग-अलग जगहों से उठाए गए कचरे को सीधे खुले स्थान पर डंप करने के बजाय निर्धारित जगह पर ले जाकर उसका प्रबंधन किया जाना था। योजना पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। हालांकि निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी परियोजना पूरी तरह चालू नहीं हो सकी है। रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर सिविल वर्क पूरा हो चुका है, लेकिन मशीनरी और अन्य जरूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण स्टेशन का इस्तेमाल शुरू नहीं किया गया है।

फंड की कमी से रुका काम

रिपोर्ट के मुताबिक, कचरा ट्रांसफर स्टेशन के निर्माण और मशीनरी से जुड़े काम में फंड की कमी बड़ी वजह बनकर सामने आई है। फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण एजेंसियों ने कुछ जगहों पर काम रोक दिया। कचरे को दबाने और उसका वर्गीकरण करने के लिए जरूरी मशीनों की खरीद और स्थापना भी प्रभावित हुई है। बताया गया है कि मशीनों के लिए भुगतान नहीं हो पाने के कारण एजेंसी ने काम रोक दिया। इससे तैयार हो चुके ढांचे का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है।

गंगा पथ के पास खुले में जमा हो रहा कचरा

कचरा ट्रांसफर स्टेशन की समस्या का असर गंगा पथ के आसपास भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले पाटलिपुत्र पानी टंकी के पास डंपिंग यार्ड था। करीब एक साल पहले इसे गंगा पथ के पास शिफ्ट किया गया था। इसके बाद यहां सड़क निर्माण का काम शुरू हो गया, लेकिन कचरे के उचित प्रबंधन के लिए जरूरी अत्याधुनिक मशीनें नहीं आ सकीं। मशीनों की अनुपलब्धता के कारण कचरा खुले में जमा होता रहा। खुले में कचरा जमा होने से आसपास गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी हुई है। इसी वजह से मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं।

चार जगह सिविल वर्क पूरा

रिपोर्ट के अनुसार, छह अंचलों में से चार जगह कचरा ट्रांसफर स्टेशन का सिविल वर्क पूरा किया जा चुका है। इनमें नूतन राजधानी, पाटलिपुत्र, कंकड़बाग और बांकीपुर अंचल शामिल हैं। इन चारों जगहों पर निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बावजूद मशीनरी की कमी के कारण स्टेशन पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रहे हैं। रिपोर्ट में इन स्टेशनों की अनुमानित लागत भी दी गई है। नूतन राजधानी अंचल में यारपुर के पास प्रस्तावित स्टेशन की लागत करीब 11.44 करोड़ रुपये है। पाटलिपुत्र अंचल में दीघा गोलंबर यानी गंगा पथ के पास स्टेशन पर करीब 12.49 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। कंकड़बाग अंचल में ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्टेशन की लागत करीब 12.48 करोड़ रुपये और बांकीपुर अंचल में बाजार समिति के पास प्रस्तावित स्टेशन की लागत करीब 12.68 करोड़ रुपये बताई गई है।

दो अंचलों में जमीन का इंतजार

पटना सिटी और अजीमाबाद अंचल में समस्या और अलग है। इन दोनों जगहों पर कचरा ट्रांसफर स्टेशन के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं हो पाई है। जमीन आवंटन के लिए जिला प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है। इस कारण इन दोनों जगहों पर निर्माण शुरू करने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी है।

यारपुर में एयरपोर्ट के पास बढ़ रहा खतरा

यारपुर में कचरा प्रबंधन का काम अधूरा रहने से एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों का जमावड़ा बढ़ने की आशंका जताई गई है। खुले में कचरा रहने से पक्षियों के आकर्षित होने का खतरा रहता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिन पहले पक्षियों के झुंड के कारण पटना आने वाली एक फ्लाइट को वाराणसी डायवर्ट करना पड़ा था। ऐसे में एयरपोर्ट के आसपास कचरे का उचित प्रबंधन उड़ान सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

NGT ने मांगा जवाब

खुले में कचरा डंपिंग और कचरा प्रबंधन की स्थिति को लेकर NGT ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम से जवाब मांगा है। अब विभाग और नगर निगम को परियोजना में हो रही देरी, फंड की स्थिति, मशीनरी और जमीन से जुड़े मामलों पर जवाब देना होगा।

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