सुशांत सिंह राजपूत मामले में न्यायिक जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने राष्ट्रपति को भेजी याचिका

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BNT Desk: फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और उनकी पूर्व प्रबंधक दिशा सालियान की मृत्यु से जुड़े मामलों की न्यायिक जांच की मांग उठाई गई है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने राष्ट्रपति को याचिका भेजकर दोनों मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने का अनुरोध किया है। याचिका में आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट या बॉम्बे हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश से कराने की मांग की गई है। अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह का कहना है कि दोनों मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित पड़ताल होनी चाहिए, ताकि घटनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका साक्ष्यों से प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

राष्ट्रपति को भेजी गई न्यायिक आयोग गठित करने की मांग

अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के अनुसार, उन्होंने न्यायहित में राष्ट्रपति को याचिका भेजी है। इसमें सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मृत्यु से जुड़े मामलों की समग्र जांच के लिए न्यायिक आयोग बनाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि आयोग की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय अथवा बॉम्बे हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश को सौंपी जाए, ताकि जांच स्वतंत्र तरीके से हो सके। याचिका का उद्देश्य दोनों घटनाओं से जुड़े तथ्यों की न्यायिक समीक्षा कराना बताया गया है। अधिवक्ता ने कहा कि जांच का आधार उपलब्ध साक्ष्य और तथ्य होने चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले घटनाओं से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल जरूरी है।

 

महाराष्ट्र सरकार को कार्रवाई के निर्देश मिलने का दावा

संजीव कुमार सिंह ने बताया कि 10 सितंबर को राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव को सुशांत सिंह राजपूत मामले से संबंधित भेजी गई याचिका पर कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब वह मुंबई जाकर महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री सचिव, राज्यपाल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे। उनके मुताबिक, इस दौरान मामले में आगे की कार्रवाई और न्यायिक जांच की मांग को लेकर अपनी बात रखी जाएगी। हालांकि, उनके द्वारा साझा किए गए विवरण में राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से दिए गए निर्देशों की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया या उसके बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

 

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु की परिस्थितियों की समीक्षा की मांग

याचिका में जून 2020 में मुंबई के बांद्रा स्थित आवास पर हुई सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु का उल्लेख किया गया है। अधिवक्ता ने पूर्व में हुई जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जाने का दावा करते हुए मृत्यु की परिस्थितियों की नए सिरे से न्यायिक समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को दोबारा स्वतंत्र रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों, रिपोर्टों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की समीक्षा किए जाने की मांग की है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि याचिका में उठाए गए सवाल और आरोप जांच की मांग करने वाले पक्ष के दावे हैं। इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष या किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता।

 

दिशा सालियान मामले को भी जांच के दायरे में लाने की मांग

अधिवक्ता ने दिशा सालियान की मृत्यु के मामले को भी प्रस्तावित न्यायिक जांच के दायरे में शामिल करने का अनुरोध किया है। याचिका में दोनों घटनाओं के बीच किसी संभावित आपराधिक संबंध की तथ्यात्मक जांच किए जाने की मांग की गई है। उनका तर्क है कि दिशा सालियान की मृत्यु से संबंधित जांच में सामने आने वाले स्रोतों और साक्ष्यों से सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने दोनों मामलों की अलग-अलग जांच के साथ-साथ उनके बीच संभावित संबंधों की भी स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा की मांग की है।

 

पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

संजीव कुमार सिंह ने वर्ष 2020 और 2021 के दौरान हुई जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुंबई पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की जांच को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार किए जाने की प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन पहलुओं की भी न्यायिक जांच के दौरान समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि, इस संबंध में उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच या अदालत के अंतिम निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। किसी भी दावे की वास्तविक स्थिति संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगी।

 

रिया चक्रवर्ती समेत अन्य लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग

याचिका में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती समेत अन्य लोगों की कथित भूमिका की भी निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग की गई है। अधिवक्ता ने कहा कि जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ पूर्वधारणा के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साक्ष्यों से साबित नहीं होते हैं, तो निष्कर्ष भी उसी आधार पर होना चाहिए।

 

स्वतंत्र और साक्ष्य आधारित जांच पर जोर

अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने अपनी मांग में मुख्य रूप से स्वतंत्र, निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित जांच पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दोनों मामलों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।उनके मुताबिक, न्यायिक आयोग के जरिए जांच होने से उपलब्ध दस्तावेजों, रिपोर्टों और अन्य साक्ष्यों की समग्र समीक्षा की जा सकती है। उन्होंने जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।याचिका के जरिए अब यह मामला एक बार फिर न्यायिक जांच की मांग के संदर्भ में सामने आया है। प्रस्तावित आयोग के गठन और आगे की प्रक्रिया पर संबंधित संवैधानिक और राज्य स्तर के अधिकारियों की ओर से होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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