पटना: जमीन के नीचे तेज हो रहा मेट्रो का काम, मोइन-उल-हक से पटना यूनिवर्सिटी तक TBM से टनलिंग जारी

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BNT Desk: पटना में मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण कार्य जमीन के ऊपर ही नहीं, बल्कि शहर की सड़कों और इमारतों के नीचे भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोइन-उल-हक मेट्रो स्टेशन से पटना यूनिवर्सिटी तक पटना मेट्रो के कॉरिडोर-3 के महत्वपूर्ण हिस्से में अंडरग्राउंड टनलिंग का काम जारी है। टनल बोरिंग मशीन यानी TBM की मदद से जमीन के नीचे सुरंग बनाई जा रही है। इसके साथ ही सुरंग को स्थायी मजबूती देने के लिए प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट भी लगाए जा रहे हैं। मेट्रो परियोजना के इस हिस्से में होने वाला काम शहर के लोगों को दिखाई नहीं देता, लेकिन जमीन के नीचे लगातार निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। हर चरण में सुरंग की खुदाई, कंक्रीट सेगमेंट लगाने और पूरी संरचना की सही स्थिति सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

 

TBM से जमीन के नीचे की जा रही खुदाई

मोइन-उल-हक मेट्रो स्टेशन से पटना यूनिवर्सिटी के बीच अंडरग्राउंड टनल बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। TBM एक बड़ी मशीन होती है, जिसे जमीन के नीचे सुरंग बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है। मशीन आगे बढ़ते हुए निर्धारित हिस्से की खुदाई करती है। इसके बाद तैयार हो रहे सुरंग के हिस्से में प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट लगाए जाते हैं। इन सेगमेंट को एक-दूसरे के साथ जोड़कर सुरंग की स्थायी लाइनिंग तैयार की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में मशीन के संचालन के साथ-साथ सुरंग की दिशा और संरचना की लगातार निगरानी की जाती है।

 

सुरंग की मजबूती के लिए लगाए जा रहे कंक्रीट सेगमेंट

अंडरग्राउंड मेट्रो टनल के निर्माण में केवल जमीन के भीतर खुदाई करना ही पर्याप्त नहीं होता। सुरंग को मजबूत और स्थायी बनाने के लिए उसकी अंदरूनी लाइनिंग भी तैयार की जाती है। मोइन-उल-हक से पटना यूनिवर्सिटी वाले हिस्से में TBM से खुदाई के बाद प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट लगाए जा रहे हैं। इन सेगमेंट को निर्धारित डिजाइन के अनुसार जोड़कर सुरंग की गोलाकार संरचना तैयार की जाती है। टनल के प्रत्येक रिंग को सही स्थिति में स्थापित करना जरूरी होता है। इसमें थोड़ी सी भी गड़बड़ी आगे के निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सेगमेंट की फिटिंग और अलाइनमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

जमीन और निर्माण की स्थिति पर लगातार नजर

शहर के नीचे होने वाले मेट्रो निर्माण में ग्राउंड कंडीशन की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। निर्माण के दौरान जमीन और आसपास की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। TBM के जरिए सुरंग निर्माण के साथ-साथ निर्माण की स्थिति की मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि काम तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ सके। सुरंग के प्रत्येक हिस्से को निर्धारित दिशा और डिजाइन के अनुरूप तैयार करने की कोशिश की जा रही है। शहर के व्यस्त इलाके के नीचे यह निर्माण कार्य होने के कारण मेट्रो परियोजना के इस हिस्से में तकनीकी प्रक्रिया और निगरानी दोनों महत्वपूर्ण हैं।

 

एक-एक रिंग से तैयार हो रही पूरी सुरंग

अंडरग्राउंड मेट्रो टनल कई छोटे-छोटे हिस्सों को जोड़कर तैयार की जाती है। TBM के आगे बढ़ने के साथ सुरंग के अंदर कंक्रीट सेगमेंट की रिंग लगाई जाती है। हर रिंग को पिछले हिस्से के साथ जोड़ा जाता है। इस तरह धीरे-धीरे पूरी सुरंग का स्थायी ढांचा तैयार होता जाता है। सुरंग की हर रिंग को सही तरीके से अलाइन करना निर्माण प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि मेट्रो निर्माण में एक-एक मीटर की प्रगति के पीछे कई तकनीकी प्रक्रियाएं होती हैं। जमीन के ऊपर मौजूद लोगों को भले ही यह काम दिखाई न दे, लेकिन नीचे लगातार सुरंग का निर्माण आगे बढ़ता रहता है।

 

कॉरिडोर-3 के लिए महत्वपूर्ण अंडरग्राउंड सेक्शन

मोइन-उल-हक मेट्रो स्टेशन से पटना यूनिवर्सिटी तक का हिस्सा पटना मेट्रो के कॉरिडोर-3 से जुड़ा है। इस सेक्शन में अंडरग्राउंड टनलिंग का काम आगे बढ़ना परियोजना के निर्माण क्रम में महत्वपूर्ण है। इस हिस्से में सुरंग के साथ भविष्य में अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद यह अंडरग्राउंड सेक्शन पटना मेट्रो की नियमित यात्री सेवा का हिस्सा बनेगा। फिलहाल निर्माण एजेंसियां जमीन के नीचे टनल बनाने और उसे मजबूत करने की प्रक्रिया पर काम कर रही हैं।

 

दिखाई नहीं देता काम, लेकिन नीचे बन रहा मेट्रो का रास्ता

पटना के लोगों के लिए मेट्रो निर्माण का बड़ा हिस्सा सड़कों, बाजारों और शहर के दूसरे हिस्सों में दिखाई देता है। लेकिन अंडरग्राउंड सेक्शन में काम पूरी तरह जमीन के नीचे होता है। मोइन-उल-हक से पटना यूनिवर्सिटी के बीच भी ऐसा ही हो रहा है। ऊपर से शहर की सामान्य गतिविधियां चलती रहती हैं, जबकि नीचे TBM के जरिए सुरंग बनाई जा रही है। टनलिंग के दौरान खुदाई के बाद कंक्रीट सेगमेंट की रिंग लगाकर स्थायी लाइनिंग तैयार की जा रही है। निर्माण की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरंग के प्रत्येक हिस्से की स्थिति और अलाइनमेंट को ध्यान में रखा जा रहा है।

 

हर मीटर की प्रगति भविष्य की मेट्रो यात्रा से जुड़ी

पटना मेट्रो का अंडरग्राउंड निर्माण शहर के परिवहन नेटवर्क को तैयार करने की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है। सुरंग की हर रिंग और जमीन के नीचे बनाया जा रहा हर हिस्सा आगे चलकर मेट्रो के रास्ते का हिस्सा बनेगा। मोइन-उल-हक मेट्रो स्टेशन से पटना यूनिवर्सिटी तक TBM से टनलिंग का काम जारी रहने के साथ इस सेक्शन में निर्माण की गति आगे बढ़ रही है। फिलहाल यात्रियों को यह काम सीधे नजर नहीं आता, लेकिन शहर की सड़कों के नीचे पटना मेट्रो के लिए नया रास्ता तैयार किया जा रहा है।

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