‘कांटे’ और ‘शूटआउट एट वडाला’ के निर्देशक संजय गुप्ता का निधन, 59 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

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BNT Desk: बॉलीवुड के चर्चित फिल्ममेकर और निर्देशक संजय गुप्ता का मुंबई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 59 वर्ष के थे। संजय गुप्ता ने ‘जंग’, ‘कांटे’, ‘शूटआउट एट वडाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों के जरिए हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

परिवार के सूत्रों और उनके करीबी सहयोगी मिलाप जावेरी ने संजय गुप्ता के निधन की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि वह बीती रात अपने घर के बाथरूम में गिर गए थे। हालांकि, गिरने के बाद क्या हुआ और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह तक किसी को घटना की जानकारी नहीं हो सकी। बाद में पता चला कि गिरने के कारण उनकी मौत हो गई। मामले में वर्सोवा पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में अब तक किसी तरह की साजिश या गलत गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं।

 

सिर में चोट लगने से हुई मौत की जानकारी

फिल्ममेकर अशोक पंडित ने भी संजय गुप्ता के निधन पर दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि संजय गुप्ता की घर पर सिर में चोट लगने के बाद मौत हुई। अशोक पंडित ने अपने संदेश में लिखा कि संजय गुप्ता के निधन की खबर बेहद चौंकाने वाली और दुखद है। उन्होंने उन्हें शानदार निर्देशक, बेहतरीन कहानीकार, जिंदादिल इंसान और सिनेमा के प्रति जुनूनी फिल्ममेकर बताया। पंडित ने कहा कि संजय गुप्ता का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ी क्षति है और वह अपने दोस्त को याद करेंगे। पुलिस फिलहाल घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। मौत के कारणों और घटना के क्रम को लेकर आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।

 

‘आतिश’ से शुरू हुआ था निर्देशन का सफर

संजय गुप्ता ने वर्ष 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से निर्देशन की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर से ही उनकी फिल्मों में अपराध, गैंगस्टर दुनिया, एक्शन और तनावपूर्ण कहानी कहने की शैली प्रमुख रही। उनकी फिल्मों में मुंबई की अंडरवर्ल्ड दुनिया, अपराध और पुलिस कार्रवाई जैसे विषय अक्सर देखने को मिले। इसी शैली ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने अपने करीब 25 साल के करियर को ‘हिट्स और मिसेज’ से भरा बताया था, लेकिन कठिन दौर से निकलकर दोबारा कामयाबी हासिल करने पर संतोष भी जताया था।

 

‘कांटे’ ने दिलाई बड़ी पहचान

संजय गुप्ता के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में वर्ष 2002 में रिलीज हुई ‘कांटे’ शामिल है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, लकी अली और महेश मांजरेकर जैसे कलाकार नजर आए थे। ‘कांटे’ ने गैंगस्टर-थ्रिलर शैली में संजय गुप्ता को मजबूत पहचान दिलाई। फिल्म की कहानी, कलाकारों की टोली और अपराध की दुनिया को दिखाने के अंदाज ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इस फिल्म के बाद संजय गुप्ता का नाम हिंदी सिनेमा के चर्चित एक्शन और क्राइम-ड्रामा निर्देशकों में शामिल होने लगा।

 

संजय दत्त से विवाद के बाद आया मुश्किल दौर

संजय गुप्ता ने अपने करियर में एक ऐसा दौर भी देखा, जब उनके लिए फिल्में बनाना मुश्किल हो गया था। संजय दत्त के साथ उनके मतभेद के बाद फिल्म इंडस्ट्री में उनके काम को लेकर मुश्किलें बढ़ीं। गुप्ता ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि संजय दत्त से विवाद के बाद इंडस्ट्री के कई लोग उनके साथ काम करने से बचने लगे थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि संजय दत्त ने खुद किसी को उनके साथ काम न करने के लिए नहीं कहा था, बल्कि अभिनेता के आसपास के कुछ लोगों ने दूसरों को उनसे दूर रहने की सलाह दी थी। संजय गुप्ता ने इस दौर को अपने जीवन का बेहद कठिन समय बताया था। उन्होंने कहा था कि लगभग चार साल तक वह फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहे और उन्हें लगने लगा था कि अब उन्हें काम नहीं मिलेगा। इस दौरान उन्होंने खंडाला के एक होटल में सप्ताह के चार दिन काम करना शुरू कर दिया था।

 

बेटे के जन्म के बाद बदला नजरिया

संजय गुप्ता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बेटे के जन्म के बाद उनके जीवन और करियर को लेकर नजरिया बदल गया। उन्होंने कहा था कि जब वह अपने बेटे को गोद में लिए हुए थे, तब उनके मन में सवाल आया कि वह उसके लिए क्या छोड़कर जाएंगे और क्या इतनी जल्दी हार मान लेना सही है। गुप्ता ने बताया था कि उन्होंने 15 साल की उम्र में शुरुआत की थी और 22 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म बनाई थी। ऐसे में 40 साल की उम्र में फिल्म निर्माण छोड़ने का विचार उन्हें सही नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने निर्माता एकता कपूर से संपर्क किया और ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ के सीक्वल पर काम करने की इच्छा जताई। एकता कपूर के साथ बातचीत के बाद उन्होंने फिर से फिल्म बनाने की तैयारी शुरू की।

 

‘शूटआउट एट वडाला’ से की वापसी

संजय गुप्ता ने वर्ष 2013 में ‘शूटआउट एट वडाला’ के जरिए वापसी की। फिल्म में जॉन अब्राहम और अनिल कपूर ने अहम भूमिकाएं निभाईं। गुप्ता के मुताबिक, उस समय दोनों कलाकारों को उनके साथ काम न करने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने उनके साथ फिल्म करने का फैसला लिया। संजय गुप्ता ने अनिल कपूर के समर्थन को याद करते हुए कहा था कि अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से उनका साथ दिया था। कपूर ने कहा था कि अगर संजय दत्त सीधे उनसे गुप्ता के साथ काम न करने को कहेंगे, तो वह ऐसा करेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें वजह बतानी होगी। गुप्ता ने इस समर्थन को अपने कठिन दौर में बेहद महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने बाद में कहा कि इस अनुभव से उन्होंने निजी और पेशेवर रिश्तों के बीच संतुलन रखना सीखा।

‘जज्बा’, ‘काबिल’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों का निर्देशन

‘शूटआउट एट वडाला’ के बाद संजय गुप्ता ने वर्ष 2015 में ‘जज्बा’ और 2017 में ‘काबिल’ का निर्देशन किया। ‘काबिल’ में ऋतिक रोशन और यामी गौतम मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म को दर्शकों के बीच अच्छी पहचान मिली और यह उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल हुई। इसके बाद उन्होंने ‘मुंबई सागा’, ‘विस्फोट’ और ‘द मिरांडा ब्रदर्स’ जैसी फिल्मों पर काम किया। उनकी फिल्मों में एक्शन, अपराध और भावनात्मक संघर्ष का मिश्रण देखने को मिलता था।

 

फिल्म इंडस्ट्री में शोक

संजय गुप्ता के निधन की खबर से उनके सहयोगियों, दोस्तों और फिल्म जगत के लोगों में शोक है। अशोक पंडित ने उन्हें जिंदादिल इंसान और सिनेमा के प्रति जुनूनी फिल्ममेकर बताते हुए श्रद्धांजलि दी। संजय गुप्ता का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कठिन दौर के बाद वापसी की और कई चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया। उनके निधन से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे निर्देशक को खो दिया, जिसकी पहचान अपराध और एक्शन फिल्मों की विशिष्ट शैली से जुड़ी रही।

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