BNT Desk: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति, बच्चों के प्रदर्शन और अभिभावकों की भागीदारी को समझने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को स्कूल में आयोजित पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) का अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से सीधे बातचीत की और स्कूल में पढ़ाई से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों से उनकी पढ़ाई और परीक्षा के प्रदर्शन के बारे में सवाल किए, वहीं शिक्षकों से प्रत्येक छात्र की प्रगति पर नजर रखने की बात कही।
PTM में पहुंचकर शिक्षकों और अभिभावकों से किया संवाद
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्कूल पहुंचे और सबसे पहले वहां चल रही पेरेंट्स-टीचर मीटिंग की गतिविधियों को देखा। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों के बीच हो रही बातचीत को समझा और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी चिंताओं तथा सुझावों की जानकारी ली। PTM के दौरान अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई और प्रदर्शन को लेकर शिक्षकों से बातचीत करने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री ने इस पूरी प्रक्रिया को देखा और यह जानने की कोशिश की कि बच्चों की शिक्षा को लेकर स्कूल और अभिभावकों के बीच किस तरह संवाद हो रहा है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से भी बातचीत की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, परीक्षा और स्कूल के माहौल से जुड़े सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने यह समझने की कोशिश की कि बच्चे किस तरह पढ़ाई कर रहे हैं और उन्हें पढ़ाई के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
महिला प्रिंसिपल के बगल में बैठकर बच्चों से की बातचीत
मुख्यमंत्री का स्कूल दौरा उस समय खास नजर आया, जब वह महिला प्रिंसिपल के बगल में बैठकर छात्र-छात्राओं से बातचीत करते दिखे। इस दौरान उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई और परीक्षा में प्रदर्शन के बारे में जानकारी ली। सीएम ने बच्चों से यह जानने की कोशिश की कि उनकी तैयारी कैसी चल रही है और परीक्षा में उनका प्रदर्शन कैसा रहा है। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों को बेहतर पढ़ाई करने और परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने सिर्फ शिक्षकों और छात्र-छात्राओं से ही जानकारी नहीं ली, बल्कि अभिभावकों से भी सीधे बातचीत की। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित उनकी राय जानी।
छात्रा से पूछा- परीक्षा में कितने नंबर आए?
छात्र-छात्राओं से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने एक छात्रा से उसके परीक्षा परिणाम के बारे में पूछा। उन्होंने छात्रा से जानना चाहा कि इस बार परीक्षा में उसे कितने अंक मिले हैं। छात्रा ने मुख्यमंत्री को अपने प्राप्तांक के बारे में बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उसे आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को मेहनत इस तरह करनी चाहिए कि 300 अंकों की परीक्षा में 280 से 290 अंक तक हासिल किए जा सकें। मुख्यमंत्री की इस बातचीत में बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने पर जोर दिखाई दिया। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई को लेकर बातचीत कर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने की कोशिश की।
शिक्षकों से बोले- हर बच्चे के प्रदर्शन पर रखें नजर
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से बातचीत के दौरान बच्चों के परीक्षा परिणाम और उनकी प्रगति को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। मुख्यमंत्री के अनुसार, केवल परीक्षा का परिणाम देखना पर्याप्त नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि किस बच्चे को कितने अंक मिल रहे हैं और किन विषयों में उसे परेशानी हो रही है। यदि किसी छात्र का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुसार नहीं है तो उसके कारणों की पहचान करनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि कोशिश होनी चाहिए कि स्कूल के प्रत्येक छात्र को कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूर प्राप्त हों। जिन बच्चों के अंक इससे कम आ रहे हैं, उनके प्रदर्शन में सुधार के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
कमजोर छात्रों की परेशानी समझने पर जोर
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि यदि कोई बच्चा अपेक्षित अंक हासिल नहीं कर पा रहा है तो केवल उसके कम नंबरों पर ध्यान देने के बजाय यह पता लगाना जरूरी है कि इसके पीछे वजह क्या है। बच्चे को किसी विषय को समझने में परेशानी हो सकती है या पढ़ाई के तरीके में बदलाव की जरूरत हो सकती है। ऐसे बच्चों की पहचान कर उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ाई कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार कमजोर विषयों पर अतिरिक्त ध्यान देने, पढ़ाने के तरीके में बदलाव करने और बच्चों की समझ के मुताबिक शिक्षा देने की जरूरत हो सकती है। मुख्यमंत्री ने इसी तरह बच्चों के प्रदर्शन पर लगातार निगरानी रखने की बात कही।
अभिभावकों से भी लिए सुझाव
PTM के दौरान मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी बातचीत की और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर उनकी राय जानी। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल के वातावरण और उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से संवाद के जरिए यह समझने की कोशिश की कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सामने किस तरह की समस्याएं आती हैं। साथ ही यह भी जानने का प्रयास किया गया कि स्कूल की व्यवस्था में किन बदलावों की जरूरत महसूस होती है। PTM के माध्यम से शिक्षकों, बच्चों और अभिभावकों के बीच संवाद को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के स्कूल दौरे के दौरान भी इसी संवाद पर ध्यान दिया गया। बच्चों के परीक्षा परिणाम, शिक्षकों की भूमिका और अभिभावकों की भागीदारी के जरिए स्कूल में शिक्षा की स्थिति को समझने की कोशिश की गई।