BNT Desk: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बक्सर से भागलपुर के बीच करीब 350 किलोमीटर लंबे फोरलेन एक्सप्रेसवे के निर्माण की योजना है। खास बात यह है कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को गंगा नदी के दोनों किनारों पर विकसित करने की योजना बताई जा रही है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद बक्सर से भागलपुर के बीच सफर का समय घटकर करीब चार घंटे होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस प्रोजेक्ट को बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित कॉरिडोर से कई जिलों को सीधा फायदा मिलने की बात कही गई है। इसके साथ ही बाढ़ नियंत्रण, नदी की जलधारण क्षमता और परिवहन व्यवस्था को लेकर भी इस परियोजना से कई उम्मीदें जोड़ी जा रही हैं।
गंगा के दोनों किनारों पर बनेंगे बांध
प्रस्ताव के अनुसार, बक्सर से भागलपुर के बीच गंगा नदी के दोनों किनारों पर बांध बनाए जाएंगे। इन्हीं बांधों के ऊपर फोरलेन एक्सप्रेसवे विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य सड़क निर्माण के साथ नदी के आसपास के इलाकों की सुरक्षा और बाढ़ से निपटने की व्यवस्था को भी मजबूत करना बताया जा रहा है। परियोजना के तहत गंगा नदी की गहराई बढ़ाने के लिए गाद निकालने की योजना भी बताई गई है। नदी से गाद हटने के बाद उसकी जलधारण क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे बाढ़ के दौरान पानी के बहाव और जलस्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलने की बात कही जा रही है। बताया गया है कि इस परियोजना को लेकर सरकार की ओर से मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है।
करीब 350 किलोमीटर लंबा होगा पूरा कॉरिडोर
प्रस्तावित फोरलेन एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 350 किलोमीटर बताई जा रही है। गंगा नदी के किनारे विकसित होने वाला यह कॉरिडोर बिहार के कई हिस्सों को आपस में जोड़ने का काम करेगा। गंगा में रास्ते में कई छोटी-बड़ी नदियां मिलती हैं। ऐसे स्थानों पर एक्सप्रेसवे को आगे ले जाने के लिए पुलों के निर्माण की योजना भी बताई गई है। इस तरह नदी, बांध और सड़क से जुड़ी संरचनाओं को एक साथ विकसित करने की योजना है। परियोजना में लोगों की आवाजाही के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है।
12 जिलों को सीधे मिलेगा फायदा
प्रस्तावित फोरलेन एक्सप्रेसवे से बिहार के 12 जिलों को सीधा लाभ मिलने की बात कही गई है। गंगा के उत्तर और दक्षिण किनारों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। उत्तर बिहार की ओर यह कॉरिडोर सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार से जुड़ने की बात कही गई है। वहीं दक्षिण बिहार में बक्सर, भोजपुर, पटना, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर को इससे जोड़ने की योजना है। इस कनेक्टिविटी के जरिए उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। लोगों को एक जिले से दूसरे जिले तक जाने के लिए वैकल्पिक और तेज सड़क मार्ग मिल सकता है।
सोन समेत कई नदियों पर बैराज की योजना
इस परियोजना से जुड़ी योजना में कुछ प्रमुख नदियों पर बैराज बनाए जाने की बात भी सामने आई है। इनमें सोन नदी के अलावा बूढ़ी गंडक, बागमती और महानंदा जैसी नदियां शामिल हैं। बैराज के निर्माण से नदी के जल प्रबंधन को बेहतर करने की योजना बताई जा रही है। हालांकि, इन सभी संरचनाओं के निर्माण को लेकर विस्तृत तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल इस रोड प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जा रही है। DPR में सड़क की तकनीकी संरचना, पुल, बांध, बैराज, जमीन और निर्माण लागत समेत अलग-अलग पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
बक्सर से भागलपुर का सफर होगा आसान
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा उद्देश्य बक्सर और भागलपुर के बीच सड़क संपर्क को तेज और सुगम बनाना बताया जा रहा है। करीब 350 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब चार घंटे होने की उम्मीद जताई गई है। फोरलेन सड़क बनने से लंबी दूरी के वाहनों को बेहतर मार्ग मिल सकता है। इससे माल ढुलाई और सामान्य यातायात दोनों को सुविधा मिलने की संभावना है।
यूपी, झारखंड और बंगाल से भी बढ़ेगी कनेक्टिविटी
इस परियोजना का असर सिर्फ बिहार के जिलों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क के जरिए उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर आने-जाने में भी सुविधा हो सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। ऐसा होने पर बिहार से दिल्ली की ओर सड़क संपर्क को भी बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
व्यापार और रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का सीधा असर व्यापार और माल परिवहन पर पड़ सकता है। एक्सप्रेसवे बनने से अलग-अलग जिलों के बीच सामान की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। इसके साथ ही नए औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास की संभावना भी बन सकती है। सड़क संपर्क बेहतर होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और उद्योगों को परिवहन की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अभी यह परियोजना योजना और DPR तैयार होने के चरण में है। अंतिम रूट, निर्माण की समयसीमा, लागत और सभी संरचनाओं को लेकर विस्तृत जानकारी परियोजना की आधिकारिक मंजूरी और DPR के बाद ही स्पष्ट होगी।