BNT Desk: पटना सचिवालय थाना क्षेत्र में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सचिवालय थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी बनकर लोगों पर प्रभाव जमाते थे और नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे वसूलते थे। गिरफ्तार आरोपियों में अजय कुमार शुक्ल और उसका साला राजा कुमार शामिल है। पुलिस के अनुसार, दोनों के पास से फर्जी पहचान पत्र, पुलिस की वर्दी, कथित फर्जी नियुक्ति पत्र, मोबाइल, लैपटॉप और स्टांप समेत कई सामान बरामद किए गए हैं।
मामला सामने आने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों ने कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया और नौकरी दिलाने के नाम पर कितनी रकम की कथित वसूली की। साथ ही, इस पूरे फर्जीवाड़े में किसी बड़े गिरोह या अन्य लोगों की भूमिका है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
सचिवालय में बैनर लगाकर बैठा था संदिग्ध
जानकारी के मुताबिक, समाज कल्याण विभाग में सहायक शाखा पदाधिकारी के पद पर तैनात राजनाथ सिंह को सचिवालय के कल्याण विभाग के बरामदे में एक संदिग्ध व्यक्ति के मौजूद होने की जानकारी मिली। बताया गया कि वहां एक व्यक्ति बैनर लगाकर बैठा था और सीडीपीओ की नियुक्ति से संबंधित जानकारी किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल के जरिए दिखा रहा था।
उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने के बाद उससे पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान उसने खुद को पटना के स्वास्थ्य विभाग की प्रशाखा-3 में पदस्थापित प्रशाखा पदाधिकारी बताया। उसने अपने सरकारी अधिकारी होने का दावा किया।
इसके बाद अधिकारियों ने उसके पहचान पत्र की जांच की। जांच में पहचान पत्र फर्जी पाया गया। इसके बाद विभाग की ओर से तत्काल सचिवालय थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
खुद को स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बताता था अजय
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान अजय कुमार शुक्ल के रूप में हुई है। आरोप है कि अजय खुद को स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था। वह सरकारी विभाग में नौकरी दिलाने की बात कहकर अभ्यर्थियों को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करता था।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर सरकारी पद और पहचान का इस्तेमाल लोगों को भरोसे में लेने के लिए करता था। वह लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता था कि सरकारी विभाग में उसकी पहुंच है और वह नियुक्ति कराने में मदद कर सकता है।
इस दौरान फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। अब पुलिस इन दस्तावेजों की जांच कर रही है कि इन्हें कहां और किस तरह तैयार कराया गया था।
साले को बना दिया फर्जी पुलिस कांस्टेबल
इस मामले में अजय कुमार शुक्ल के साले राजा कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। उसकी उम्र करीब 32 वर्ष बताई गई है। उसके पिता का नाम शिव शंकर झा बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, राजा कुमार भी कथित फर्जीवाड़े में अजय का सहयोग करता था। आरोप है कि अजय ने अपने साले को फर्जी पुलिस कांस्टेबल के रूप में पेश करने की तैयारी की थी। इसके लिए पुलिस की वर्दी और फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाता था।
इस तरह दोनों आरोपी अलग-अलग सरकारी पदों की पहचान बनाकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे। एक खुद को अधिकारी बताता था, जबकि दूसरा पुलिस कांस्टेबल के रूप में सामने आता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दोनों भूमिकाओं का इस्तेमाल किन लोगों के सामने और किन उद्देश्यों से किया गया।
पुलिस ने तीन मोबाइल और लैपटॉप किए बरामद
सचिवालय थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से कई सामान बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, बरामद सामान में तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, दो पुलिस वर्दी, दो फर्जी आईकार्ड, दो कथित फर्जी नियुक्ति पत्र या प्रशस्ति पत्र और स्टांप शामिल हैं।
बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया था। अगर इनमें नौकरी दिलाने से संबंधित बातचीत, दस्तावेज या लेन-देन की जानकारी मिलती है तो जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कितने लोगों से की ठगी, इसकी जांच
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नौकरी के नाम पर कथित फर्जीवाड़ा कितने समय से चल रहा था। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया था और कितने लोगों से पैसे लिए गए।
इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने किसी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के नाम का गलत इस्तेमाल किया था। अगर किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए?
मामले की जांच में फर्जी दस्तावेजों का स्रोत भी अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी आईकार्ड, नियुक्ति पत्र और अन्य कागजात कहां तैयार किए गए।
इसके साथ ही स्टांप और पुलिस वर्दी हासिल करने के तरीके की भी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इन सामानों का इस्तेमाल लोगों के बीच सरकारी पद और अधिकार का झूठा प्रभाव बनाने के लिए किया जाता था।
दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी
फिलहाल सचिवालय थाना पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस उनके संपर्क में रहे लोगों और कथित नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। जांच के दौरान अगर अन्य लोगों के नाम सामने आते हैं तो उनसे भी पूछताछ की जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के बाद मामले में और जानकारी सामने आ सकती है। अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि नौकरी के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल थे।
सचिवालय जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में इस तरह फर्जी पहचान के साथ गतिविधि सामने आने के बाद सुरक्षा और दस्तावेजों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।