बिहार: फरक्का संधि बिहार के हित में नहीं, हर हाल में बदलना होगा: संजय झा; बोले- पहले तय हो बिहार का हिस्सा

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BNT Desk: जनता दल यूनाइटेड(JDU ) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने फरक्का संधि को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि फरक्का संधि सीधे तौर पर बिहार से जुड़ा हुआ मुद्दा है और इसके कारण बिहार के पानी का हिस्सा बाहर जा रहा है। संजय झा ने कहा कि इस समझौते को किसी भी हालत में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। अगर भविष्य में संधि को आगे बढ़ाने पर विचार होता है तो सबसे पहले बिहार के हितों और राज्य के हिस्से को तय करना होगा।

उन्होंने कहा कि बिहार लंबे समय से बाढ़ की समस्या से जूझता रहा है और फरक्का संधि भी इसके कारणों में से एक है। जदयू नेता ने कहा कि बिहार के हितों की अनदेखी करके किसी भी समझौते को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

 

12 दिसंबर को संधि की अवधि खत्म होने का हवाला

संजय झा ने कहा कि फरक्का संधि को लेकर सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि इसकी अवधि 12 दिसंबर को खत्म हो रही है। उनके मुताबिक, ऐसे समय में यह जरूरी है कि संधि को आगे बढ़ाने से पहले बिहार के हितों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी किसी भी हालत में मौजूदा व्यवस्था को उसी रूप में आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। अगर संधि आगे बढ़ती भी है तो उसमें सबसे पहले बिहार के हिस्से को सुनिश्चित करना होगा।

संजय झा ने कहा कि बिहार का पानी बाहर जा रहा है और राज्य को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को बिहार के लोगों के हित से जोड़ते हुए कहा कि इस पर अब गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय की जरूरत है।

 

‘पहले बिहार का हिस्सा तय हो, फिर आगे बढ़े संधि’

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि अगर फरक्का संधि को आगे बढ़ाने की बात होती है तो बिहार के हितों को सबसे ऊपर रखना होगा। उन्होंने कहा कि पहले यह तय किया जाना चाहिए कि बिहार को पानी में कितना हिस्सा मिलेगा और इसके बाद ही संधि को आगे बढ़ाने पर विचार होना चाहिए।

उनका कहना है कि यदि बिहार का हिस्सा तय नहीं होता है तो संधि को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। संजय झा ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

उन्होंने इसे केवल पानी के बंटवारे का मुद्दा नहीं बल्कि बिहार के भविष्य और राज्य में बाढ़ की समस्या से जोड़कर पेश किया। उनके मुताबिक, बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ से बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी होती है और इसके पीछे कई कारण हैं। फरक्का समझौते को भी उन्होंने इनमें से एक कारण बताया।

 

विपक्ष पर भी साधा निशाना

संजय झा ने फरक्का संधि के मुद्दे पर विपक्षी दलों को भी घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में उन्हें बिहार की जनता का पूरा समर्थन मिल रहा है।

जदयू नेता ने कहा कि बिहार के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनका कहना है कि राज्य के पानी और बाढ़ जैसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर बात होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों के लिए हर संभव कदम उठा रही है और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

 

पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल को लेकर भी टिप्पणी

फरक्का समझौते के संदर्भ में संजय झा ने पूर्व प्रधानमंत्री आईके गुजराल को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गुजराल साहब को किसी ने समझा दिया था कि अगर फरक्का समझौता करेंगे तो उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलेगा और इसी वजह से उन्होंने यह समझौता कर लिया।

हालांकि, यह संजय झा का राजनीतिक बयान है। उन्होंने इसी संदर्भ में मौजूदा समय में बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की। उनका कहना है कि अब परिस्थितियों को देखते हुए इस व्यवस्था पर दोबारा विचार जरूरी है।

 

बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग पर क्या बोले?

बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर संजय झा ने कहा कि वह इस भावना के साथ हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार कभी भी नाम बदलने के पक्ष में नहीं रहे हैं और वह काम के जरिए जवाब देते हैं।

संजय झा ने इस मामले में अपनी बात को व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि नाम बदलने की मांग करने वालों की भावना को वह समझते हैं। उन्होंने नीतीश कुमार के काम और उनकी राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि वह काम के जरिए अपनी पहचान बनाने में विश्वास रखते हैं।

अनंत सिंह के बयान पर पार्टी अध्यक्ष लेंगे फैसला

अनंत सिंह द्वारा जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के विधान परिषद चुनाव में विरोध किए जाने के सवाल पर भी संजय झा से प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष पूरे मामले को देख रहे हैं।

उन्होंने इस मुद्दे पर किसी तरह की विस्तृत टिप्पणी करने के बजाय पार्टी नेतृत्व के फैसले की ओर इशारा किया। इससे साफ है कि फिलहाल इस मामले में जदयू नेतृत्व स्तर पर निर्णय लिया जाना है।

 

तेजस्वी के विशेष मदद मांगने पर पलटवार

तेजस्वी यादव द्वारा केंद्र सरकार से बिहार के लिए विशेष मदद की मांग किए जाने पर भी संजय झा ने हमला बोला। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आज सवाल उठा रहे हैं, लेकिन जब उनके समय में बाढ़ आती थी तो वे जनता को मछली खिला रहे थे।

संजय झा ने कहा कि आज वही लोग केंद्र से विशेष मदद की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार वर्तमान समय में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

उन्होंने दोहराया कि बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। वहीं, फरक्का संधि को लेकर उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि बिहार के हितों को सुनिश्चित किए बिना इस संधि को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

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