वैशाली: बाढ़ में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, कब्रिस्तान में हिंदुओं का अंतिम संस्कार

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BNT Desk: बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच वैशाली जिले के हाजीपुर से गंगा-जमुनी तहजीब की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो आपसी भाईचारे और इंसानियत की मिसाल पेश कर रही है। बिदुपुर इलाके के निचले हिस्सों में बाढ़ का पानी भर जाने के कारण पारंपरिक श्मशान घाट पूरी तरह डूब गया है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं बची तो स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने कब्रिस्तान की ऊंची जमीन पर हिंदू परिवारों को अंतिम संस्कार की अनुमति दी।

बिदुपुर के चकौसन इलाके में सामने आई इस तस्वीर में हिंदू परिवार अपने मृत परिजनों का अंतिम संस्कार कब्रिस्तान में करते नजर आ रहे हैं। वहीं, बाढ़ के कारण विस्थापित हुए लोगों के पशुओं को भी इसी ऊंची जगह पर आश्रय दिया गया है। दोनों समुदायों के लोगों का कहना है कि आपदा की घड़ी में जाति और धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे की मदद करना ही सबसे जरूरी है।

श्मशान घाट डूबा तो कब्रिस्तान बना अंतिम संस्कार की जगह

बिदुपुर इलाके में बाढ़ का पानी लगातार फैलने के कारण कई निचले क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। घाट के पास स्थित श्मशान घाट भी बाढ़ के पानी में डूब गया। ऐसे में हिंदू परिवारों के सामने अंतिम संस्कार करने के लिए जगह की समस्या खड़ी हो गई।

इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से कब्रिस्तान की ऊंची जमीन पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई। मुस्लिम समुदाय की ओर से भी इस पर किसी तरह का विरोध नहीं किया गया। लोगों ने मानवीय जरूरत को समझते हुए हिंदू परिवारों को वहां अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी।

इस दौरान दोनों समुदायों के लोगों ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा किसी एक धर्म या समुदाय की समस्या नहीं है। जब सभी लोग मुश्किल में हैं तो एक-दूसरे का साथ देना ही सबसे बड़ी इंसानियत है।

 

‘आपदा के समय हम सब एक साथ हैं’

स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में कब्रिस्तान और श्मशान अलग-अलग धार्मिक परंपराओं से जुड़े स्थान हैं, लेकिन इस समय परिस्थितियां अलग हैं। बाढ़ ने पूरे इलाके को प्रभावित किया है और लोगों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर अंतिम संस्कार तक की मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

ऐसे में कब्रिस्तान की ऊंची जमीन का इस्तेमाल अंतिम संस्कार के लिए किए जाने पर दोनों समुदायों के लोगों ने सहमति जताई। लोगों ने कहा कि आपदा के समय किसी तरह के विवाद की जगह एक-दूसरे की मदद करना जरूरी है।

स्थानीय लोगों की यही सोच इस तस्वीर को खास बनाती है। जहां देश के अलग-अलग हिस्सों में धर्म के नाम पर विवाद की खबरें सामने आती रहती हैं, वहीं बाढ़ से प्रभावित वैशाली में लोगों ने आपसी सहयोग और भाईचारे की मिसाल पेश की है।

कब्रिस्तान में पशुओं के लिए भी बना आश्रय

बाढ़ का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में पशु भी प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में घरों और खेतों में पानी भर जाने के कारण पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती पैदा हो गई है।

चकौसन इलाके में कब्रिस्तान की ऊंची जमीन पर बाढ़ पीड़ितों के पशुओं को भी रखा गया है। यहां लोग अपने पशुओं की देखभाल कर रहे हैं। पानी से घिरे इलाके में यह स्थान लोगों और उनके पशुओं के लिए सुरक्षित जगह के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है।

इस तस्वीर में भी स्थानीय लोगों के बीच सहयोग साफ दिखाई दे रहा है। धार्मिक स्थल की पहचान से अलग हटकर बाढ़ के दौरान इसे जरूरतमंदों और पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

पप्पू यादव ने भी बताई भाईचारे की मिसाल

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी वैशाली के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। इसी क्रम में वह महनार और बिदुपुर पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी स्थिति जानी।

पप्पू यादव ने आपदा के दौरान दोनों समुदायों के बीच दिखाई दे रहे भाईचारे को मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि जब लोग मुश्किल में होते हैं तो एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। उनके मुताबिक, कब्रिस्तान में हिंदुओं के अंतिम संस्कार की तस्वीर इसी आपसी सहयोग को दिखाती है।

हालांकि, पप्पू यादव ने बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला भी बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जा रही है और पशुओं के लिए चारे की समस्या बनी हुई है।

 

पशुओं के चारे को लेकर सरकार पर हमला

पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में पशु चारे की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं की जा रही है, जिसके कारण पशुओं की स्थिति खराब हो रही है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने करीब दो लाख रुपये की राशि पीड़ितों के बीच बांटने की बात भी सामने आई है। पप्पू यादव लगातार वैशाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। उनका कहना है कि आपदा के समय राहत और बचाव के काम में तेजी लाने की जरूरत है।

 

इंसानियत ने धर्म की सीमाएं कीं छोटी

वैशाली के बिदुपुर से सामने आई यह तस्वीर बाढ़ की मुश्किल परिस्थितियों के बीच इंसानियत और आपसी सहयोग का संदेश देती है। एक तरफ जहां बाढ़ ने लोगों के घर, खेत और रास्ते डुबो दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ संकट के समय स्थानीय लोगों का एक-दूसरे के साथ खड़ा होना उम्मीद पैदा करता है। कब्रिस्तान में हिंदू परिवारों का अंतिम संस्कार और उसी जगह बाढ़ पीड़ितों के पशुओं को आश्रय मिलना बताता है कि संकट की घड़ी में इंसानियत सबसे बड़ी पहचान बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ खत्म होने के बाद धार्मिक स्थान अपनी सामान्य भूमिका में लौट जाएंगे, लेकिन मुश्किल समय में एक-दूसरे की मदद करने की यह भावना लंबे समय तक याद रहेगी।

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