बिहार की शिक्षा में ‘भ्रष्टाचार’ और सत्ता की ‘मजबूरी’: RJD सांसद सुधाकर सिंह ने राज्यपाल से की मुलाकात, नीतीश के इस्तीफे पर कसा तंज

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में जहाँ एक तरफ नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के दिग्गज नेता और सांसद सुधाकर सिंह ने आज बिहार के राज्यपाल से मुलाकात की। इस मुलाकात के केंद्र में बिहार की उच्च शिक्षा में व्याप्त कथित अराजकता और भ्रष्टाचार का मुद्दा रहा। साथ ही, उन्होंने बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान पर भी बेबाक राय रखी।

उच्च शिक्षा में भ्रष्टाचार: “परंपरा बन गई है लूट”

राजभवन से बाहर निकलने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए सुधाकर सिंह ने बिहार के विश्वविद्यालयों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था इस वक्त अराजकता और भ्रष्टाचार के दौर से गुजर रही है।

सांसद ने कड़े शब्दों में कहा, “बिहार के शैक्षणिक संस्थानों में भ्रष्टाचार अब एक परंपरा का रूप ले चुका है। यह कोई नई बात नहीं है, समय-समय पर घोटाले उजागर हुए हैं और लोग जेल भी गए हैं, लेकिन सिस्टम में सुधार के बजाय लूट का दायरा बढ़ता जा रहा है।” ### सबौर कृषि विश्वविद्यालय का दिया हवाला भ्रष्टाचार की गंभीरता को समझाते हुए सुधाकर सिंह ने भागलपुर के सबौर कृषि विश्वविद्यालय का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पूर्व मंत्री मेवालाल चौधरी को नियुक्ति घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल की हवा खानी पड़ी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में अन्य विश्वविद्यालयों में उससे भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार चल रहा है, जिसकी वे लगातार जांच की मांग कर रहे हैं।

सुधाकर सिंह ने उम्मीद जताई कि वर्तमान राज्यपाल, जो भारतीय सेना के जनरल रह चुके हैं, इस मामले में सख्त रुख अपनाएंगे। उन्होंने कहा, “चूंकि राज्यपाल महोदय का पृष्ठभूमि अनुशासित सेना की रही है, इसलिए हमें उम्मीद है कि इस बार उच्च शिक्षा के घोटालों की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मुख्यमंत्री की दौड़ पर तंज: “नीतीश को हटाना मजबूरी या दिल्ली का खेल?”

बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफे और नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चल रही चर्चाओं पर सुधाकर सिंह ने जेडीयू (JDU) और बीजेपी (BJP) दोनों को निशाने पर लिया। जब उनसे पूछा गया कि अगला मुख्यमंत्री किस दल का होना चाहिए, तो उन्होंने तर्कपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा, “अगर वर्तमान परिस्थितियों में नीतीश कुमार को हटाया जाना जरूरी है, तो स्वाभाविक तौर पर मुख्यमंत्री जेडीयू का ही होना चाहिए। बिहार के मतदाताओं ने ‘2025 से 2030 तक नीतीश कुमार’ के नारे पर भरोसा करके वोट दिया था। ऐसे में जनादेश का सम्मान करते हुए जेडीयू की दावेदारी सबसे मजबूत और सही है।”

“दिल्ली के इशारों पर सरकार चलना दुखद”

सुधाकर सिंह ने भाजपा पर परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए कहा कि अगर जेडीयू को दरकिनार कर किसी दूसरे दल (बीजेपी) का मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो यह स्पष्ट रूप से एक ‘मजबूरी’ का सौदा होगा।

सांसद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर बिहार की सरकार दिल्ली के इशारों पर चलाने की तैयारी हो रही है और इसी वजह से नेतृत्व परिवर्तन किया जा रहा है, तो यह बिहार की जनता के लिए बहुत दुखद होगा। बिहार को अपनी स्वायत्तता और स्थानीय नेतृत्व की जरूरत है, न कि दिल्ली से रिमोट कंट्रोल द्वारा संचालित होने वाली सरकार की।”

बिहार की सियासत में ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति

सुधाकर सिंह की राज्यपाल से यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलें अपने चरम पर हैं। एक तरफ जहां वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके राजनीतिक बयानों ने जेडीयू और बीजेपी के बीच ‘अविश्वास’ की खाई को और चौड़ा कर दिया है।

अब देखना यह होगा कि 14 और 15 अप्रैल की संभावित तारीखों पर क्या वाकई बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलता है, और क्या विपक्ष द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार के इन गंभीर मुद्दों पर राजभवन कोई कड़ा संज्ञान लेता है। फिलहाल, बिहार की राजनीति भ्रष्टाचार के आरोपों और कुर्सी की खींचतान के बीच उलझी हुई नजर आ रही है।

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