BNT Desk: बिहार के उच्च शिक्षा जगत से शोध (Research) और पीएचडी (PhD) करने की इच्छा रखने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक बहुत ही राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। कुलाधिपति सह राज्यपाल सचिवालय और शिक्षा विभाग की सहमति के बाद राज्य के सभी पारंपरिक विश्वविद्यालयों में पीएचडी में दाखिले की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 से पीएचडी एडमिशन के लिए विश्वविद्यालयों को अब अलग से अपनी कोई पेट (PAT – PhD Admission Test) या प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की आवश्यकता नहीं होगी। अब छात्रों का चयन पूरी तरह से उनके यूजीसी नेट (UGC NET) के प्राप्तांकों के आधार पर किया जाएगा।
छात्रों को समय और पैसे की बर्बादी से मिलेगी बड़ी राहत
इस क्रांतिकारी बदलाव से पहले बिहार के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पीएचडी में दाखिला लेने के लिए छात्रों को हर यूनिवर्सिटी का अलग फॉर्म भरना पड़ता था, भारी-भरकम फीस देनी पड़ती थी और अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं में बैठना पड़ता था। इस प्रक्रिया में न केवल छात्रों का काफी पैसा खर्च होता था, बल्कि यूनिवर्सिटी स्तर पर परीक्षाओं के आयोजन और रिजल्ट के प्रकाशन में महीनों और कभी-कभी सालों का विलंब हो जाता था। अब केंद्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली यूजीसी नेट परीक्षा के अंकों को ही आधार बना दिए जाने से पूरी प्रक्रिया बेहद तेज, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगी।
यूजीसी की नई गाइडलाइन के तहत तैयार की जा रही मेरिट लिस्ट
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की राष्ट्रीय नीति को बिहार में अक्षरशः लागू करते हुए अब नेट क्वालिफाइड छात्रों को उनके स्कोर कार्ड के आधार पर रैंक दी जाएगी। इसमें नेट जेआरएफ (JRF), नेट लेक्चररशिप और केवल पीएचडी पात्रता वाले छात्रों के लिए अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं। विश्वविद्यालयों में उपलब्ध सीटों के अनुसार नेट के मार्क्स और उसके बाद होने वाले एक छोटे से इंटरव्यू/काउंसलिंग के आधार पर सीधे एडमिशन दे दिया जाएगा। इस फैसले से बिहार में उच्च शिक्षा और शोध की गुणवत्ता में सुधार आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।