BNT Desk: बिहार के गया जिले (गयाजी) के खिजरसराय में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के काफिले और मंच पर हुई रोड़ेबाजी (पत्थरबाजी) के मामले में पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। इस पूरे हमले के मुख्य आरोपी मनीष यादव को पुलिस ने जहानाबाद जिले से गिरफ्तार कर लिया है। मनीष यादव घटना के बाद से ही फरार चल रहा था और पुलिस की नजरों से बचने के लिए अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। पुलिस की स्पेशल टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर उसे धर दबोचा।
स्कूल के कार्यक्रम में हुआ था पथराव
यह पूरी घटना गया के खिजरसराय इलाके में हुई थी। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी वहां के एक निजी स्कूल (Private School) के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने गए थे। कार्यक्रम के दौरान अचानक कुछ असामाजिक तत्वों ने मंच की तरफ पत्थरों और रोड़ों से हमला कर दिया।
केंद्रीय मंत्री पर हुए इस अचानक हमले से कार्यक्रम में भगदड़ मच गई और पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया। मंत्री की सुरक्षा में लगे जवानों ने तुरंत उन्हें घेरे में लिया और सुरक्षित निकाला। इस सुरक्षा चूक और हमले के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया था।
रिश्तेदार के घर में नाम बदलकर छिपा था आरोपी
हमले को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी मनीष यादव गया जिले से भाग निकला था। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। इस बीच पुलिस को टेक्निकल सर्विलांस और मुखबिरों से जानकारी मिली कि मनीष जहानाबाद जिले के घोसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गराई बीघा गांव में छिपा हुआ है।
वह वहां अपने एक रिश्तेदार के घर पर रुका था और अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने घेराबंदी करके उसे गराई बीघा गांव से गिरफ्तार कर लिया।
दो नाबालिग पहले ही आ चुके हैं गिरफ्त में
पुलिस ने बताया कि इस मामले में कार्रवाई घटना के दिन से ही शुरू कर दी गई थी। वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके से दो नाबालिग आरोपियों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, उस समय मुख्य चेहरा यानी मनीष यादव पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा था। मनीष की गिरफ्तारी के बाद अब इस केस की कड़ियां जुड़नी शुरू हो गई हैं।
सोची-समझी साजिश के तहत हुआ था हमला?
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह हमला अचानक गुस्से में आकर किया गया था या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक या व्यक्तिगत साजिश थी, इसकी जांच की जा रही है। चश्मदीदों और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जब पुलिस ने शुरुआती दौर में दो लड़कों को पकड़ा, उसके ठीक बाद दोबारा मंच की तरफ तेजी से रोड़े फेंके गए थे।
एक के बाद एक हुए इस सिलसिलेवार पथराव से यह साफ अंदेशा मिल रहा है कि हमला पूरी योजना (सुनियोजित साजिश) के तहत किया गया था। पुलिस अब इस बिंदु पर फोकस कर रही है कि क्या मनीष को इस काम के लिए किसी अन्य व्यक्ति या स्थानीय गुट ने उकसाया था या पैसे दिए थे।
थाने में हो रही है कड़ी पूछताछ, खुलेंगे कई राज
गिरफ्तारी के बाद मनीष यादव को गया के खिजरसराय थाने लाया गया है, जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की देखरेख में उससे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस मुख्य रूप से तीन सवालों के जवाब ढूंढ रही है:
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हमले को अंजाम देने की असली वजह या मंशा क्या थी?
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इस पूरी प्लानिंग में मनीष के साथ और कौन-कौन से लोग पर्दे के पीछे से शामिल थे?
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क्या केंद्रीय मंत्री को नुकसान पहुंचाने का कोई बड़ा इरादा था?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी मनीष यादव के बयानों को क्रॉस-वेरिफाई (जांच) किया जा रहा है। इस पूछताछ से जो भी नए नाम और तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।