JDU विधायक पप्पू पांडेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: MP-MLA कोर्ट से वापस ली जमानत अर्जी, गिरफ्तारी पर लगी रोक

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BNT Desk: बिहार की सियासत और कानूनी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। गोपालगंज के कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बाहुबली विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से एक बड़ी और फौरी राहत मिली है। जमीन विवाद और फायरिंग से जुड़े एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी की तलवार का सामना कर रहे जेडीयू विधायक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश-III सह विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) राजेंद्र कुमार पांडेय की अदालत से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है। इसके साथ ही अब इस मामले की स्थानीय सिविल कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर पूरी तरह रोक लग गई है। दूसरी तरफ, बिहार सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल केस की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच का जिम्मा सीआईडी (CID) को सौंप दिया है।

वकीलों ने कोर्ट को बताया- ‘अब सुप्रीम कोर्ट ही करेगा फैसला’

बुधवार को गोपालगंज की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में विधायक पप्पू पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की तारीख पहले से तय थी। लेकिन सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता (विधायक) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों की फौज—जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पाठक, उदय कुमार, शेख असगर और रवि प्रकाश मणी त्रिपाठी शामिल थे—ने अदालत को चौंकाते हुए विधायक की जमानत अर्जी को वापस लेने का अनुरोध किया।

बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को आधिकारिक रूप से अवगत कराया कि इस पूरे मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (सुंप्रीम कोर्ट) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावी आदेश जारी कर दिया है। ऐसी स्थिति में अब स्थानीय जिला अदालत से जमानत की गुहार लगाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। वकीलों के इस बयान के बाद अदालत ने अर्जी वापस करने की अनुमति दे दी, जिससे सिविल कोर्ट की कार्यवाही पर विराम लग गया।

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने दिया ‘नो कोर्सिव एक्शन’ का आदेश

जेडीयू विधायक पप्पू पांडेय को सुप्रीम कोर्ट से यह संजीवनी देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की तीन सदस्यीय विशेष बेंच से मिली है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्र, कुमारी अंजूल द्विवेदी, सौरभ तिवारी और राम शंकर जैसे दिग्गज वकीलों ने अपना मजबूत पक्ष रखा।

सभी पक्षों की दलीलें और मामले से जुड़ी परिस्थितियों को गहराई से सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना विधायक को अंतरिम राहत दे दी। सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा:

“जब तक पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) इस मामले में कोई प्रभावी और अंतिम सुनवाई नहीं कर लेता, तब तक कुचायकोट थाना एफआईआर संख्या 161/2026 के तहत याचिकाकर्ता (विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय) के खिलाफ पुलिस प्रशासन द्वारा कोई भी दंडात्मक कार्रवाई (जैसे गिरफ्तारी या कुर्की) नहीं की जाएगी।”

इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने विधायक पप्पू पांडेय को निर्देश दिया है कि वे अपनी लंबित याचिका के जल्द निपटारे के लिए पटना हाई कोर्ट में एक उचित आवेदन दें। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट से भी अनुरोध किया है कि इस वीआईपी मामले की सुनवाई को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए।

एक अप्रैल को हुआ था बवाल, चार भू-माफिया पहले से हैं जेल में

इस पूरे विवाद की शुरुआत इसी साल एक अप्रैल को हुई थी, जब कुचायकोट थाना क्षेत्र में जमीन पर कब्जे को लेकर भारी बवाल और गोलीबारी हुई थी। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके से चार कथित भू-माफियाओं—भोला पांडेय उर्फ राकेश पांडेय, गुड्डू कुमार, दीपक कुमार और नीतीश कुमार को रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो तब से लगातार सलाखों के पीछे हैं।

हालांकि, पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच के बाद इस पूरे मामले में जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) राहुल तिवारी को इस जमीन कब्जे और गोलीबारी की साजिश रचने (Conspiracy) का मुख्य आरोपी बनाया था।

किरण सिन्हा के कारिंदे ने दर्ज कराई थी सनसनीखेज एफआईआर

यह पूरा कानूनी बखेड़ा मुजफ्फरपुर के रहने वाले विमल प्रसाद सिन्हा की पत्नी किरण सिन्हा की कीमती जमीन को लेकर शुरू हुआ था। किरण सिन्हा के कारिंदे (देखभाल करने वाले) जितेंद्र कुमार राय (निवासी सेमराव, मीरगंज) ने कुचायकोट थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

प्राथमिकी के अनुसार, कुचायकोट के बेलवा गांव में किरण सिन्हा की लगभग 16 एकड़ 93 डिसमिल कीमती जमीन है, जिस पर गेहूं की फसल पूरी तरह पककर तैयार थी। एक अप्रैल को जब जितेंद्र कुमार राय फसल की देखरेख के लिए वहां पहुंचे, तो वहां पहले से हथियारों के साथ मौजूद दबंगों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि उन लोगों ने जितेंद्र को धमकाते हुए कहा कि “अपने मालिक से कहकर यह पूरी जमीन हमारे नाम लिखवा दो, वरना अंजाम बुरा होगा।” इसके बाद आरोपियों ने वहां बने पांच कमरों के सरकारी/निजी तालों को रॉड से तोड़ दिया और अपना ताला जड़ दिया। विरोध करने पर जान से मारने की नीयत से ताबड़तोड़ फायरिंग भी की गई थी।

मामले की संवेदनशीलता देख सरकार ने CID को सौंपी जांच

चूंकि इस मामले में सीधे तौर पर सत्ताधारी दल जेडीयू के एक रसूखदार विधायक का नाम साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है, इसलिए बिहार में इस पर जमकर राजनीति भी शुरू हो गई थी। मामले की संवेदनशीलता, बड़ी जमीन के टुकड़े और वीआईपी संलिप्तता को देखते हुए बिहार सरकार ने स्थानीय पुलिस से केस वापस ले लिया है। अब इस पूरे जमीन विवाद और गोलीबारी कांड की कड़ियों को सुलझाने की जिम्मेदारी राज्य की सबसे भरोसेमंद जांच एजेंसी सीआईडी (CID) को सौंप दी गई है। सीआईडी की टीम अब नए सिरे से इस मामले के वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को इकट्ठा करने में जुट गई है।

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