बिहार: राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर छिड़ा सियासी घमासान, तेज प्रताप ने AI फोटो शेयर कर दी मर्यादा की नसीहत

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BNT Desk: बिहार की सियासत में इन दिनों सरकारी बंगलों के आवंटन और उनके उपयोग को लेकर राजनीतिक तापमान अचानक बेहद बढ़ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर चल रहे हैं और यह पूरा मामला राज्य के सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में है बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और सत्ताधारी गठबंधन के बीच जारी खींचतान के बीच, जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भी एंट्री ले ली है। तेज प्रताप ने इस पूरे विवाद पर बेहद आक्रामक लेकिन सधे हुए अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी है।

तेज प्रताप यादव ने AI फोटो शेयर कर दिया मर्यादा का पाठ

सरकारी बंगले को लेकर चल रही बयानबाजी से आहत तेज प्रताप यादव ने अपनी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सम्मान में सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। तेज प्रताप यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक खास AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जनरेटेड तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को एक साथ दिखाया गया है। इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए तेज प्रताप ने राजनीतिक विमर्श की गिरती गरिमा पर अपनी चिंता जताई है।

तेज प्रताप यादव ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी मां राबड़ी देवी उनके लिए सर्वोच्च सम्मान का विषय हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष के नेताओं को नसीहत देते हुए लिखा कि किसी भी सार्वजनिक या राजनैतिक व्यक्ति के प्रति टिप्पणी करते समय मर्यादा, शालीनता और संजीदगी का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

‘लोकतंत्र में मतभेद हों, लेकिन संवाद सम्मानजनक रहे’

अपने सोशल मीडिया संदेश में तेज प्रताप यादव ने बिहार के शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं को संयमित भाषा का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने लिखा:

“लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। राजनीति में नीतियों और सिद्धांतों पर लड़ाई होनी चाहिए, न कि किसी के व्यक्तिगत जीवन या आवास पर। शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं की जिम्मेदारी बड़ी होती है, इसलिए संवाद का स्तर हमेशा सम्मानजनक और गरिमापूर्ण रहना चाहिए।”

तेज प्रताप ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक फायदे के लिए किसी के परिवार या मातृ सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई जानी चाहिए। व्यक्तिगत कीचड़ उछालने से बचकर ही बिहार के राजनीतिक विमर्श को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में रखा आवंटन का पूरा आंकड़ा

दूसरी तरफ, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधान परिषद में इस पूरे आवास आवंटन मामले पर सरकार का पक्ष पूरी मजबूती और आंकड़ों के साथ सामने रखा है। मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि नियमों के मुताबिक किसे कौन सा बंगला आवंटित किया गया है और वर्तमान में जमीनी स्थिति क्या है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) का दर्जा प्राप्त है। इस संवैधानिक पद के नाते सरकार की ओर से उन्हें ’39 हार्डिंग रोड’ स्थित सरकारी आवास आधिकारिक तौर पर आवंटित किया गया है। लेकिन, वे वर्तमान में इस आवंटित बंगले के बजाय ’10 सर्कुलर रोड’ स्थित बड़े सरकारी आवास में रह रही हैं।

तेजस्वी यादव के बंगले का भी हुआ जिक्र

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड और आवंटन सूची के अनुसार, तेजस्वी यादव का आधिकारिक आवास ‘1 पोलो रोड’ पर स्थित है। सरकार का कहना है कि नियमों के तहत आवंटित आवासों और वर्तमान में नेताओं के रहने वाले ठिकानों में अंतर होने के कारण ही यह प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा शुरू हुई है।

आवास विवाद के पीछे की असली सियासी रंजिश

बिहार में सरकारी बंगलों को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई बार मंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास खाली कराने या नए आवंटन को लेकर लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई देखने को मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 10 सर्कुलर रोड का बंगला सिर्फ एक घर नहीं है, बल्कि यह पिछले कई दशकों से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीति का मुख्य शक्ति केंद्र (Power Center) रहा है। लालू प्रसाद यादव और उनका पूरा परिवार इसी आवास से अपनी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करता है। यही कारण है कि इस बंगले पर उंगली उठते ही पूरा लालू परिवार और उनके समर्थक बेहद संवेदनशील हो जाते हैं।

शांति और पारदर्शिता बनाम राजनीतिक नफा-नुकसान

फिलहाल, दोनों ही पक्षों की ओर से इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क और दावे पेश किए जा रहे हैं। जहां एक तरफ सत्ता पक्ष इसे सरकारी नियमों, पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे बदले की भावना से की जा रही राजनीति करार दे रहा है। सरकारी आवासों के इर्द-गिर्द घूमती यह बहस आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेती है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल इस पूरे मामले पर बिहार के जागरूक मतदाताओं, युवाओं और शिक्षा जगत की पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि हर कोई देखना चाहता है कि इस ‘बंगला पॉलिटिक्स’ का अंत क्या होता है।

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