चिराग का तेजस्वी पर तीखा प्रहार: “बिहार को बदनाम न करें”, केरल में दिए ‘गरीब राज्य’ वाले बयान पर मचा बवाल

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में जुबानी जंग अब सातवें आसमान पर पहुंच गई है। लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। विवाद की जड़ तेजस्वी यादव का वह बयान है, जो उन्होंने केरल के चुनावी मंच से बिहार के बारे में दिया था। चिराग पासवान ने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनावी फायदे के लिए अपने ही राज्य को दूसरे प्रदेशों में जाकर बदनाम करना शर्मनाक है।

“बिहार की बदहाली के लिए आरजेडी जिम्मेदार”

चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव के ‘गरीब बिहार’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि तेजस्वी को यह बताने की भी हिम्मत दिखानी चाहिए कि बिहार को इस हालत में किसने पहुँचाया। चिराग ने सीधे तौर पर लालू-राबड़ी शासनकाल पर निशाना साधते हुए कहा:

  • 90 के दशक का काला अध्याय: चिराग ने आरोप लगाया कि 1990 के दशक में आरजेडी के शासनकाल के कारण ही बिहार विकास की दौड़ में पिछड़ गया।

  • पलायन की मजबूरी: उन्होंने कहा कि उस दौर की नीतियों और अराजकता की वजह से ही बिहार के लाखों युवाओं को अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ा।

  • बदनामी की राजनीति: चिराग के अनुसार, तेजस्वी यादव केरल जैसे राज्यों में जाकर बिहार की छवि खराब कर रहे हैं, जो किसी भी बिहारी के लिए स्वीकार्य नहीं है।

केरल में तेजस्वी ने क्या कहा था?

दरअसल, तेजस्वी यादव इन दिनों केरल के मलप्पुरम जिले के पोन्नानी क्षेत्र में माकपा (CPIM) उम्मीदवार एम. के. साकीर के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। वहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने कहा था— “मैं उस राज्य (बिहार) से आता हूँ जो देश का सबसे गरीब राज्य है। हम बिहार में कहते हैं कि हमारे राज्य को केरल जैसा होना चाहिए।”

तेजस्वी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर भी स्थानीय लोगों के समर्थन के लिए आभार जताया, लेकिन उनके इस ‘गरीब राज्य’ वाले संबोधन ने बिहार में एनडीए (NDA) के नेताओं को हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है।

नीतीश कुमार की सुरक्षा पर चिराग का बड़ा बयान

बिहार में चल रहे सत्ता परिवर्तन के दौर के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा (Z+ कैटेगरी) बढ़ाए जाने के सवाल पर भी चिराग पासवान ने अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

चिराग ने कहा, “14 अप्रैल के बाद आने वाली नई सरकार नीतीश कुमार के मान-सम्मान और सुरक्षा में कोई कमी नहीं होने देगी।” यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में गृह विभाग ने अधिसूचना जारी की है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने और राज्यसभा जाने के बाद भी उनका सुरक्षा कवच बरकरार रहेगा।

सियासी गलियारों में हलचल: 14 अप्रैल का इंतजार

बिहार की राजनीति इस वक्त एक बड़े ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। जहाँ एक तरफ 10 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने वाले हैं, वहीं दूसरी तरफ 14 अप्रैल को उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है।

वर्तमान परिदृश्य:

  1. 11 सीटों पर MLC चुनाव: बिहार में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए बिसात बिछ चुकी है, जहाँ एनडीए और महागठबंधन अपनी ताकत झोंक रहे हैं।

  2. नई सरकार का गठन: 18 अप्रैल से पहले बिहार में नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट है, जिसमें पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री होने की चर्चा तेज है।

  3. कानूनी पेच: एक तरफ जहां निर्मला सीतारमण के खिलाफ याचिका को कोर्ट ने ‘Floccinaucinihilipilification’ (महत्वहीन) बताकर खारिज किया है, वहीं बिहार में ‘अडानी बनाम अग्रवाल’ का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

विकास बनाम बदनामी की बहस

चिराग पासवान और तेजस्वी यादव के बीच छिड़ी यह जंग बताती है कि आने वाले समय में ‘बिहारी गौरव’ और ‘विकास के मॉडल’ पर राजनीति और तेज होगी। जहाँ तेजस्वी यादव केरल के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल की दुहाई दे रहे हैं, वहीं चिराग पासवान इसे बिहार के स्वाभिमान से जोड़कर आरजेडी को घेरने में जुटे हैं। अब यह बिहार की जनता को तय करना है कि वह इन बयानों को किस चश्मे से देखती है।

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