तेजस्वी के ‘केरल मॉडल’ वाले बयान पर बिहार में सियासी भूचाल: NDA ने बताया अपमान, RJD ने किया बचाव

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीर खूब चल रहे हैं। आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के केरल दौरे के दौरान दिए गए एक बयान ने पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा दिया है। तेजस्वी ने केरल की धरती से बिहार की तुलना करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं, जिसे सत्ताधारी एनडीए (NDA) ने हाथों-हाथ लपक लिया है और इसे ‘बिहार की अस्मिता का अपमान’ करार दिया है।

क्या है पूरा मामला? केरल में तेजस्वी ने क्या कहा?

दरअसल, तेजस्वी यादव पिछले दिनों केरल के एक निजी दौरे पर थे। वहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने केरल के विकास, साक्षरता और स्वास्थ्य सेवाओं की जमकर तारीफ की। तेजस्वी ने कहा कि केरल मॉडल से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। इसी दौरान उन्होंने बिहार का जिक्र करते हुए उसे एक ‘गरीब राज्य’ बताया और कहा कि बिहार को भी केरल की तर्ज पर आगे बढ़ने की जरूरत है।

तेजस्वी के इस बयान का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, बिहार में सत्ता पक्ष के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया।

NDA का तीखा प्रहार: “बिहार की छवि खराब कर रहे हैं तेजस्वी”

भाजपा और जदयू के नेताओं ने तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि वे बाहरी राज्यों में जाकर अपने ही प्रदेश की छवि धूमिल कर रहे हैं।

  • भाजपा का रुख: भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि तेजस्वी यादव को बिहार की बुराई करने के बजाय यह बताना चाहिए कि उनके परिवार के शासनकाल (लालू-राबड़ी दौर) में बिहार की क्या स्थिति थी। उन्होंने इसे 13 करोड़ बिहारियों का अपमान बताया।

  • जदयू की प्रतिक्रिया: जदयू नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। केरल और बिहार की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं, ऐसे में बिहार को नीचा दिखाना गलत है।

आरजेडी का पलटवार: “सच्चाई कड़वी होती है”

विवाद बढ़ता देख राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तेजस्वी यादव का बचाव किया है। आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि तेजस्वी ने जो कहा वह एक कड़वी सच्चाई है।

  • तर्क: आरजेडी का कहना है कि नीति आयोग की रिपोर्ट में भी बिहार कई मानकों पर पिछड़ा है। तेजस्वी का मकसद बिहार का अपमान करना नहीं, बल्कि उसे केरल जैसा समृद्ध और शिक्षित बनाने की प्रेरणा देना था।

  • बयान: “सच्चाई स्वीकार करने से ही सुधार होता है। तेजस्वी जी बिहार को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना चाहते हैं, इसलिए वे तुलना कर रहे हैं।”

बिहार MLC चुनाव और राजनीतिक टाइमलाइन पर असर

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब बिहार में 11 सीटों पर MLC चुनाव की सुगबुगाहट तेज है। साथ ही, 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच तेजस्वी का यह बयान महागठबंधन के लिए ‘सेल्फ गोल’ साबित होता है या संजीवनी, यह देखना दिलचस्प होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव इस बयान के जरिए शहरी और शिक्षित मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते थे कि वे विकास की नई सोच (Vision) रखते हैं, लेकिन एनडीए ने इसे क्षेत्रीय गौरव (Bihari Pride) से जोड़कर मामले को भावनात्मक बना दिया है।

केरल मॉडल बनाम बिहार मॉडल: छिड़ी नई बहस

तेजस्वी के इस बयान ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

  1. केरल मॉडल: उच्च साक्षरता, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और प्रवासी भारतीयों से आने वाला धन।

  2. बिहार मॉडल: बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली) में सुधार, महिला सशक्तिकरण और कृषि आधारित विकास।

विपक्ष का आरोप है कि बिहार में उद्योग और रोजगार की कमी के कारण पलायन नहीं रुक रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का दावा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बिहार की विकास दर (Growth Rate) देश के कई बड़े राज्यों से बेहतर है।

चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश?

बिहार की राजनीति में इस तरह के बयान अक्सर चुनाव से पहले माहौल बनाने के लिए दिए जाते हैं। तेजस्वी यादव फिलहाल विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे हैं और वे युवाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, एनडीए उन्हें ‘बिहार विरोधी’ साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता।

आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, खासकर तब जब 6 अप्रैल को जदयू की बड़ी बैठक होने वाली है और 10 अप्रैल को नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेंगे। बिहार की जनता अब इन बयानों को विकास के चश्मे से देखती है या राजनीति के, इसका पता भविष्य के चुनावों में चलेगा।

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