BNT Desk: बिहार की राजनीति में आज का दिन न केवल संवैधानिक बदलावों के लिए, बल्कि गहरे भावनात्मक पलों के लिए भी याद किया जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद जदयू खेमे में उदासी का माहौल है। इसी बीच नीतीश कुमार के सबसे करीबी सिपहसालारों में से एक, भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने नेता के जाने के गम में बच्चों की तरह फूट-फूटकर रोते नजर आ रहे हैं।
यह वीडियो उस गहरे जुड़ाव को बयां कर रहा है जो नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में अपने सहयोगियों और मंत्रियों के साथ बनाया है।
“नीतीश जैसा नेता न मिला है, न मिलेगा”: अशोक चौधरी
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अशोक चौधरी अपने समर्थकों के बीच बैठे हैं और सुबक-सुबक कर रो रहे हैं। वे इतने भावुक हैं कि उनके शब्द भी साफ नहीं निकल पा रहे। इससे पहले विधान परिषद के भीतर भी अशोक चौधरी ने एक बेहद भावुक भाषण दिया था।
उन्होंने भारी मन से कहा:
“नीतीश कुमार जी ने निस्वार्थ भाव से केवल बिहार की जनता और राज्य के विकास के लिए काम किया है। वे एक ऐसे विरले नेता हैं जिन्होंने सत्ता को कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया। बिहार को ऐसा नेता न पहले कभी मिला था और न ही भविष्य में कभी मिलेगा।”
अशोक चौधरी ने आगे कहा कि नीतीश कुमार का जाना केवल एक पद का खाली होना नहीं है, बल्कि एक अभिभावक (Guardian) का साया उठने जैसा है।
सदन में याद आएगी ‘अभिभावक’ वाली डांट
अशोक चौधरी ने विधान परिषद में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि नीतीश कुमार का मंत्रियों को डांटना, उन्हें बारीकियां समझाना और हर कदम पर उनका संरक्षण करना—यह सब अब इतिहास का हिस्सा बन जाएगा।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा:
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सकारात्मक व्यवहार: नीतीश जी का व्यवहार एक छोटे कर्मचारी से लेकर कैबिनेट मंत्री तक, हर किसी के प्रति हमेशा सकारात्मक और उत्साहवर्धक रहा।
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अविस्मरणीय संरक्षण: “उनका हमें टोकना और काम के प्रति सजग करना हमें बेहतर बनाने के लिए था। सदन की कार्यवाही में अब उनकी कमी हर पल महसूस होगी।”
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘आंसुओं’ वाला वीडियो
अशोक चौधरी का रोते हुए वीडियो सामने आने के बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जहां विपक्षी नेता इसे ‘राजनीतिक ड्रामा’ करार दे रहे हैं, वहीं जदयू कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह एक कार्यकर्ता का अपने नेता के प्रति सच्चा प्रेम और सम्मान है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने उनके कई करीबियों को झकझोर कर रख दिया है। अशोक चौधरी के आंसुओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की सत्ता में नीतीश कुमार का कद महज एक मुख्यमंत्री का नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक का था।
एक युग का भावनात्मक अंत
नीतीश कुमार का विधान परिषद छोड़ना और केंद्र की राजनीति की ओर कदम बढ़ाना बिहार एनडीए के लिए एक टर्निंग पॉइंट है। अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेता का इस तरह सार्वजनिक रूप से भावुक होना यह दर्शाता है कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में केवल सड़कें और पुल ही नहीं बनाए, बल्कि एक ऐसी टीम भी तैयार की जो उनके प्रति व्यक्तिगत रूप से समर्पित है।
अब देखना यह है कि नीतीश कुमार के बिना बिहार की कैबिनेट और जदयू का आंतरिक तालमेल किस तरह आगे बढ़ता है।