BNT Desk: बिहार की सत्ता के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार की दिल्ली रवानगी और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की पूरी रूपरेखा तैयार हो चुकी है। इस बदलाव की शुरुआत 30 मार्च से होने जा रही है, जो बिहार की राजनीति में एक नए युग का संकेत है।
30 मार्च: विधान परिषद से विदाई की पहली तारीख
नीतीश कुमार वर्तमान में बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं। हाल ही में हुए चुनावों में वे निर्विरोध राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ दो सदनों (राज्य विधानमंडल और संसद) का सदस्य नहीं रह सकता।
नियमों के मुताबिक, राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के 14 दिनों के भीतर उन्हें अपनी एक सदस्यता छोड़नी अनिवार्य है। सूत्रों का कहना है कि इसी संवैधानिक विवशता के तहत नीतीश कुमार 30 मार्च को अपनी विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। यह कदम इस बात की पुष्टि करेगा कि वे अब केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
‘समृद्धि यात्रा’ के बाद आएगा सियासी तूफान
नीतीश कुमार वर्तमान में अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के माध्यम से बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। इस यात्रा के जरिए वे राज्य में हुए विकास कार्यों का लेखा-जोखा जनता के सामने रख रहे हैं और कई नई योजनाओं का शिलान्यास भी कर रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा का समापन पटना में एक बड़ी रैली या सभा के साथ होगा। यात्रा के खत्म होते ही बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। माना जा रहा है कि अपनी इस अंतिम राज्यव्यापी यात्रा के जरिए नीतीश कुमार जनता के बीच अपनी ‘विकास पुरुष’ की छवि को और पुख्ता कर विदा लेना चाहते हैं।
12 अप्रैल का शपथ ग्रहण और इस्तीफे की अटकलें
नीतीश कुमार के भविष्य का कैलेंडर लगभग तय माना जा रहा है:
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12 अप्रैल: सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार इसी दिन राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं।
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13-14 अप्रैल: शपथ ग्रहण के बाद उनके पटना लौटने की संभावना है। चर्चा है कि पटना वापसी के तुरंत बाद वे राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय या जदयू (JDU) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन एनडीए (NDA) के भीतर चल रही हलचल इस ओर साफ इशारा कर रही है।
क्या सांसद बनकर भी मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं नीतीश?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पहलू भी चर्चा में है। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो राज्य विधायिका का सदस्य नहीं है, वह भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री या मंत्री पद पर बना रह सकता है।
इसका अर्थ यह है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बन भी जाते हैं और विधान परिषद छोड़ देते हैं, तब भी वे तकनीकी रूप से अगले 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर रह सकते हैं। लेकिन राजनीतिक शुचिता और एनडीए के भीतर नए नेतृत्व को जगह देने की रणनीति के तहत यह माना जा रहा है कि वे जल्द ही पद त्याग देंगे।
NDA में मंथन: अगला मुख्यमंत्री कौन?
नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबरों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार की कमान किसके हाथ में होगी? भाजपा और जदयू के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है। चर्चा है कि बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलने के साथ-साथ मंत्रिमंडल में भी बड़ा फेरबदल हो सकता है।
यह बदलाव न केवल बिहार के लिए बल्कि 2029 के आम चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी एनडीए के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री से विपक्ष के खिलाफ एनडीए की रणनीति को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।