BNT Desk: बिहार की सियासत में पिछले दो दशकों से सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार अब अपनी नई पारी की शुरुआत करने के लिए तैयार हैं। गुरुवार को अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ को विराम देने के साथ ही मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका अगला पड़ाव देश की राजधानी दिल्ली है। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब बिहार में सत्ता हस्तांतरण (Power Transfer) की प्रक्रिया तेज हो गई है।
आने वाले कुछ दिन बिहार के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं, क्योंकि सूबे को नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है।
5 दिनों के भीतर इस्तीफा और कानूनी बाध्यता
नीतीश कुमार वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। नियमानुसार, राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने से पहले उन्हें राज्य विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी होगी।
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इस्तीफे की समयसीमा: अगले 5 दिनों के भीतर नीतीश कुमार विधान परिषद से अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
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शपथ ग्रहण: उन्हें 10 अप्रैल तक राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेनी है। इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार ‘कार्यवाहक मुख्यमंत्री’ के तौर पर अगली व्यवस्था होने तक कामकाज देखते रहेंगे।
क्या बेटे निशांत कुमार संभालेंगे कमान?
सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर हो रही है। अटकलें तेज हैं कि क्या निशांत कुमार को नई सरकार में उप-मुख्यमंत्री या कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी? अगले 4 से 5 दिनों के भीतर एनडीए और जेडीयू की बैठकों में इस सस्पेंस से पर्दा उठ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ होगा।
बैठकों का दौर: जेडीयू और एनडीए की अगली रणनीति
शुक्रवार को रामनवमी के आयोजनों में शामिल होने के बाद, शनिवार से मुख्यमंत्री बैठकों के मैराथन दौर में शामिल होंगे:
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जेडीयू प्रदेश इकाई की बैठक: मुख्यमंत्री आवास या पार्टी कार्यालय में पदाधिकारियों के साथ संगठन पर चर्चा होगी।
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कोर कमेटी की बैठक: नई सरकार के स्वरूप, मंत्रियों के नाम और गठबंधन की शर्तों पर मंथन होगा।
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विधानसभा अध्यक्ष पर दावा: चर्चा है कि इस बार जेडीयू ‘विधानसभा अध्यक्ष’ (Speaker) के पद पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रही है।
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एनडीए की संयुक्त बैठक: अंत में एनडीए के सभी घटक दल मिलकर तय करेंगे कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
14 अप्रैल के बाद ही होगा नई सरकार का गठन
बिहार की परंपराओं और ‘शुभ मुहूर्त’ को देखते हुए माना जा रहा है कि नई सरकार का गठन 14 अप्रैल के बाद ही होगा।
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खरमास का असर: वर्तमान में ‘खरमास’ चल रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के बाद ही नया मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण कर सकता है।
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तब तक नीतीश कुमार ही प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करेंगे ताकि राज्य में कोई संवैधानिक शून्यता न आए।
‘समृद्धि यात्रा’ का संदेश और दिल्ली का सफर
मुख्यमंत्री ने अपनी यात्रा का समापन नालंदा और पटना में किया। इस यात्रा को उनके विदाई दौरे (Farewell Tour) के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने जमीनी स्तर पर विकास कार्यों का जायजा लेकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि उनके जाने के बाद भी ‘सुशासन’ की गाड़ी पटरी पर बनी रहे। अब सोमवार से वह पूरी तरह से दिल्ली जाने की तैयारियों और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
एक नए अध्याय की शुरुआत
बिहार की राजनीति आज उस चौराहे पर खड़ी है जहाँ से एक नया रास्ता निकलता है। नीतीश कुमार का दिल्ली जाना न केवल जेडीयू के लिए, बल्कि बिहार एनडीए के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। क्या नया चेहरा बिहार की उम्मीदों पर खरा उतरेगा? क्या निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री होगी? इन सभी सवालों के जवाब खरमास खत्म होते ही सामने आ जाएंगे।