BNT Desk: बिहार में शराबबंदी कानून को लागू करने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वही अब आपस में टकराते नजर आ रहे हैं। कटिहार स्टेशन पर शराब की खेप पकड़ने के लिए गई उत्पाद विभाग (Excise Department) की टीम और रेल जीआरपी (GRP) के बीच झड़प का मामला सामने आया है।
इस घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि जमीनी स्तर पर कानून लागू करने में कितनी चुनौतियां हैं।
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत एक गुप्त सूचना से हुई। उत्पाद विभाग को जानकारी मिली थी कि “हाटे बाजारे एक्सप्रेस” ट्रेन से कटिहार स्टेशन पर शराब की खेप उतारी जानी है।
इस सूचना के आधार पर उत्पाद विभाग की टीम तुरंत रेड के लिए स्टेशन पहुंची। टीम में कुछ अधिकारी वर्दी में थे, जबकि कुछ सिविल ड्रेस में भी मौजूद थे।
लेकिन इसी दौरान जीआरपी को इस रेड की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। जब जीआरपी ने संदिग्ध गतिविधि देखी, तो पूछताछ के दौरान दोनों पक्षों के बीच गलतफहमी पैदा हो गई, जो आगे चलकर झड़प में बदल गई।
झड़प की वजह: कम्युनिकेशन गैप
इस पूरे मामले की जड़ में एक बड़ा कारण सामने आया है—कम्युनिकेशन की कमी।
उत्पाद विभाग ने बिना जीआरपी को सूचना दिए छापेमारी शुरू कर दी, जबकि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस या जीआरपी को जानकारी देना जरूरी होता है।
इसी कमी के कारण जीआरपी को शक हुआ और उन्होंने कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे स्थिति बिगड़ गई।
उत्पाद अधीक्षक का बयान
कटिहार के उत्पाद अधीक्षक सुभाष प्रसाद सिंह ने बताया कि विभाग को हर समय ऐसी सूचनाएं मिलती रहती हैं और उसी आधार पर कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने कहा कि टीम के कुछ सदस्य सिविल ड्रेस में थे, जिससे पहचान में समस्या हुई। चेकिंग के दौरान जीआरपी के साथ गलतफहमी हुई और झड़प हो गई।
उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना में एक व्यक्ति को हल्की चोट आई है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे से सभी अधिकारी वर्दी में और पहचान पत्र के साथ जाएंगे तथा बेहतर समन्वय रखा जाएगा।
रेल डीएसपी का पक्ष
रेल डीएसपी ए.के. अकेला ने भी इस घटना को गलतफहमी का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि जीआरपी को इस रेड की कोई जानकारी नहीं दी गई थी—न थाना स्तर पर, न डीएसपी स्तर पर और न ही एसआरपी को।
उन्होंने बताया कि जब सिविल ड्रेस में मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, तो वे आक्रामक हो गए, जिससे स्थिति बिगड़ गई। बाद में उन्होंने अपना पहचान पत्र दिखाया, तब जाकर मामला स्पष्ट हुआ।
डीएसपी ने कहा कि इस पूरे मामले की संयुक्त जांच की जा रही है और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शराबबंदी पर उठते सवाल
इस घटना ने बिहार में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कटिहार जैसे महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन, जो पश्चिम बंगाल की सीमा के करीब है, वहां अगर शराब की खेप उतरने की सूचना मिलती है और उसे पकड़ने के बजाय विभाग आपस में ही भिड़ जाते हैं, तो यह सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है।
यह सवाल उठना लाजमी है कि जब जिम्मेदार एजेंसियां ही आपसी तालमेल नहीं बना पा रही हैं, तो शराबबंदी को प्रभावी तरीके से कैसे लागू किया जाएगा?
आगे की रणनीति: सुधार की उम्मीद
दोनों विभागों ने इस घटना के बाद यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
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रेड से पहले संबंधित विभागों को सूचना दी जाएगी
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सभी अधिकारी वर्दी और पहचान पत्र के साथ रहेंगे
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संयुक्त कार्रवाई पर जोर दिया जाएगा
यह कदम जरूरी हैं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।