BNT Desk: बिहार विधानसभा चुनाव 2026 की सियासी बिसात बिछ चुकी है और बयानों के तीर सीधे आलाकमान पर छोड़े जा रहे हैं। इसी कड़ी में जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बिहार के उपमुख्यमंत्री व मुख्यमंत्री पद के चेहरे सम्राट चौधरी पर अब तक का सबसे बड़ा सियासी हमला बोला है। प्रशांत किशोर ने पटना के हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को केंद्र में रखकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती दे डाली है। पीके ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस बार बिहार की जनता दिल्ली के नेताओं का भ्रम तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है।
“बांकीपुर की हार से खुलेगी पीएम मोदी और अमित शाह की आंखें”
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए एक बेहद तीखा और रणनीतिक बयान दिया है। उन्होंने पटना की पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर सीट का जिक्र करते हुए कहा:
“अगर इस बार बांकीपुर की समझदार जनता भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनाव हरा देती है, तो इसका सीधा और साफ संदेश दिल्ली तक जाएगा। इस एक हार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को यह अच्छी तरह समझ आ जाएगा कि बिहार की जनता उनके उस फैसले से कतई सहमत नहीं है, जिसके तहत सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने या आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।”
प्रशांत किशोर का मानना है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जमीनी हकीकत से दूर होकर बिहार पर अपने फैसले थोप रहा है, और इसका करारा जवाब राज्य की जनता चुनाव के जरिए देने वाली है।
बांकीपुर सीट को ही प्रशांत किशोर ने क्यों चुना? समझिए सियासी गणित
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रशांत किशोर ने बेहद सोच-समझकर बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का नाम लिया है। इसके पीछे कई बड़े राजनीतिक कारण हैं:
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भाजपा का सबसे मजबूत किला: पटना का बांकीपुर इलाका दशकों से भाजपा का अभेद्य किला माना जाता रहा है। यहाँ शहरी और प्रबुद्ध मतदाताओं की संख्या अधिक है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा के कोर वोटर रहे हैं।
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प्रतिष्ठा की लड़ाई: पीके जानते हैं कि अगर भाजपा को उसके सबसे मजबूत गढ़ में घेरा जाए, तो पूरी राज्य इकाई मनोवैज्ञानिक दबाव में आ जाएगी।
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जनता के मूड का लिटमस टेस्ट: प्रशांत किशोर का मानना है कि यदि बांकीपुर जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली सीट पर जनता भाजपा के खिलाफ वोट करती है, तो यह साबित हो जाएगा कि पूरे बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व और एनडीए सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) चल रही है।
सम्राट चौधरी के नेतृत्व और ‘चेहरे’ पर उठाए गंभीर सवाल
प्रशांत किशोर अपनी जन सुराज यात्रा और बैठकों के दौरान लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि मौजूदा एनडीए सरकार बिहार के विकास में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को एक ऐसा नेतृत्व चाहिए जो बिहार की बुनियादी समस्याओं जैसे—शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन पर बात करे।
पीके ने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ पगड़ी बांधने और दिल्ली के आशीर्वाद से कोई जननेता नहीं बन जाता। जनता के बीच पैठ बनाने के लिए काम करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने बिहार की कमान जिनके हाथों में सौंपी है, उन्हें राज्य की जनता ने नेता के तौर पर कभी स्वीकार ही नहीं किया। दिल्ली में बैठे नेताओं को लगता है कि वे जो तय करेंगे, बिहार की जनता चुपचाप मान लेगी, लेकिन इस बार जनता इस भ्रम को पूरी तरह तोड़ देगी।
जन सुराज की एंट्री से बदला बिहार का चुनावी समीकरण
साल 2026 का बिहार चुनाव इस मायने में बेहद दिलचस्प हो चुका है क्योंकि अब तक मुकाबला केवल एनडीए (NDA) और महागठबंधन (RJD-Cong) के बीच होता था। लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने तीसरे विकल्प के रूप में एंट्री मारकर दोनों स्थापित गुटों की नींद उड़ा दी है।
प्रशांत किशोर लगातार बिहार के युवाओं, महिलाओं और प्रबुद्ध वर्ग को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। बांकीपुर जैसी शहरी सीट पर उनका यह बयान सीधे तौर पर मध्यवर्गीय और युवा मतदाताओं को प्रभावित करने की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश है। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर के इस सीधे हमले पर भाजपा और खुद सम्राट चौधरी की तरफ से क्या पलटवार आता है, लेकिन एक बात साफ है कि पीके के इस बयान ने बिहार की चुनावी गर्मी को और ज्यादा बढ़ा दिया है।