BNT Desk: बिहार के नवादा जिले से इंसानियत और कानून को शर्मसार कर देने वाला एक खौफनाक मामला सामने आया है। यहां भीड़ तंत्र ने कानून को पूरी तरह अपने हाथ में लेते हुए एक युवक के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। चोरी का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने न सिर्फ युवक की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि उसे ऐसी अमानवीय सजा दी जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। पुलिस अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कह रही है।
घर में सोए युवक को जबरन उठा ले गई 30 लोगों की उग्र भीड़
यह पूरी घटना नवादा जिले के पकरीबरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुदनपुर गांव की है। पीड़ित युवक की पहचान मोहम्मद नईम के पुत्र मोहम्मद शाहनवाज के रूप में हुई है। शाहनवाज ने इस पूरी बर्बरता के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
शाहनवाज ने पुलिस को दिए अपने आवेदन में बताया कि घटना की शाम करीब सात बजे वह अपने घर में आराम से सोया हुआ था। इसी दौरान गांव के ही करीब 30 लोग लाठी-डंडों के साथ अचानक उसके घर में घुस आए। उग्र भीड़ ने उसे बिस्तर से जबरन घसीटते हुए पकड़ा और खींचकर गांव के ही मरहूम इजहार के घर ले गए।
आरोप कबूल कराने के लिए दी तालिबानी सजा, पूरे गांव में घुमाया
मरहूम इजहार के घर पर जुटकर ग्रामीणों ने शाहनवाज पर आरोप लगाया कि वह चोरी की नीयत से घर में दाखिल हुआ था। जब शाहनवाज ने इस झूठे आरोप को स्वीकार करने से मना किया, तो भीड़ हिंसक हो उठी।
इसके बाद कानून को ताक पर रखकर युवक को वो सजा दी गई जो अक्सर कट्टरपंथी इलाकों में देखने को मिलती है:
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सिर मुंडवाया: भीड़ ने सबसे पहले जबरन युवक का सिर मुंडा (गंजा) कर दिया।
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चेहरे पर पोती कालिख: अपमानित करने के लिए उसके पूरे चेहरे और सिर पर कालिख मल दी गई।
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थूक चटवाया: इंसानियत को सबसे ज्यादा ठेस तब पहुंची जब युवक को जमीन पर थूक कर उसे चाटने के लिए मजबूर किया गया।
इस भयानक प्रताड़ना के बाद भी भीड़ का दिल नहीं पसीजा। दबंगों ने युवक को इसी हालत में पूरे गांव की गलियों में घुमाया और बीच रास्ते में जो भी मिला, उसने युवक पर हाथ साफ किया।
पुलिस की कार्रवाई: 14 नामजद समेत 34 लोगों पर एफआईआर दर्ज
इस बर्बरता का शिकार होने के बाद पीड़ित शाहनवाज किसी तरह थाने पहुंचा और आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत ऐक्शन लिया। पकरीबरावां के थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर रंजन चौधरी ने बताया कि पीड़ित के लिखित आवेदन के आधार पर थाना कांड संख्या 242/26 दर्ज कर ली गई है।
युवक द्वारा दिए गए आवेदन में गांव के 14 लोगों को नामजद (मुख्य आरोपी) बनाया गया है, जबकि 20 अन्य अज्ञात लोगों को भी इस क्रूरता में शामिल होने के लिए अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस ने साफ किया है कि इस घटना के वीडियो और गवाहों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
दो बाल अपराधी पकड़े गए
थानाध्यक्ष रंजन चौधरी ने बताया कि मामले की तफ्तीश शुरू करते हुए पुलिस ने इस कांड में शामिल दो बाल अपराधियों (नाबालिगों) को निरुद्ध (हिरासत में) किया है। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस गांव और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही है।
‘कानून हाथ में लेने वालों की जगह जेल है’ — पुलिस की सख्त चेतावनी
इस घटना के बाद सुदनपुर गांव में तनाव का माहौल है। पुलिस ने ग्रामीणों और आम जनता को सख्त लहजे में हिदायत दी है। इंस्पेक्टर रंजन चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में कानून का शासन है और किसी भी नागरिक या भीड़ को यह अधिकार नहीं है कि वह खुद जज बनकर किसी को सजा दे।
“अगर किसी व्यक्ति ने कोई अपराध या चोरी की भी है, तो ग्रामीणों का कर्तव्य है कि वे उसे पकड़कर स्थानीय पुलिस के हवाले करें या कानून का सहारा लें। कानून अपने हाथ में लेकर तालिबानी सजा देने वाले किसी भी बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे अपराधियों की सही जगह सिर्फ जेल है।”
— रंजन चौधरी, थानाध्यक्ष (पकरीबरावां)
बिहार में इस तरह की ‘मॉब लिंचिंग’ और ऑन-द-स्पॉट इंसाफ (भीड़ द्वारा न्याय) के बढ़ते मामले कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना यह है कि नवादा पुलिस इस मामले के मुख्य दोषियों को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचा पाती है।