पटना: MLC टिकट न मिलने से आहत शिवचंद्र राम का इस्तीफा RJD ने किया खारिज, बताया ‘पुराना सिपाही’

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BNT Desk: बिहार की सियासत में हर दिन नए रंग देखने को मिल रहे हैं। RJD के भीतर सोमवार से शुरू हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा आखिरकार मंगलवार को एक बड़े मोड़ पर आकर थम गया। MLC चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम का इस्तीफा राष्ट्रीय जनता दल ने नामंजूर कर दिया है। राजद नेतृत्व ने उन्हें पार्टी का ‘पुराना सिपाही’ और सामाजिक न्याय का मजबूत स्तंभ बताते हुए साफ कर दिया है कि वे कहीं नहीं जा रहे हैं और मजबूती से पार्टी में ही बने रहेंगे।

टिकट न मिलने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूट-फूटकर रोए थे शिवचंद्र राम

इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत सोमवार को हुई थी। बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए जब राजद ने अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की, तो उसमें शिवचंद्र राम का नाम गायब था। इस बात से आहत होकर उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। मीडिया के कैमरों के सामने अपनी उपेक्षा और मान-सम्मान न मिलने की बात कहते हुए शिवचंद्र राम भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे थे। उन्होंने बेहद दुखी मन से राजद के सभी सांगठनिक पदों से अपना इस्तीफा सौंपने का एलान कर दिया था।

इस्तीफे के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में होना पड़ा भर्ती

सोमवार को हुए इस बेहद नाटकीय घटनाक्रम और मानसिक तनाव के कारण देर शाम शिवचंद्र राम की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें घबराहट और सीने में दर्द की शिकायत के बाद तुरंत पटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज किया। मंगलवार सुबह तक इलाज के बाद उनकी स्थिति में काफी सुधार देखा गया। अस्पताल के बेड से आई उनकी तस्वीरों ने राजद खेमे में भी खलबली मचा दी थी।

राजद के सीनियर नेताओं ने की मान-मनौव्वल, संभाला मोर्चा

शिवचंद्र राम के बागी तेवर और अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही राजद नेतृत्व तुरंत डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) में जुट गया। राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने बताया कि इस्तीफा देने की घोषणा के बाद पार्टी के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शिवचंद्र राम से मुलाकात की। नेताओं ने उनसे लंबी बातचीत की, उन्हें समझाया-बुझाया और पार्टी में उनके योगदान की याद दिलाई। नेताओं की इस मान-मनौव्वल के बाद आखिरकार पार्टी ने आधिकारिक तौर पर उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया।

“वे सामाजिक न्याय के प्रति आस्था रखने वाले पुराने सिपाही हैं”

राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “शिवचंद्र राम जी ने कल भावुक होकर और कुछ तात्कालिक प्रतिक्रियाएं देते हुए इस्तीफा दे दिया था। लेकिन वे हमारे दल के बेहद पुराने और समर्पित सिपाही हैं। सामाजिक न्याय और लालू प्रसाद यादव जी की विचारधारा के प्रति उनकी अटूट आस्था है। पार्टी में उनका पूरा सम्मान है और वे आरजेडी परिवार का हिस्सा बने रहेंगे।”

डॉ. सुनील सिंह के नामांकन पर लालू परिवार में ही छिड़ा था ‘गृहयुद्ध’

गौरतलब है कि सोमवार को इस विवाद की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब राजद उम्मीदवार के रूप में डॉ. सुनील कुमार सिंह ने अपना नामांकन (Nomination) दाखिल किया। डॉ. सुनील सिंह को टिकट दिए जाने के बाद लालू परिवार के भीतर ही कलह शुरू हो गई। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर डॉ. सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने पर बेहद तीखा हमला बोला और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

वहीं दूसरी तरफ, शिवचंद्र राम के इस्तीफे के बाद लालू के बड़े लाल तेज प्रताप यादव ने भी इस मामले में एंट्री मारी थी। तेज प्रताप ने शिवचंद्र राम की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए यहां तक कह दिया था कि उनकी खुद की पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ शिवचंद्र राम के साथ खड़ी है।

जीतन राम मांझी ने RJD पर साधा निशाना

राजद के इस अंदरूनी कलह और शिवचंद्र राम के आंसुओं को देखकर विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी भी इस पूरे विवाद में कूद पड़े। मांझी ने शिवचंद्र राम की दुर्दशा का हवाला देते हुए राष्ट्रीय जनता दल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद में दलितों और पुराने कार्यकर्ताओं का कोई सम्मान नहीं है और वहां केवल परिवारवाद को बढ़ावा दिया जाता है।

बहरहाल, चौबीस घंटे चले इस जबरदस्त सियासी ड्रामे के बाद फिलहाल शिवचंद्र राम का इस्तीफा नामंजूर कर राजद ने अपनी साख बचाने की कोशिश की है, लेकिन पार्टी के भीतर सुलग रही चिंगारी अभी पूरी तरह शांत हुई है या नहीं, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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