BNT Desk: बिहार के सबसे चर्चित और बड़े टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। बुधवार को तीन रसूखदार अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी के निशाने पर बिहार कैडर के सीनियर आईएएस (IAS) अधिकारी संजीव हंस आ गए हैं। टेंडर घोटाले के सिंडिकेट किंग ‘रिशुश्री’ से जुड़े इस मामले में संजीव हंस की मुश्किलें अब बेहद बढ़ती नजर आ रही हैं।
बुधवार को SVU की विशेष टीमों ने आईएएस संजीव हंस की गिरफ्तारी और पूछताछ के लिए कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, लेकिन वे कहीं नहीं मिले। इसके बाद से ही बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या गिरफ्तारी के डर से सीनियर आईएएस अधिकारी अंडरग्राउंड या फरार हो गए हैं?
ऊर्जा स्टेडियम स्थित आवास और सचिवालय दफ्तर में दबिश, खाली हाथ लौटी टीम
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम बुधवार को सबसे पहले पटना में ऊर्जा स्टेडियम के पास स्थित संजीव हंस के आलीशान सरकारी आवास पर पहुंची। वहां जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो जांच टीम सीधे पुराने सचिवालय स्थित राजस्व परिषद (Board of Revenue) के उनके कार्यालय पहुंच गई। लेकिन संजीव हंस वहां भी मौजूद नहीं थे।
सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि संजीव हंस मंगलवार को अपने दफ्तर आए थे और उन्होंने कामकाज भी निपटाया था, लेकिन बुधवार सुबह से ही उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है। हालांकि, उनके फरार होने को लेकर अभी तक पुलिस या सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
रिशुश्री घोटाले में अब तक 5 गिरफ्तारियां, संजीव हंस बन सकते हैं ‘चौथे बड़े अफसर’
कबाड़ ठेकेदार से अरबों का टेंडर सिंडिकेट चलाने वाले मुख्य आरोपी रिशुश्री से जुड़े इस महा-घोटाले में अब तक कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सबसे पहले मुख्य सरगना रिशुश्री को दबोचा गया था, जिसके बाद उसके बेहद करीबी सहयोगी संतोष को भी हिरासत में लिया गया।
इसके बाद बुधवार को इस केस ने तब बड़ा मोड़ लिया जब तीन सीनियर अफसरों—पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास, पूर्व संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी और बुडको के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। अब अगर संजीव हंस पुलिस की गिरफ्त में आते हैं, तो वे इस टेंडर घोटाले में गिरफ्तार होने वाले चौथे सबसे बड़े सरकारी अधिकारी होंगे। SVU का साफ कहना है कि भ्रष्टाचार के इस संगठित नेटवर्क में जिस किसी के भी खिलाफ पुख्ता सबूत मिलेंगे, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
विवादों से पुराना नाता: CBI ने दर्ज किया था 1 करोड़ की रिश्वत का केस
यह कोई पहली बार नहीं है जब आईएएस संजीव हंस का नाम किसी बड़े विवाद या घोटाले में आया है। इससे पहले भी उन पर भ्रष्टाचार और गंभीर आपराधिक मामलों के आरोप लगते रहे हैं।
कुछ समय पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने संजीव हंस के खिलाफ पद का दुरुपयोग कर 1 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का एक संगीन मामला दर्ज किया था। यह मामला उस वक्त का है जब संजीव हंस केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री के निजी सचिव (Private Secretary) के रूप में तैनात थे।
हवाला नेटवर्क के जरिए आई थी रकम
CBI के आरोपों के मुताबिक, संजीव हंस ने एक बड़ी बिल्डर कंपनी को फायदा पहुंचाने और उसके पक्ष में फैसला दिलवाने के एवज में एक करोड़ रुपये की घूस ली थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि इस रिश्वत की रकम को छुपाने के लिए कुख्यात ‘हवाला नेटवर्क’ का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में भी उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया था।
गैंगरेप का गंभीर आरोप और ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच
भ्रष्टाचार के अलावा संजीव हंस एक बेहद चर्चित और सनसनीखेज आपराधिक मामले को लेकर भी जेल जा चुके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक महिला वकील ने संजीव हंस और बिहार के पूर्व विधायक गुलाब यादव पर गैंगरेप, जान से मारने की धमकी देने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे।
महिला की शिकायत पर इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी और बिहार पुलिस ने संजीव हंस को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, बाद में कानूनी लड़ाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले को रद्द कर दिया, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिल गई थी।
ED की जांच और निलंबन से वापसी
इसी गैंगरेप मामले की जांच के दौरान जब बड़े पैमाने पर अवैध संपत्ति के लेन-देन की बात सामने आई, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संजीव हंस के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इस मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था, जिसके बाद अक्टूबर 2025 में पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी।
जमानत मिलने के ठीक बाद दिसंबर 2025 में बिहार सरकार ने उनका निलंबन (Suspension) समाप्त कर दिया और उन्हें राजस्व परिषद में नई जिम्मेदारी सौंप दी थी। लेकिन अब, साल 2026 के इस नए टेंडर घोटाले ने एक बार फिर उनकी पूरी कुंडली खोल कर रख दी है।
प्रशासनिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल: कहां हैं संजीव हंस?
वर्तमान में बिहार की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या SVU की टीम आईएएस संजीव हंस को ढूंढ पाएगी? क्या कबाड़ से किंग बने रिशुश्री के टेंडर मैनेजमेंट सिंडिकेट में संजीव हंस की भी कोई सीधी भूमिका थी?
ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच पहले से ही चल रही है और अब SVU की इस नई छापेमारी ने संजीव हंस की चौतरफा घेराबंदी कर दी है। आने वाले एक-दो दिन बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए बेहद अहम होने वाले हैं, क्योंकि यदि कोई आईएएस अधिकारी इस तरह गिरफ्तार होता है, तो यह नीतीश सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा।