पटना: बिहटा में कारगिल वीर आवास फिर विवादों में, पूर्व सैनिकों से करोड़ों की ठगी का आरोप

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BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना के बिहटा में पूर्व सैनिकों को जमीन देने के नाम पर कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। बिहटा के अम्हारा थाना क्षेत्र के बिलाप गांव स्थित कारगिल वीर आवास एक बार फिर विवादों में है। पूर्व सैनिक राघवेंद्र कुमार ने थाने में आवेदन देकर जमीन के नाम पर धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ‘सैनिक वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन इंडिया लिमिटेड’ के नाम पर करीब 100 पूर्व सैनिकों को जमीन देने का भरोसा दिलाया गया था। संस्था से जुड़े रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश राणा और अधिकृत रिटायर्ड कैप्टन अर्जुन कुमार सिंह पर भी जमीन देने के नाम पर पैसे लेने और बाद में कब्जा नहीं देने का आरोप लगाया गया है।

 

6.38 लाख रुपये देकर कराई जमीन की रजिस्ट्री

पूर्व सैनिक राघवेंद्र कुमार के मुताबिक, उन्हें वर्ष 2013 में बिहटा के बिलाप गांव में स्थित कारगिल वीर आवास के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने संस्था से जुड़े रिटायर्ड कर्नल राकेश राणा और अर्जुन कुमार सिंह से संपर्क किया। राघवेंद्र कुमार का कहना है कि उन्होंने 1200 वर्गफुट जमीन के लिए करीब 6.38 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके बाद जमीन को लेकर बाकायदा एग्रीमेंट कराया गया और वर्ष 2016 में उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री भी कराई। लेकिन रजिस्ट्री के कई साल बाद भी उन्हें अपने प्लॉट पर कब्जा नहीं मिला। पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की तो उन्हें अलग-अलग कारण बताकर मामले को टाल दिया गया। कभी स्थानीय किसानों के विवाद का हवाला दिया गया तो कभी अन्य वजह बताकर उन्हें इंतजार करने के लिए कहा गया।

 

100 से अधिक पूर्व सैनिकों से जुड़ा मामला

राघवेंद्र कुमार का आरोप है कि यह समस्या केवल उनके साथ नहीं हुई है। उनके मुताबिक, करीब 100 से अधिक पूर्व सैनिकों ने कारगिल वीर आवास में जमीन लेने के लिए एग्रीमेंट कराया था। कई लोगों ने इसके लिए लाखों रुपये का भुगतान भी किया, लेकिन अब तक उन्हें संबंधित प्लॉट का कब्जा नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि इस सोसाइटी के तहत करीब 32 बीघा जमीन का मामला जुड़ा हुआ है। पूर्व सैनिकों का आरोप है कि जमीन देने का भरोसा देकर उनसे रकम ली गई, लेकिन बाद में उन्हें कब्जा नहीं दिया गया। शिकायत के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कितने लोगों से रकम ली गई और इस पूरे मामले में कुल कितनी राशि का लेनदेन हुआ है।

 

कार्यालय बंद कर आरोपी हुए फरार

पूर्व सैनिकों ने जब मामले में कार्रवाई की कोशिश शुरू की तो उन्हें संस्था के दानापुर छावनी स्थित कार्यालय के बंद होने की जानकारी मिली। आरोप है कि मामला सामने आने के बाद कार्यालय में ताला लगा दिया गया और संस्था से जुड़े लोग वहां से चले गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले के दूसरे आरोपी अर्जुन कुमार सिंह से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। पीड़ितों का कहना है कि वह उनके फोन भी नहीं उठा रहा है। अब पुलिस आरोपियों के ठिकानों और संस्था से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाने में लगी है। साथ ही बैंक खातों और जमीन से संबंधित कागजात की भी जांच की जा सकती है।

 

राकेश राणा के पुराने मामले की भी चर्चा

पीड़ित पूर्व सैनिकों ने रिटायर्ड कर्नल राकेश राणा के पुराने रिकॉर्ड की जांच करने का भी दावा किया है। उनके अनुसार, राकेश राणा मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला है और उस पर पहले भी इसी तरह की धोखाधड़ी के आरोप लग चुके हैं। पीड़ितों का दावा है कि राकेश राणा ने ओडिशा में भी इसी तरह की संस्था बनाई थी, जहां सैनिकों से जमीन देने के नाम पर पैसे लेने का मामला सामने आया था। इस मामले में उसके जेल जाने की बात भी शिकायतकर्ताओं की ओर से कही गई है। हालांकि, इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

किसानों का भी जमीन को लेकर विवाद

कारगिल वीर आवास को लेकर सिर्फ पूर्व सैनिक ही नहीं, बल्कि स्थानीय किसान भी लंबे समय से विवाद का आरोप लगाते रहे हैं। बिलाप गांव के किसानों ने जमीन के मुआवजे और कब्जे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। किसानों का आरोप है कि संस्था की ओर से उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिया गया और उनकी सहमति के बिना जमीन पर कब्जा किया गया। जमीन से जुड़े इस विवाद के कारण पहले भी मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है।

 

पुलिस ने शुरू की जांच

दानापुर एसडीपीओ-2 अमरेंद्र कुमार झा ने बताया कि मामला फरवरी 2026 का है और पूर्व सैनिक राघवेंद्र कुमार की ओर से अम्हारा थाना में आवेदन दिया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, जमीन के दस्तावेजों, एग्रीमेंट, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और संस्था से संबंधित कागजात की जांच कर रही है। जांच के दौरान अन्य पूर्व सैनिकों से भी जानकारी ली जा सकती है। फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। पूर्व सैनिकों का आरोप है कि उन्हें जमीन का सपना दिखाकर लाखों रुपये लिए गए, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें अपने प्लॉट का कब्जा नहीं मिल सका। अब पीड़ितों को उम्मीद है कि जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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