पटना: चीनी की कीमतों में 40 फीसदी तक उछाल, सरकार 10 लाख टन रॉ शुगर करेगी आयात

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BNT Desk: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीते कुछ महीनों में चीनी के दाम में करीब 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ती कीमतों और आने वाले त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने करीब 10 लाख टन रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। इसके साथ ही बाजार में जमाखोरी रोकने के लिए चीनी के स्टॉक पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर नियंत्रण करना है। कमजोर मानसून और गन्ने के उत्पादन को लेकर बनी चिंता के बीच चीनी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, त्योहारी मौसम में खपत बढ़ने से बाजार में मांग और बढ़ सकती है।

 

चीनी के दाम में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी

चीनी की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार तेजी देखने को मिल रही है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब तीन महीने में चीनी का भाव लगभग 40 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान चीनी का दाम करीब 48 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 67 रुपये तक पहुंच गया। पटना के बाजार में भी चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है। इससे घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। खासकर मिठाई, चाय, बेकरी और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। बिहार में भी पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में चीनी की उपलब्धता है और अनावश्यक स्टॉकिंग या कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

 

10 लाख टन रॉ शुगर आयात का फैसला

बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर आयात करने की अनुमति दी है। करीब एक दशक बाद भारत में इतनी बड़ी मात्रा में कच्ची चीनी के आयात का फैसला लिया गया है। सरकार का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति को मजबूत करना और त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना है। आयात से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

 

एथेनॉल उत्पादन का भी असर

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा है। देश में गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो रहा है। इससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा पर असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 25 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में जाने की बात सामने आई है। एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति का उद्देश्य पेट्रोल में मिश्रण बढ़ाना और ईंधन आयात पर निर्भरता कम करना है, लेकिन इसके साथ खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों को लेकर भी बहस तेज हुई है।

सरकार ने स्टॉक लिमिट पर कसी नकेल

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक लिमिट को सख्त किया है। नए नियमों के तहत थोक विक्रेता अधिकतम 500 मीट्रिक टन, जबकि खुदरा विक्रेता 10 मीट्रिक टन तक चीनी का स्टॉक रख सकते हैं। यह व्यवस्था बाजार में अनावश्यक भंडारण रोकने और आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। सरकार ने बड़े खरीदारों और कारोबारियों के स्टॉक पर भी निगरानी बढ़ाई है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई कारोबारी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा कर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न करे।

 

बिहार में भी निगरानी बढ़ी

बिहार में चीनी के दाम तेजी से बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने भी सख्ती शुरू कर दी है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से बाजार की निगरानी के लिए विशेष टीमों को सक्रिय किया जा रहा है। सरकार ने कहा है कि पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध होने के बावजूद अगर कोई व्यापारी अनावश्यक स्टॉकिंग या कालाबाजारी करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पटना समेत प्रमुख बाजारों में कारोबारियों के स्टॉक की जांच की जा सकती है। सरकार का फोकस खासतौर पर उन कारोबारियों पर है, जिनके पास निर्धारित सीमा से ज्यादा चीनी का भंडारण पाया जाता है।

 

त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद

आने वाले महीनों में त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार का आयात और स्टॉक लिमिट संबंधी फैसला कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात और स्टॉक लिमिट की सख्ती के बाद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर कितना असर पड़ता है। अगर आपूर्ति बढ़ती है और जमाखोरी पर प्रभावी नियंत्रण रहता है तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

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