बिहार कैबिनेट के बड़े फैसले: सोलर, कृषि, सड़क, शिक्षा और रोजगार समेत कई योजनाओं को मिली मंजूरी

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बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का उद्देश्य राज्य में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, किसानों को प्रोत्साहन, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है। आइए जानते हैं कैबिनेट के प्रमुख फैसले।सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक सरकारी भवनों की छतों पर कुल 500 मेगावाट ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्लांट RESCO मॉडल के तहत लगाने और बिजली खरीद समझौते (PPA) को मंजूरी दे दी है।

कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत खरीफ, रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए 79.84 करोड़ रुपये की योजना को स्वीकृति दी गई है।डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसान रजिस्ट्री और डिजिटल फसल सर्वे के लिए 154 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे कृषि संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल बनाया जा सकेगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत खाद्यान्न और व्यावसायिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए 44.63 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति मिली हैमनरेगा के तहत गठित सोशल ऑडिट सोसायटी को विकसित भारत-जीविका मिशन के अंतर्गत अधिकृत करने का फैसला लिया गया है।मुजफ्फरपुर की बंद पड़ी मोतीपुर चीनी मिल की जमीन से जुड़े मामले में इंडियन पोटाश लिमिटेड को 63.39 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई है।राज्य में मत्स्य पालन के विकास के लिए बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BAIDCL) के गठन को स्वीकृति दी गई है।

दुग्ध उत्पादन को मजबूत करने के लिए कॉम्फेड के माध्यम से बल्क मिल्क कूलर, डेटा आधारित दुग्ध संग्रहण इकाइयों और दूध जांच मशीनों की स्थापना हेतु 28.44 करोड़ रुपये के राज्यांश को मंजूरी दी गई है।शहरी विकास के तहत ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विकास के लिए तकनीकी सहायता एजेंसी के चयन को स्वीकृति प्रदान की गई है।पटना, मुजफ्फरपुर, सोनपुर और गया में टाउन प्लानिंग योजना के तहत भूमि अधिग्रहण और भूमि क्रय के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है।राज्य में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) की डीपीआर और अन्य तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 31.59 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और पुनर्स्थापन के लिए 126.25 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना को अगले पांच वर्षों यानी 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का फैसला लिया गया है। इसके तहत वर्ष 2026-27 में 300 करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति भी दी गई है।उच्च शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य के 10 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों और बिहार इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में 76 नए एम.टेक शिक्षकों के पद सृजित करने को मंजूरी दी गई है।इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण के लिए एनआईटीटीटीआर (NITTTR) भोपाल को नामित किया गया है। इसके लिए 1.75 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी गई है।

निर्वाचन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य के 243 निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों को प्रतिवर्ष 30 हजार रुपये मानदेय देने का निर्णय लिया गया है।इसके साथ ही 1,351 सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों को प्रतिवर्ष 25 हजार रुपये मानदेय देने की मंजूरी दी गई है।पटना स्थित एम्स के विस्तार के लिए 26.76 एकड़ भूमि अधिग्रहण हेतु 348.89 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।मधुबनी, मुंगेर और मुजफ्फरपुर में केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है।इसके अलावा सिंचाई परियोजना के लिए आवश्यक वन भूमि के अंतर्विभागीय हस्तांतरण को भी कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।

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