पटना: रौशन आनंद की रिहाई के लिए सड़कों पर उतरे हजारों छात्र; खान सर के खिलाफ लगाए गंभीर आरोप

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना का कोचिंग विवाद अब सिर्फ बंद कमरों या अदालतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह से सड़कों पर आ चुका है। 2 जून की रात को मुसल्लहपुर हाट में हुए हिंसक झड़प और फायरिंग मामले में ‘ज्ञान बिंदु’ संस्थान के निदेशक रौशन आनंद की गिरफ्तारी के बाद उनके छात्र बेहद आक्रोशित हैं।

सोमवार, 8 जून 2026 को पटना की सड़कों पर उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला, जब हजारों की संख्या में छात्र रौशन आनंद की रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लिए इन छात्रों ने पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस बड़े प्रदर्शन के कारण शहर के कई इलाकों में ट्रैफ़िक व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।

छात्रों का बड़ा सवाल: “जो निर्दोष है वो जेल में क्यों, और दोषी बाहर क्यों?”

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का साफ तौर पर कहना है कि ज्ञान बिंदु के निदेशक रौशन आनंद पूरी तरह से बेगुनाह हैं और उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत इस पूरे मामले में फंसाया गया है। आंदोलनकारी छात्रों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए नारे लगाए:

“जब रौशन सर का इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है, तो उन्हें जेल की सलाखों के पीछे क्यों भेजा गया? इसके विपरीत, जिन लोगों ने सरेआम गोलियां चलवाईं, वे आज भी खुलेआम बाहर क्यों घूम रहे हैं? न्याय का यह कौन सा तरीका है?”

छात्रों ने मांग की है कि जब तक रौशन आनंद सर को ससम्मान रिहाई नहीं मिल जाती, उनका यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं।

खान सर के खिलाफ तीखे पोस्टर

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान छात्रों के हाथों में मौजूद विवादित और तीखे पोस्टरों ने खींचा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सीधे तौर पर ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ के संचालक खान सर (फैजल खान) को निशाने पर लिया।

छात्रों के हाथों में जो तख्तियां थीं, उनमें से कई पर खान सर की तस्वीर छपी थी और उन पर बेहद कड़े शब्द लिखे थे। एक पोस्टर पर लिखा था: “मैं खान हूँ, मैं गोली चलाऊंगा, मुझे पटना पुलिस का संरक्षण है।”

इन पोस्टरों के जरिए छात्रों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पुलिस इस पूरे मामले में एकतरफा कार्रवाई कर रही है। छात्रों का आरोप है कि रसूख और लोकप्रियता के कारण खान सर को बचाया जा रहा है, जबकि उनके सुरक्षाकर्मियों ने कानून को हाथ में लेकर भीड़ पर गोलियां चलाई थीं।

“दोषियों को VIP संरक्षण क्यों?”— पुलिस प्रशासन को घेरा

सड़कों पर मार्च कर रहे छात्रों ने पटना पुलिस और बिहार सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में बड़े रसूखदार लोगों को ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ और ‘वीआईपी संरक्षण’ दिया जा रहा है।

छात्रों ने मीडिया के सामने सवाल उठाया कि खान सर और उनके गार्ड्स के खिलाफ आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) समेत कई अन्य गंभीर और गैर-जमानती धाराएं दर्ज की गई हैं। कानूनन ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है, लेकिन घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी खान सर पुलिस की पहुंच से बाहर क्यों हैं? प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस केवल छापेमारी का दिखावा कर रही है, जबकि हकीकत में उन्हें गिरफ्तार करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की जा रही है।

कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती

हजारों छात्रों के इस तरह अचानक सड़कों पर उतर आने से पटना जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। संवेदनशील इलाकों और कोचिंग हब्स (जैसे मुसल्लहपुर हाट, कंकड़बाग और बोरिंग रोड) में अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे छात्रों की भावनाओं को समझते हैं, लेकिन किसी को भी कानून-व्यवस्था अपने हाथ में लेने या शहर की शांति भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस ने छात्रों से शांति बनाए रखने और अदालत की प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की है।

अदालत के फैसले और पुलिस की निष्पक्षता पर टिकी सबकी नजरें

पटना का यह कोचिंग वॉर अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। एक तरफ जहां कोर्ट ने रौशन आनंद की जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर छात्रों का यह उग्र आंदोलन पुलिस प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई करने का भारी दबाव बना रहा है।

छात्रों के इस आक्रोश ने यह साफ कर दिया है कि यदि इस मामले में जल्द ही पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है। अब देखना यह होगा कि इस छात्र आंदोलन के बाद पुलिस प्रशासन का अगला कदम क्या होता है।

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