पटना: ‘ज्ञान बिंदु’ के रौशन आनंद की जमानत पर फैसला सुरक्षित, कोर्ट ने खान सर और उनके गार्ड्स की मांगी ‘केस डायरी’

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BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना का मुसल्लहपुर हाट फायरिंग और तोड़फोड़ मामला अब पूरी तरह से कानूनी अखाड़ा बन चुका है। सोमवार, 8 जून 2026 को इस हाई-प्रोफाइल मामले में पटना सिविल कोर्ट के भीतर कई बड़े घटनाक्रम एक साथ देखने को मिले। इस विवाद के केंद्र में रहे दोनों बड़े चेहरों—’खान ग्लोबल स्टडीज’ के खान सर (फैजल खान) और ‘ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी’ के रौशन आनंद को लेकर अदालत ने बेहद कड़े रुख के संकेत दिए हैं।

एक तरफ जहां पुलिस की गिरफ्त में आ चुके रौशन आनंद की जमानत (Bail) पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है, वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तारी से बच रहे खान सर और उनके निजी सुरक्षा गार्ड्स के खिलाफ कोर्ट ने पुलिस से पूरी कुंडली मांग ली है। इस ताज़ा अपडेट के बाद पटना के शिक्षा जगत और लाखों छात्रों के बीच खलबली मच गई है।

ज्ञान बिंदु के निदेशक रौशन आनंद की जमानत पर सस्पेंस बरकरार

पटना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए ‘दरोगा फैक्ट्री’ के नाम से मशहूर ज्ञान बिंदु संस्थान के संचालक रौशन आनंद के लिए आज का दिन बेहद अहम था। सोमवार को पटना कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई।

  • बचाव पक्ष की दलील: रौशन आनंद के वकीलों ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उन्हें इस पूरे विवाद में झूठा फंसाया गया है। घटना के वक्त वे मौके पर मौजूद नहीं थे और प्रतिस्पर्धी (कंपटीशन) संस्थानों ने अपनी खुन्नस निकालने के लिए उनका नाम इस केस में घसीटा है।

  • सरकारी पक्ष का विरोध: वहीं, सरकारी वकील और पुलिस के जांच अधिकारियों ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि रौशन आनंद के इशारे पर ही 2 जून की रात को खान सर के कैंपस में भारी तोड़फोड़ और हंगामा किया गया था।

  • कोर्ट का रुख: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायाधीश ने रौशन आनंद की जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित (Reserve) रख लिया है। इसका मतलब है कि कोर्ट अगले एक-दो दिनों में अपना लिखित आदेश जारी करेगा कि रौशन आनंद को जेल में ही रहना होगा या उन्हें बेल मिलेगी।

 

खान सर की मुश्किलें बढ़ीं: कोर्ट ने मांगी ‘केस डायरी’ और आपराधिक इतिहास

इस मामले का दूसरा और सबसे बड़ा पहलू खान सर (फैजल खान) से जुड़ा हुआ है। खान सर के सुरक्षा गार्ड्स द्वारा की गई फायरिंग के मामले में भी आज अदालत में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं।

अदालत ने पुलिस से साफ तौर पर खान सर के मामले की ‘केस डायरी’ (Case Diary) तलब की है। केस डायरी किसी भी आपराधिक मामले का वह दस्तावेज होता है जिसमें पुलिस घटना के दिन से लेकर अब तक की गई जांच, सबूतों और गवाहों के बयानों का पूरा लेखा-जोखा रखती है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पुलिस से यह भी रिपोर्ट मांगी है कि क्या खान सर का पहले से कोई आपराधिक इतिहास (Criminal History) रहा है या नहीं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, केस डायरी और आपराधिक इतिहास की रिपोर्ट आने के बाद ही खान सर की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) पर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

खान सर के दोनों बॉडीगार्ड्स पर भी कसा कानूनी शिकंजा

2 जून की रात को मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कैंपस में जो अफरा-तफरी मची थी, उसमें सबसे गंभीर मोड़ तब आया था जब वहां गोलियां चली थीं। पुलिस का आरोप है कि खान सर के कहने पर उनके निजी सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ पर फायरिंग की थी।

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने खान सर के उन दोनों सुरक्षा गार्ड्स (बॉडीगार्ड्स) की भी केस डायरी मांगी है, जो उस रात हथियार के साथ वहां तैनात थे। कोर्ट यह देखना चाहता है कि सुरक्षा गार्ड्स ने आत्मरक्षा (Self Defense) में गोली चलाई थी या फिर उनके पास भीड़ पर सीधे गोली चलाने का कोई ठोस कानूनी कारण था। इन गार्ड्स की केस डायरी आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि फायरिंग के लिए असली उकसावा किसकी तरफ से था।

अदालत के फैसले पर टिकी बिहार की राजनीति और शिक्षा जगत की नजरें

8 जून को कोर्ट में हुई इस हलचल ने यह साफ कर दिया है कि कानून इस मामले में किसी भी पक्ष को रियायत देने के मूड में नहीं है। एक तरफ जहां रौशन आनंद की जेल से रिहाई का फैसला कोर्ट के सुरक्षित आदेश पर टिका है, वहीं खान सर की गिरफ्तारी होगी या उन्हें अग्रिम जमानत मिलेगी, इसका फैसला पुलिस द्वारा सौंपी जाने वाली केस डायरी तय करेगी।

पटना का यह कोचिंग वॉर अब पूरी तरह से एक कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है। पुलिस लगातार तकनीकी सबूतों और सीसीटीवी फुटेज को खंगालने का दावा कर रही है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट का अगला आदेश किस करवट बैठता है और बिहार के इस सबसे बड़े कोचिंग विवाद का अंत क्या होता है।

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