BNT Desk: कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो कोई भी बाधा आपको अपनी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। इस बात को एक बार फिर सच कर दिखाया है बिहार की जांबाज बेटी मिताली प्रसाद ने। मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली और पटना यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा मिताली प्रसाद ने पर्वतारोहण (Mountaineering) की दुनिया में एक और बड़ी और खूबसूरत उपलब्धि अपने नाम जोड़ ली है।
मिताली ने उत्तराखंड में स्थित 12,500 फीट की ऊंचाई पर बने ‘माउंट केदारकांठा’ (Mount Kedarkantha) पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की है। उन्होंने बीते मई माह में इस दुर्गम और बर्फीली चोटी पर चढ़ाई पूरी की और वहां देश के तिरंगे के साथ बिहार का मान बढ़ाया।
चोटी पर खड़े होकर मिताली ने कहा— “मुझे बिहारी होने पर गर्व है”
इस शानदार कामयाबी को हासिल करने के बाद मिताली प्रसाद ने मीडिया (प्रभात खबर) से बातचीत में अपने इस गौरवपूर्ण और भावुक पल को साझा किया। मिताली ने कहा:
“माउंट केदारकांठा की चोटी पर खड़े होकर जब मैंने चारों तरफ बर्फीली पहाड़ियों को देखा, तो मुझे वहां बिहार का प्रतिनिधित्व करने पर बेहद गर्व महसूस हुआ। यह कामयाबी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर हम ठान लें, तो हम सभी के भीतर किसी भी बड़ी चुनौती या ऊंचाई को पार करने का अटूट जज्बा मौजूद है।”
अपनी इस जीत के बाद मिताली ने चोटी पर ‘जय बिहार’ का नारा भी बुलंद किया, जो आज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और राज्य के युवाओं को प्रेरित कर रहा है।
शानदार ट्रैक रिकॉर्ड
यह पहली बार नहीं है जब मिताली ने ऐसा कारनामा किया है; उनका पर्वतारोहण का इतिहास बेहद शानदार और रिकॉर्ड्स से भरा रहा है:
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माउंट एकांकागुआ (2020): मिताली ने साल 2020 में दक्षिण अमेरिका की 6,962 मीटर ऊंची सबसे कठिन चोटी ‘माउंट एकांकागुआ’ को अकेले (Solo) फतह करने का रिकॉर्ड बनाया। वे ऐसा करने वाली भारत की पहली बेटी बनी थीं।
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माउंट कुन और एवरेस्ट बेस कैंप (2022): साल 2022 में उन्होंने 7,077 मीटर ऊंचे ‘माउंट कुन’ की खतरनाक चढ़ाई पूरी की और एवरेस्ट बेस कैंप तक भी पहुंचीं।
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माउंट किलिमंजारो (2019): साल 2019 में मिताली ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर) पर भारत का तिरंगा फहराया था।
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माउंट बोनेटे (2020): इसके अलावा वे दक्षिण अमेरिका के ही माउंट बोनेटे (5,400 मीटर) पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुकी हैं।
कराटे की इंटरनेशनल खिलाड़ी और NCC कैडेट
राजनीति विज्ञान (Political Science) से पोस्ट ग्रेजुएशन (एमए) करने वाली मिताली प्रसाद सिर्फ पहाड़ों पर ही नहीं, बल्कि खेल और अनुशासन के मैदान में भी अव्वल रही हैं। पर्वतारोहण में आने से पहले वे मार्शल आर्ट्स (कराटे) में ब्लैक बेल्ट (2nd डैन) होल्डर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा, वे एनसीसी (Air Sqn) की ‘ए’ ग्रेड कैडेट रही हैं और उन्होंने आगरा से पैरा बेसिक कोर्स भी पूरा किया है, जहाँ उन्हें हवाई जहाज से पैराशूट के जरिए कूदने की ट्रेनिंग मिली थी।
किसान की बेटी का अगला लक्ष्य
मिताली प्रसाद जमीन से जुड़ी एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं। नालंदा के कतरीसराय के पास ‘मायापुर’ उनका पैतृक गांव है। उनके माता-पिता किसान हैं और खेती के साथ-साथ छोटे-मोटे घरेलू उद्योगों से अपना जीवन यापन करते हैं।
अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए मिताली ने बताया कि फिलहाल वे बिहार के सरकारी स्कूली बच्चों को पर्वतारोहण की बारीकियां सिखा रही हैं, ताकि राज्य में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा मिल सके। इसके साथ ही, वे ‘बिहार प्रशासनिक सेवा’ (BPSC) की तैयारी भी कर रही हैं और अब तक दो बार मुख्य परीक्षा (Mains Exam) भी लिख चुकी हैं।
मिताली का अंतिम सपना दुनिया की सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट एवरेस्ट’ को फतह करना और बिहार की बेटियों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जागरूक करना है। हालांकि, एवरेस्ट मिशन के लिए लगने वाले भारी-भरकम फंड (पैसे) की कमी उनके इस सपने के आड़े आ रही है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार या किसी संस्था की मदद से वे जल्द ही एवरेस्ट पर भी भारत का नाम रोशन करेंगी।