पटना: बंटी यादव के अपहरण और हत्या का खुलासा, शराब कारोबार में हिस्सेदारी के विवाद को पुलिस ने बताया वजह

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BNT Desk: पटना जंक्शन से अपहृत बंटी यादव की हत्या के मामले में पटना पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि अवैध शराब के कारोबार से होने वाली कमाई में हिस्सेदारी को लेकर हुए विवाद के कारण बंटी यादव की हत्या की गई। इस मामले में पुलिस ने दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, मुख्य साजिशकर्ता समेत अन्य फरार आरोपितों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे की जांच के आधार पर अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

 

पटना जंक्शन से हुआ था अपहरण

यह मामला जक्कनपुर थाना क्षेत्र निवासी किरण देवी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। उन्होंने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि 6 जुलाई की रात उनका बेटा बंटी यादव पटना जंक्शन स्थित दूध मंडी दही लेने गया था। परिजनों का आरोप था कि वहीं पर रविश कुमार उर्फ बीसी, रोहित कुमार और छह-सात अन्य लोगों ने बंटी यादव के साथ मारपीट की और फिर उसका अपहरण कर लिया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसे पुलिस को जांच के लिए उपलब्ध कराया गया। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया था।

 

जांच के लिए बनाई गई चार SIT 

घटना की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (विधि-व्यवस्था-01) के नेतृत्व में चार विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए। इन टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। एक टीम को घटनास्थल और गवाहों से जुड़े तथ्यों की जांच का जिम्मा दिया गया, जबकि दूसरी टीम ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तीसरी टीम ने तकनीकी जांच के तहत कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर डंप, आईपीडीआर और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया। चौथी टीम को आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जिम्मेदारी दी गई।

 

पहले तीन आरोपित गिरफ्तार, फिर खेत से मिला शव

जांच के दौरान 7 जुलाई को पुलिस ने रोहित कुमार, बजरंगी कुमार और रवि कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद 11 जुलाई को अथमलगोला थाना क्षेत्र के फुलेलपुर फोरलेन के पास खेत में मिट्टी और बालू के नीचे दबा बंटी यादव का शव बरामद हुआ। शव मिलने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया।

 

दो और आरोपित गिरफ्तार

आगे की कार्रवाई में पुलिस ने सोमवार को रौशन कुमार और अजीत कुमार सहनी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और कई अहम जानकारियां दीं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

 

शराब कारोबार के विवाद में हुई हत्या

पटना पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि रविश कुमार उर्फ बीसी का संपर्क मोनी किन्नर से था। पुलिस का दावा है कि दोनों उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए अवैध शराब लाकर उसकी बिक्री करते थे। जांच में यह भी सामने आया कि इसी कारोबार से होने वाली कमाई में हिस्सेदारी को लेकर बंटी यादव और रविश कुमार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पुलिस का कहना है कि इसी रंजिश ने हत्या की साजिश का रूप ले लिया।

 

अपहरण के बाद हत्या करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि शंकर कुमार, रौशन कुमार, रोहित कुमार, सोनू, मोनी किन्नर, सूरज, बजरंगी कुमार और रवि कुमार ने मिलकर बंटी यादव के अपहरण की योजना बनाई। पुलिस का आरोप है कि अपहरण के बाद बंटी यादव की हत्या कर दी गई और सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को अथमलगोला थाना क्षेत्र में फोरलेन के किनारे खेत में बालू और मिट्टी से ढक दिया गया।

 

फरार आरोपितों की तलाश जारी

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों के पास से तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। इन मोबाइलों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि घटना से जुड़े और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा सकें। फिलहाल पुलिस मुख्य साजिशकर्ता समेत अन्य फरार आरोपितों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। बंटी यादव हत्याकांड बिहार के चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अंतिम रूप से आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

 

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