BNT desk : दिवाली के मौके पर बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर में पेंट और रंग-रोगन का कारोबार जोर पकड़ चुका है। घरों को सजाने-संवारने के लिए बाजार में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। इस त्योहारी सीजन में भागलपुर के पेंट बाजार में करीब 20 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। खास बात यह है कि पेंट की कीमतों में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी के बावजूद ग्राहकों की मांग पर खास असर नहीं पड़ा है। वहीं, इस सीजन में पेंटरों को भी अच्छी कमाई हो रही है।
विश्वकर्मा पूजा से छठ तक पेंटरों को मिलता है काम
भागलपुर में पेंटिंग का काम विश्वकर्मा पूजा के आसपास शुरू हो जाता है और छठ पर्व तक लगातार चलता है। दिवाली से पहले लोग अपने घरों की दीवारों पर रंग-रोगन कराते हैं, ताकि त्योहार पर घर नया और आकर्षक दिखे।भागलपुर के स्थानीय पेंटरों की मांग बिहार के अलावा पंजाब, हरियाणा और झारखंड के कई शहरों में भी है। यहां के पेंटर दूसरे राज्यों में जाकर भी काम करते हैं और ठेके पर पेंटिंग का काम लेते हैं।
बांका के रजौन निवासी संजीव कुमार उर्फ गुड्डू ने बताया कि उन्होंने अपने काम की शुरुआत पानीपत से की थी। इसके बाद देवघर, जमशेदपुर और गया में भी काम किया। अब वह मुख्य रूप से ठेके पर पेंटिंग का काम करते हैं। इसके लिए अंदर की दीवारों पर 3 से 4 रुपये और बाहरी दीवारों पर 5 से 8 रुपये प्रति वर्गफीट तक की दर मिलती है।
एक पेंटर की महीने में 40-50 हजार रुपये तक कमाई
जमनी के पेंटर एतवारी मंडल के मुताबिक, फिलहाल उनका काम मुंगेर में चल रहा है। त्योहारी सीजन में एक पेंटर महीने में 40 से 50 हजार रुपये तक कमा सकता है। वहीं, काम कम रहने वाले समय में भी 12 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है।जानकारी के मुताबिक, भागलपुर प्रमंडल में 10 हजार से अधिक लोग पेंटिंग के पेशे से जुड़े हुए हैं। दिवाली और छठ के दौरान बढ़ती मांग से इन पेंटरों को रोजगार और कमाई का अच्छा अवसर मिलता है।
भागलपुर के पेंट बाजार में 20 करोड़ का कारोबार
दिवाली को लेकर लोहापट्टी समेत शहर के अलग-अलग बाजारों में रंग, पेंट, चूना, फेविकोल, वॉल पुट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ है।लोहापट्टी के व्यवसायी विकास झुनझुनवाला के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण रंग और पेंट के दाम करीब 15 फीसदी तक बढ़े हैं। इसके बावजूद बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बनी हुई है।लोहापट्टी में लगभग 20 और पूरे भागलपुर शहर में करीब 60 प्रमुख रंग कारोबारी हैं। यहां से दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, बांका, जमालपुर, खगड़िया, नवगछिया और बिहपुर जैसे इलाकों में भी सामान भेजा जाता है।कारोबारी विजय कुमार के मुताबिक, एक सीजन में पेंट बाजार का कारोबार करीब 20 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। दुर्गा पूजा के बाद और दिवाली से पहले घरों में रंग-रोगन कराना शुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान मांग बढ़ जाती है।
हल्के रंगों के साथ वास्तु के अनुसार पेंट कराने का चलन
इस बार बाजार में हल्के रंगों की मांग अधिक देखने को मिल रही है। व्यवसायी ईश्वर प्रसाद झुनझुनवाला के अनुसार, ग्राहक अब वास्तु शास्त्र को ध्यान में रखकर भी कमरों के रंग चुन रहे हैं।लोग शांति के लिए नीले, आनंद और सादगी के लिए सफेद व क्रीम रंग पसंद कर रहे हैं। वहीं, पूजा घर के लिए गुलाबी रंग को प्राथमिकता दी जा रही है।इसके अलावा मेहंदी, ऑरेंज, ग्रे और पर्पल शेड्स भी ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं। घरों की अंदरूनी और बाहरी दीवारों के लिए अलग-अलग तरह के पेंट खरीदे जा रहे हैं। मेटालिक फिनिश और टेक्सचर पेंट का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है।
बाजार में पेंट और अन्य सामग्रियों के दाम
भागलपुर के बाजार में रंग-रोगन से जुड़ी कई सामग्रियां अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
| सामग्री | कीमत |
|---|---|
| चूना (10 किलोग्राम) | 150 रुपये |
| फेविकोल (1 किलोग्राम) | 110 रुपये |
| नील (1 किलोग्राम) | 300 रुपये |
| सेमोसेम (20 किलोग्राम पैक) | 600 रुपये |
| प्लास्टिक पेंट (1 लीटर) | 200 से 700 रुपये |
दिवाली के इस सीजन में भागलपुर का पेंट बाजार कारोबार के लिहाज से गुलजार है। बढ़ती मांग से दुकानदारों के साथ-साथ पेंटरों को भी फायदा मिल रहा है। ऐसे में त्योहार ने स्थानीय बाजार और रोजगार दोनों को नई रफ्तार दी है।