पटना: स्नातक सीट पर अनंत सिंह-नीरज कुमार की जंग के बीच सम्राट चौधरी का बयान, क्या सहयोगी दल की अंदरूनी राजनीति पर बढ़ा BJP का प्रभाव?

BNT
By
8 Min Read

BNT Desk: पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद अब बिहार की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने JDU नेता नीरज कुमार को ‘पॉलिटिकल डॉक्टर’ बताते हुए कहा कि वह अच्छे-अच्छों का इलाज कर देते हैं और अगर कोई उनसे भिड़ेगा तो उसका भी इलाज कर देंगे।  सम्राट चौधरी के इस बयान को राजनीतिक तौर पर नीरज कुमार के समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, बयान की भाषा प्रतीकात्मक थी और इससे किसी औपचारिक चुनावी गठबंधन या पार्टी निर्णय का अलग से प्रमाण नहीं मिलता। पटना स्नातक सीट को लेकर अनंत सिंह पहले ही नीरज कुमार की उम्मीदवारी का विरोध कर चुके हैं और एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा कर चुके हैं।

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुराना विवाद फिर सामने

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार लगातार चौथी बार विधान परिषद पहुंचने की कोशिश में हैं। इसी बीच JDU विधायक अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनकी उम्मीदवारी का विरोध किया और उनके खिलाफ चुनावी अभियान चलाने की बात कही। अनंत सिंह ने एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा भी की है। इस वजह से विवाद सिर्फ दो नेताओं के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे JDU की आंतरिक राजनीति से जोड़कर देखा जाने लगा है। पार्टी के भीतर विवाद को सुलझाने की कोशिश भी पहले हो चुकी है। सितंबर की शुरुआत में अनंत सिंह और नीरज कुमार की JDU कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ बैठक हुई थी। वहीं, मंत्री श्रवण कुमार ने भी कहा था कि समय आने पर विवाद सुलझ जाएगा।

 

‘पॉलिटिकल डॉक्टर’ वाले बयान से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नीरज कुमार को लेकर दिया गया बयान सामने आया। उन्होंने नीरज कुमार को ‘पॉलिटिकल डॉक्टर’ बताया और कहा कि वह अच्छे-अच्छों का इलाज कर देते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो उनसे भिड़ेगा, उसका भी इलाज कर देंगे। इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं में इसे नीरज कुमार के प्रति समर्थन के संकेत के तौर पर पेश किया गया। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी नेता के सार्वजनिक बयान को पार्टी के औपचारिक चुनावी निर्णय के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई निर्णय घोषित न किया जाए।

 

क्या इस विवाद में BJP की भूमिका पर उठ रहे हैं सवाल?

सम्राट चौधरी के बयान के बाद एक बड़ा राजनीतिक सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या बड़े गठबंधन में शामिल दल अपने सहयोगी दलों की अंदरूनी राजनीति को प्रभावित करते हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को BJP और JDU के गठबंधन के संदर्भ में देख रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि BJP ने जानबूझकर JDU के भीतर अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद को बढ़ावा दिया है। ऐसा दावा राजनीतिक आरोप या विश्लेषण की श्रेणी में आएगा, जिसके लिए प्रत्यक्ष प्रमाण की जरूरत होगी। वर्तमान घटनाक्रम में इतना जरूर दर्ज है कि JDU के दो नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद सामने आया है और NDA के प्रमुख नेता के रूप में सम्राट चौधरी ने नीरज कुमार को लेकर सकारात्मक टिप्पणी की है।

 

महाराष्ट्र की शिवसेना का उदाहरण क्यों दिया जाता है?

सहयोगी दलों की अंदरूनी राजनीति में BJP की भूमिका को लेकर चर्चा करने वाले लोग अक्सर महाराष्ट्र का उदाहरण देते हैं। 2022 में शिवसेना के भीतर एक बड़ा विभाजन हुआ। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, जून 2022 में शिवसेना विधायक दल दो गुटों में बंट गया था—एक गुट उद्धव ठाकरे के साथ और दूसरा एकनाथ शिंदे के साथ। इसके बाद महाराष्ट्र की सत्ता में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ। विपक्षी दलों ने उस समय BJP पर शिंदे गुट को समर्थन देने और राजनीतिक घटनाक्रम में भूमिका निभाने के आरोप लगाए थे। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आईं। इसलिए इसे सीधे तौर पर किसी एक दल की पूर्व नियोजित रणनीति का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।

 

NCP में भी हुआ था बड़ा विभाजन

महाराष्ट्र में ही 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP में भी बड़ा विभाजन हुआ। 2 जुलाई 2023 को अजित पवार और कई अन्य नेताओं ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद NCP दो प्रमुख राजनीतिक गुटों में बंट गई। इस घटनाक्रम को लेकर भी विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की ओर से BJP की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। लेकिन किसी भी राजनीतिक विश्लेषण में पार्टी के भीतर मौजूद पुराने मतभेद, नेतृत्व को लेकर असहमति और सत्ता में भागीदारी जैसे कारकों को भी अलग से देखना जरूरी है।

 

हर विवाद को बड़ी साजिश मानना भी सही नहीं

राजनीतिक दलों के भीतर होने वाले मतभेदों की अपनी अलग वजहें होती हैं। नेतृत्व, टिकट, संगठन, क्षेत्रीय प्रभाव और व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा जैसे मुद्दे भी आंतरिक संघर्ष को जन्म दे सकते हैं। पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह और नीरज कुमार का विवाद भी फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने आया एक राजनीतिक टकराव है। दोनों नेताओं के बीच पहले से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का उल्लेख भी रिपोर्टों में मिलता है। इसलिए अभी यह निष्कर्ष निकालना कि यह विवाद BJP की किसी सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता। इसी तरह इसे केवल व्यक्तिगत विवाद मान लेना भी तब तक अंतिम निष्कर्ष नहीं होगा, जब तक संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती।

 

पटना स्नातक सीट पर बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी

फिलहाल पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव JDU की आंतरिक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है। एक तरफ नीरज कुमार अपनी उम्मीदवारी के साथ चुनावी मैदान में हैं, वहीं अनंत सिंह उनके खिलाफ खुलकर खड़े हैं। सम्राट चौधरी के बयान ने इस विवाद को और चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में JDU नेतृत्व इस मतभेद को किस तरह संभालता है और अनंत सिंह तथा नीरज कुमार के बीच जारी राजनीतिक टकराव का चुनावी समीकरण पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से इतना स्पष्ट है कि पटना स्नातक सीट का मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने JDU के भीतर नेतृत्व, समर्थन और संगठनात्मक अनुशासन से जुड़े सवालों को भी सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है।

Share This Article