BNT Desk: स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों की सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता और रोगियों के विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से पटना में दो दिवसीय राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 17 और 18 सितंबर 2026 को आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल की ओर से CAHO, AHPI और CII Bihar के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी करेंगे।
देशभर से जुटेंगे स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें हेल्थकेयर सीईओ, वरिष्ठ चिकित्सक, अस्पताल प्रबंधन विशेषज्ञ, रोगी सुरक्षा और गुणवत्ता विशेषज्ञ के साथ-साथ नीति-निर्माता भी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और मरीज-केंद्रित बनाने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली पर अपने विचार साझा करेंगे। रोगी सुरक्षा को स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए रुबन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के प्रबंध निदेशक डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह ने कहा कि रोगी सुरक्षा केवल अस्पताल या तकनीक से जुड़ा विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध मरीज और उसके परिवार के विश्वास से भी है।
उपचार की पूरी यात्रा को सुरक्षित बनाने पर जोर
डॉ. सिंह के अनुसार, अस्पताल की जिम्मेदारी केवल मरीज को सही उपचार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मरीज जब अस्पताल पहुंचता है, तब से लेकर जांच, दवा, ऑपरेशन, उपचार और अस्पताल से छुट्टी तक उसकी पूरी उपचार यात्रा सुरक्षित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अस्पतालों में बेहतर सिस्टम, टीमवर्क और स्पष्ट संवाद की आवश्यकता है। इसके साथ ही सुरक्षित दवा-प्रयोग, संक्रमण नियंत्रण और उपचार के दौरान होने वाली घटनाओं से सीखने की संस्कृति विकसित करना भी जरूरी है। राष्ट्रीय कार्यक्रम में इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान पर चर्चा की जाएगी। उद्देश्य यह है कि मरीजों की सुरक्षा को केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी न मानकर पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए।
Medication Safety से Surgical Safety तक होगी चर्चा
दो दिवसीय कार्यक्रम में रोगी सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें Medication Safety यानी दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल, Diagnostic Safety यानी सही और सुरक्षित जांच प्रक्रिया तथा Surgical Safety यानी ऑपरेशन और सर्जरी के दौरान मरीजों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा Human Factors पर भी चर्चा होगी। स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों, उनकी कार्यप्रणाली और मानवीय पहलुओं का मरीजों की सुरक्षा पर किस तरह प्रभाव पड़ता है, इसे भी चर्चा का हिस्सा बनाया जाएगा।Patient & Family Engagement यानी मरीज और उसके परिवार को उपचार प्रक्रिया में उचित रूप से शामिल करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा Data, Digital Technology और Artificial Intelligence के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने की संभावनाओं पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
Near Miss और घटनाओं से सीखने की संस्कृति
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान होने वाली घटनाओं को लेकर दोषारोपण की जगह उनसे सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। कई बार उपचार प्रक्रिया के दौरान ऐसी स्थिति बनती है, जिसमें नुकसान होने की संभावना रहती है, लेकिन समय रहते उसे टाल दिया जाता है। ऐसी घटनाओं को Near Miss के रूप में देखा जाता है। कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा होगी कि ऐसी घटनाओं और गलतियों से सीख लेकर अस्पतालों की व्यवस्था में लगातार सुधार कैसे किया जा सकता है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय उस सिस्टम को समझना है, जिसमें गलती या जोखिम की स्थिति पैदा हुई। विशेषज्ञों के बीच यह भी चर्चा होगी कि अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था कैसे विकसित की जाए, जहां कर्मचारी संभावित जोखिम और घटनाओं की जानकारी बिना डर के साझा कर सकें और उनसे सीख लेकर भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के उपाय किए जा सकें।
सामूहिक प्रयास से मजबूत होगी रोगी सुरक्षा
डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह ने कहा कि रोगी सुरक्षा में स्थायी सुधार केवल किसी एक अस्पताल, चिकित्सक या विभाग के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए डॉक्टरों, अस्पताल प्रबंधन, गुणवत्ता विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार, मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बेहतर प्रक्रियाओं के साथ-साथ टीम के बीच प्रभावी संवाद और जिम्मेदारी की स्पष्ट व्यवस्था भी जरूरी है। तकनीक और डिजिटल सिस्टम का उपयोग भी रोगी सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पटना में राष्ट्रीय स्तर की पहल
पटना में आयोजित होने वाला यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम रोगी सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इसमें देशभर के विशेषज्ञ अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। आयोजकों को उम्मीद है कि कार्यक्रम के दौरान होने वाली चर्चा से स्वास्थ्य सेवाओं में व्यावहारिक और मापनीय सुधारों की दिशा में नए विचार सामने आएंगे। साथ ही अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, बेहतर संवाद, सुरक्षित उपचार और निरंतर सुधार की संस्कृति को मजबूत करने में भी इस तरह की पहल उपयोगी साबित हो सकती है।