BNT Desk: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार के सत्तारूढ़ NDA में अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बीच केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने इसका खुलकर समर्थन किया है। मांझी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता संविधान की भावना के अनुरूप है और इसके अनुपालन में सभी को सहयोग करना चाहिए। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और NDA के शासन वाले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद NDA के अलग-अलग सहयोगी दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
मांझी बोले- संविधान के अनुच्छेद 44 में UCC का प्रावधान
जीतन राम मांझी ने अपने बयान में संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का प्रावधान संविधान में पहले से मौजूद है। संविधान के भाग-4 में शामिल अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है। मांझी का कहना है कि जब संविधान में समान नागरिक संहिता को लेकर प्रावधान मौजूद है, तो जनहित में संविधान की भावना का सम्मान करना सभी का दायित्व होना चाहिए। उन्होंने UCC को लेकर केंद्र सरकार की पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इस दिशा में सहयोग किया जाना चाहिए।
अमित शाह ने 2029 से पहले लागू करने की कही बात
UCC को लेकर बहस उस समय तेज हुई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि NDA के नेतृत्व वाली सरकारें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। शाह ने कहा कि कुछ राज्यों में UCC पहले ही लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं और बाकी NDA शासित राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा। UCC के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का विचार रखा जाता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में इसकी प्रक्रिया और कानून के प्रावधान अलग हो सकते हैं।
बिहार NDA में अलग-अलग रुख
अमित शाह के बयान के बाद बिहार NDA के भीतर भी UCC को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जनता दल यूनाइटेड ने कहा है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले कानून के प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि बिना प्रावधान देखे जल्दबाजी में कोई रुख तय नहीं किया जाएगा। वहीं, जीतन राम मांझी ने अपने बयान में UCC के समर्थन का स्पष्ट संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान के अनुरूप अपने अधिकार प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में भी सहयोग करना चाहिए।
समय-सीमा पर विरोध को लेकर मांझी की टिप्पणी
मांझी ने कहा कि अगर समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाती है, तो उसका विरोध और हंगामा NDA की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान के प्रावधानों और देशहित को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सहयोग की भावना से आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि, UCC को लेकर NDA के भीतर सभी सहयोगी दलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। अलग-अलग दलों ने इसके प्रावधानों, प्रक्रिया और संभावित प्रभावों को लेकर अलग-अलग रुख सामने रखा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है।
बिहार की राजनीतिक स्थिति पर भी बोले मांझी
केंद्रीय मंत्री ने बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में लगी है। ऐसे समय में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के प्रयासों को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मांझी ने कहा कि सत्ता से बाहर मौजूद राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से सत्ता हासिल करने के प्रयासों के कारण विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से बिहार के विकास को प्राथमिकता देने की अपील की।
BRICS सम्मेलन का भी किया जिक्र
मांझी ने हालिया BRICS सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चीन और रूस के साथ शांति के प्रयासों का भी उल्लेख किया। मांझी का कहना है कि ऐसे समय में बिहार में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों से बचना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के विकास में योगदान दें।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार को आगे बढ़ाने के साथ-साथ वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में भी सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से विकास के मुद्दों पर मिलकर काम करने की अपील की। UCC को लेकर केंद्र की ओर से 2029 की समय-सीमा सामने आने के बाद अब बिहार NDA के सहयोगी दलों के रुख पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। जहां मांझी ने संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए समर्थन जताया है, वहीं कुछ सहयोगी दलों ने कानून के प्रावधानों का अध्ययन करने की बात कही है। ऐसे में बिहार में UCC का मुद्दा आने वाले समय में NDA के भीतर चर्चा का एक प्रमुख विषय बना रह सकता है।