बिहार: बदला मुख्यमंत्री जनसुनवाई कार्यक्रम का नाम, अब ‘राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ के नाम से होगी सुनवाई

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BNT Desk: बिहार में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े जनसुनवाई कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में यह कार्यक्रम ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ के नाम से आयोजित किया जाता था। अब इसका नाम बदलकर ‘राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ कर दिया गया है। इसके साथ ही कार्यक्रम के बोर्ड का रंग भी बदल गया है। पहले जहां बोर्ड नीले रंग का होता था, वहीं अब इसे भगवा रंग में तैयार किया गया है। इस बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम के नाम और बोर्ड के रंग में बदलाव को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

 

पहले कैसा था कार्यक्रम?

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कई वर्षों तक ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा। इस कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग जिलों से लोग अपनी शिकायतें और समस्याएं लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचते थे। जनता सीधे अपनी बात मुख्यमंत्री के सामने रखती थी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही कार्रवाई के निर्देश दिए जाते थे। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री सचिवालय की पहचान बन गया था। इसके बोर्ड पर कार्यक्रम का नाम नीले रंग की थीम के साथ लिखा रहता था।

 

अब क्या बदला है?

नई सरकार बनने के बाद सबसे बड़ा बदलाव कार्यक्रम के नाम में किया गया है। अब इसे ‘राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ नाम दिया गया है। सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि कार्यक्रम के बोर्ड का रंग भी बदल दिया गया है। पहले इस्तेमाल होने वाले नीले रंग की जगह अब भगवा रंग का बोर्ड लगाया गया है। नई तस्वीरें सामने आने के बाद यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, सरकार की ओर से इसे प्रशासनिक बदलाव बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम पहले की तरह ही आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए जारी रहेगा।

 

हर महीने के दूसरे मंगलवार को होगी सुनवाई

नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हर महीने के दूसरे मंगलवार को लोगों की शिकायतें सुनेंगे। इस कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग जिलों से आने वाले लोग अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रख सकेंगे। इसके बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों को मामलों के समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों की शिकायतों का तेजी से निपटारा करना और प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना है।

सरकार का क्या कहना है?

सरकार का कहना है कि यह सिर्फ नाम और प्रस्तुति में बदलाव है। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य पहले जैसा ही रहेगा। आम लोगों को अपनी समस्या सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिलता रहेगा। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था के तहत भी जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा और सभी विभागों के अधिकारी पहले की तरह कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।

राजनीतिक हलकों में शुरू हुई चर्चा

कार्यक्रम का नाम और बोर्ड का रंग बदलने के बाद राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्ष का कहना है कि नई सरकार ने कार्यक्रम की पहचान बदलने की कोशिश की है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि नई सरकार अपनी कार्यशैली और प्रशासनिक पहचान के अनुसार बदलाव करने के लिए स्वतंत्र है। फिलहाल इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी-अपनी राय रख रहे हैं, लेकिन आम लोगों की नजर इस बात पर है कि नई व्यवस्था में उनकी शिकायतों का समाधान कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से होता है।

 

जनता को क्या मिलेगा फायदा?

यदि यह कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होता है और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होती है, तो राज्य के लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। इसके जरिए भूमि विवाद, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, पुलिस, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और अन्य विभागों से जुड़ी शिकायतों का समाधान तेजी से कराने की कोशिश की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि ‘राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ पुराने ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम की तरह ही लोगों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में कितनी प्रभावी भूमिका निभाता है।

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