BNT Desk: पटना स्थित जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश कार्यालय के बाहर मंगलवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिव छोटू सिंह के समर्थकों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए छोटू सिंह को पार्टी में दोबारा शामिल करने की मांग की। समर्थकों का कहना है कि छोटू सिंह लंबे समय से पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और उन्हें संगठन से बाहर करना उचित फैसला नहीं है। इसी मांग को लेकर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जदयू कार्यालय के बाहर जुटे और विरोध प्रदर्शन किया।\
‘छोटू सिंह को वापस लो’ के लगे नारे
प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने “छोटू सिंह को वापस लो” और “निलंबन वापस लो” जैसे नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। कुछ समय तक जदयू कार्यालय के बाहर नारेबाजी का दौर चलता रहा। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
6 साल के लिए किए गए हैं निलंबित
गौरतलब है कि जदयू के पूर्व प्रदेश महासचिव छोटू सिंह को पार्टी ने छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी कार्रवाई में कहा गया कि उन्होंने अनुशासन का उल्लंघन किया है। JDU नेतृत्व का मानना है कि पार्टी के अंदर अनुशासन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी कारण यह कार्रवाई की गई है।
संजय झा के फैसले पर सवाल उठाने के बाद हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, छोटू सिंह ने जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के एक फैसले को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना। इसी मामले को आधार बनाकर संगठन ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निलंबित कर दिया। पार्टी का कहना है कि संगठन के निर्णयों के खिलाफ सार्वजनिक बयान देना अनुशासन के दायरे में नहीं आता।
समर्थकों ने फैसले पर जताई नाराजगी
छोटू सिंह के समर्थकों का कहना है कि पार्टी को इतना कठोर कदम नहीं उठाना चाहिए था। उनका दावा है कि छोटू सिंह लंबे समय से जदयू के सक्रिय नेता रहे हैं और संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समर्थकों ने मांग की कि पार्टी नेतृत्व उनसे बातचीत करे और निलंबन का फैसला वापस लेकर उन्हें फिर से संगठन में जिम्मेदारी दे।
फिलहाल पार्टी की ओर से नई प्रतिक्रिया नहीं
प्रदर्शन के बीच जदयू की ओर से फिलहाल कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहता है या समर्थकों की मांग को देखते हुए इस मामले में आगे कोई नया निर्णय लिया जाता है।